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Navratri Special: मसूरी के पास गिरा था मां सती का सिर, ऐसा शक्तिपीठ जहां से होते हैं बद्रीनाथ-केदारनाथ के दर्शन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Surkanda Devi Temple: पहाड़ों की रानी मसूरी से लगभग 35 से 40 किमी दूर बना है सुरकंडा देवी टेंपल। इस मंदिर को देवी मां के 51 शक्तिपीठों में से एक में गिना जाता है। इस मंदिर में देवी सती का सिर गिरा था. 

नवरात्रि के मौके पर देवी मां के मंदिरों में भक्तों की अपार भीड़ लगती है। खासतौर पर प्राचीन, सिद्धपीठ और शक्तिपीठों मंदिरों में भक्तों का तांता लग रहता है। देवी सती के अंग जिन जगहों पर गिरे वो शक्तिपीठ कहलाते हैं और इन मंदिरों में लोगों की गहरी आस्था है। इन्हीं 51 शक्तिपीठों में से एक मंदिर बना है मसूरी के आगे पहाड़ों पर जहां अक्सल लोग जाा मिस कर देते हैं। अगर आप मसूरी ट्रिप के लिए जा रहे तो इस शक्तिपीठ और पावन धाम में दर्शन किए बगैर ना लौटें। लगभग 2752 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बने इस मंदिर की और खासियत है।

दिख जाती हैं केदारनाथ-बद्रीनाथ की बर्फ से गिरी चोटियां

वैसे तो ये मंदिर इतनी ऊंचाई पर बना है कि ज्यादातर वक्त यहां बादल और कोहरे का साया होता है। लेकिन गर्मियों में जब मौसम साफ होता है तो इस मंदिर से आप केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री पहाड़ों की चोटियां नजर आती हैं। यहीं नहीं यहां से पूरे पहाड़ों का 360 डिग्री व्यू नजर आता है। चकराता, देहरादून, ऋषिकेश, चंद्रबदनी के सुंदर नजारे दिखते हैं।

कहां पर बना है ये मंदिर

मसूरी से आगे धनौल्टी से करीब 8 किमी दूर कनताल नाम की जगह पर मां सुरकंडा देवी का मंदिर बना है। जहां सीढ़ियों के ऊपर चढ़कर आसानी से रोपवे मिल जाता है। वैसे आप चाहें तो मंदिर तक जाने के लिए लगभग 3 किमी की ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। लेकिन जो टूरिस्ट कम समय में मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं वो अक्सर रोप वे का सहारा लेते हैं। जेठ मास के गंगा दशहरा के मौके पर यहां मेला लगता है। जिसमे लोकल श्रद्धालुओं के साथ दूर-दूर से दर्शन के लिए लोग जुटते हैं।

मंदिर तक ट्रैकिंग भी करें

अगर आप इस मंदिर तक ट्रैकिंग के लिए जाना चाहते हैं तो बेस्ट प्लेस है। पहाड़ों पर बिगिनर्स के ट्रैकिंग के लिए ये रास्ता आसान है। कंक्रीट की सीढ़ियों के जरिए रास्ते को बनाया गया है। जिस पर चढ़कर आराम से दो से ढाई घंटे में चढ़ाई की जा सकती है। करीब 850 मीटर की ऊंचाई चढ़नी होगी। ट्रैकिंग के रास्ते में सुंदर पहाड़ों के नजारे देखने को मिलते हैं। जो थकान हावी नहीं होने देते।

ध्यान रहे रास्ते पर ट्रैकिंग के दौरान पानी और स्नैक्स साथ रखें। क्योंकि ट्रैक शुरू हो जाने के बाद रास्ते में किसी भी तरह की दुकानें नहीं मिलती। बारिश के मौसम में मंदिर के ट्रैक पर फिसलन रहती है तो बेहतर ग्रिप वाले शूज जरूर पहनें। सुरकंडा देवी मंदिर का ट्रैक कद्दूखाल से स्टार्ट होता है।

कैसे पहुंचे सुरकंडा देवी टेंपल

सुरकंडा देवी टेंपल तक जाने के लिए सुविधाएं मौजूद है। देहरादून से 63 किमी दूर इस मंदिर तक पहुंचने के लिए प्राइवेट टैक्सी या धनौल्टी के चलने वाली बस से यहां पहुंच सकते हैं। वहीं अगर मसूरी की ट्रिप पर हैं तो धनौल्टी तक प्राइवेट टैक्सी या कैब की मदद से यहां मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। मंदिर तक जाने का रास्ता भीड़भाड़ से दूर और बिल्कुल साफ-सुथरा है। जिस पर चलने के दौरान सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं।

कौन सा मौसम होगा बेस्ट

मंदिर दर्शन का प्लान कर रहे तो मार्च से लेकर जून और फिर अक्टूबर से लेकर दिसंबर का महीना बेस्ट है। कड़ाके की सर्दी में यहां बर्फ भी गिरती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN