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PM मोदी को खाली सदन में नहीं बोलने देंगे, इजरायली स्पीकर का विपक्ष को चैलेंज

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जनवरी 2025 में अमित के न्यायालय के प्रमुख चुने जाने के बाद, न्याय मंत्री यारिव लेविन ने प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनके अधिकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया है और उनसे मिलने या उन्हें न्यायालय के प्रमुख के रूप में संबोधित करने से भी इनकार कर दिया है।

इजरायली संसद नेसेट में विपक्षी सदस्यों द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का बहिष्कार करने की धमकियों से बेपरवाह स्पीकर अमीर ओहाना ने कहा है कि वह उनकी जगह रिक्त सीट को पूर्व सांसदों से भरेंगे। स्थानीय मीडिया ने यह खबर दी। मोदी की इजरायल यात्रा घरेलू राजनीति में उलझती प्रतीत हो रही है। यहां के विपक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर प्रोटोकॉल के अनुसार उच्चतम न्यायालय प्रमुख को आमंत्रित नहीं किया गया तो वे भारतीय नेता के संसदीय संबोधन का बहिष्कार करेंगे।

राष्ट्रीय प्रसारक कान ने सोमवार को बताया कि विपक्षी पार्टी येस एटिड की सांसद मेइराव बेन-अरी ने इस मुद्दे पर एक बैठक के दौरान ओहाना को चुनौती दी। इस पर ओहाना ने सांसद से कथित तौर पर कहा, ‘चिंता मत करो, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी आधे खाली सदन में भाषण नहीं देंगे।’ खबरों के मुताबिक, ओहाना ने कहा कि ‘बेशक’ उच्चतम न्यायालय के प्रमुख यित्ज़ाक अमित को भाषण में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था।

मोदी के 25 फरवरी को दो-दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान वह संभवतः नेसेट को संबोधित करेंगे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग से मुलाकात करेंगे। विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने रेखांकित किया कि जब मोदी सदन को संबोधित करें तो उच्चतम न्यायालय के प्रमुख अमित को नेसेट में आमंत्रित किया जाए।

विपक्ष का प्लान

विपक्ष के सूत्रों का कहना है कि यह बहिष्कार का आह्वान नहीं है, लेकिन सरकार ‘जानबूझकर हमें एक बुरी स्थिति में धकेलने की कोशिश कर रही है।’ उन्होंने कहा, ‘यदि गठबंधन भारत के प्रधानमंत्री के साथ विशेष सत्र के दौरान उच्चतम न्यायालय के प्रमुख का बहिष्कार करता है, तो हम बहस में शामिल नहीं हो पाएंगे।’ लैपिड ने सांसदों से कहा, कि गठबंधन द्वारा अमित का एक और सार्वजनिक बहिष्कार विधायिका के लिए ‘भारी शर्मिंदगी’ का कारण बनेगा।

लैपिड ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि भारत को उस समय हमारे कारण शर्मिंदगी उठानी पड़े, जब एक अरब लोगों के देश के प्रधानमंत्री यहां आधी खाली संसद के सामने खड़े होंगे।’ इजरायल की घरेलू राजनीति में न्यायिक सुधार को लेकर बहस चल रही है। यह एक ऐसा विवादास्पद मुद्दा है, जिसने दो साल से अधिक समय से आबादी को भी बुरी तरह से विभाजित कर दिया है।

जनवरी 2025 में अमित के न्यायालय के प्रमुख चुने जाने के बाद, न्याय मंत्री यारिव लेविन ने प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनके अधिकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया है और उनसे मिलने या उन्हें न्यायालय के प्रमुख के रूप में संबोधित करने से भी इनकार कर दिया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN