Source :- LIVE HINDUSTAN
खबरों की मानें तो NSE इस ऑफर-फॉर-सेल के जरिए अपनी करीब 4% से 4.5% हिस्सेदारी बाजार में उतार सकता है। अनलिस्टेड मार्केट में मौजूदा वैल्यूएशन के आधार पर यह इश्यू 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का होने की संभावना है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, एनएसई ने अपने शेयरधारकों को ‘ऑफर-फॉर-सेल’ का औपचारिक पत्र जारी कर दिया है। यह एनएसई के IPO प्रक्रिया की शुरुआत का संकेत है। खबरों की मानें तो NSE इस ऑफर-फॉर-सेल के जरिए अपनी करीब 4% से 4.5% हिस्सेदारी बाजार में उतार सकता है। अनलिस्टेड मार्केट में मौजूदा वैल्यूएशन के आधार पर यह इश्यू 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का होने की संभावना है।
एनएसई के पत्र में क्या है?
एनएसई के ऑफर-फॉर-सेल के पत्र में उन शेयरधारकों के लिए स्ट्रक्चर तय किया गया है, जो इसके जरिए अपने शेयर बेचने के इच्छुक हैं। इस इश्यू में कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी बल्कि पूरी तरह से मौजूदा निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बेचकर ही फंड जुटाने की योजना है। केवल वे निवेशक ही ऑफर-फॉर-सेल में हिस्सा ले सकेंगे, जिनके पास 15 जून 2025 से शेयर लगातार मौजूद हैं। इच्छुक शेयरधारकों को 27 अप्रैल 2026 तक अपनी अभिरुचि जमा करनी होगी। बता दें कि ऑफर-फॉर-सेल के तहत शेयरों की अंतिम कीमत बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के जरिए तय की जाएगी। इस प्रक्रिया में अगर कोई शेयर नहीं बिकते हैं तो लिस्टिंग के बाद छह महीने तक लॉक-इन अवधि में रखा जाएगा। सेबी नियमों के मुताबिक आईपीओ में वही शेयर बेचे जा सकते हैं, जिन्हें ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने से कम से कम एक साल पहले से होल्ड किया गया हो।
इसके अलावा आठ विधि फर्मों को भी इस निर्गम के कानूनी मामलों की देखरेख के लिए चुना गया है। इनमें सिरील अमरचंद मंगलदास, खेतान एंड कंपनी, लाथम एंड वाटकिंस एलएलपी और ट्राईलीगल शामिल हैं। अन्य नियुक्त मध्यस्थों में एमयूएफजी इनटाइम इंडिया, मकरंद एम जोशी एंड कंपनी, कांसेप्ट कम्युनिकेशन और रेडसियर स्ट्रैटजी कंसल्टेंट्स शामिल हैं।
इससे पहले जनवरी में बाजार नियामक सेबी ने एनएसई को ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ जारी कर एक दशक से अधिक समय से लंबित सूचीबद्धता योजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। एनएसई ने वर्ष 2016 में मौजूदा शेयरधारकों द्वारा लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए प्रारूप दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन संचालन से जुड़ी चिंताओं और ‘को-लोकेशन’ मामले के कारण सेबी ने मंजूरी रोक दी गई थी।
आपको बता दें कि पिछले एक साल में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरधारकों की संख्या में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। जून 2025 तक यह संख्या 1,59,394 हो गई थी, जो मार्च 2025 में 39,201 थी। वहीं दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 1,86,481 हो गई।
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