Source :- LIVE HINDUSTAN
कंपनी ने साफ किया है कि वह इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देगी और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की दिग्गज कंपनी NCC Ltd को बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने बुधवार, 18 फरवरी को बताया कि उसे और उसकी स्टेप-डाउन सब्सिडियरी ओबी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (OBIL) को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएई) की ओर से डिबारमेंट (प्रतिबंध) का आदेश मिला है। NHAI के इस आदेश के तहत दोनों कंपनियों को 17 फरवरी 2026 से अगले दो साल तक NHAI द्वारा जारी किसी भी टेंडर, बोली या आरएफपी (Request for Proposal) में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है। कंपनी को यह आदेश उसी दिन शाम 6:08 बजे प्राप्त हुआ। इस खबर के बाद शेयर बाजार में भी हल्की प्रतिक्रिया दिखी और BSE पर कंपनी का शेयर 1.77% गिरकर 149.45 रुपये पर बंद हुआ।
क्या है डिटेल
कंपनी के अनुसार, यह डिबारमेंट सिर्फ साधारण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से लागू होगा। यानी OBIL और NCC किसी भी रूप में (चाहे कंसेशनायर, कॉन्ट्रैक्टर, ईपीसी क्लैंपर, ओ एंड एम कॉन्ट्रैक्टर, ओ एंड एम एजेंसी या कंसोर्टियम सदस्य) NHAI की परियोजनाओं में भाग नहीं ले सकेंगी। यह कार्रवाई सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की नीति के तहत की गई है और उत्तर प्रदेश में उरई–भोगनीपुर सेक्शन (NH-25) और भोगनीपुर–बराह सेक्शन (नया NH-27) से जुड़े प्रोजेक्ट के संदर्भ में है, जिसे BOT (Annuity) मॉडल पर विकसित किया गया था।
OBIL ने यह प्रोजेक्ट 27 अप्रैल 2006 को हुए कंसेशन एग्रीमेंट के तहत पूरा किया था। कंपनी का कहना है कि परियोजना में देरी जमीन सौंपने में देरी और NHAI की अन्य कथित चूकों के कारण हुई। इसी को लेकर OBIL ने NHAI के खिलाफ मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू की थी। 20 नवंबर 2024 को उसे इस मामले में अनुकूल फैसला भी मिला। हालांकि, NHAI ने इस अवॉर्ड को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और मामला अभी लंबित है। इसके अलावा, प्रोजेक्ट के निष्पादन और मेंटेनेंस को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच अन्य विवाद चल रहे हैं, जिन पर सितंबर 2025 में नई मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की गई थी।
कंपनी ने क्या कहा
कंपनी का कहना है कि डिबारमेंट की यह कार्रवाई उस समय शुरू की गई जब मध्यस्थता की कार्यवाही पहले से जारी थी। OBIL का दावा है कि कंसेशन पीरियड पूरा होने के बाद और बिना सुनवाई का मौका दिए यह आदेश जारी किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। कंपनी ने साफ किया है कि वह इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देगी और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।
क्या होगा असर
वित्तीय असर की बात करें तो NCC ने कहा है कि इस डिबारमेंट का उसके मौजूदा ऑर्डर बुक या चल रही परियोजनाओं पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, आने वाले दो साल में अगर NHAI से जुड़े नए टेंडर के अवसर आते हैं तो कंपनी उनमें भाग नहीं ले सकेगी, जिससे भविष्य के कारोबार पर असर पड़ सकता है। फिलहाल किसी निश्चित वित्तीय नुकसान का आकलन संभव नहीं है।
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