Source :- LIVE HINDUSTAN
एलपीजी संकट के बीच केंद्र की सरकार एथेनॉल को एक वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया गया है। आइए डिटेल जान लेते हैं।
एलपीजी संकट के बीच केंद्र सरकार, एथेनॉल को एक वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। जानकारी के मुताबिक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में लगभग 1,000 करोड़ लीटर की अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता को खाना पकाने के काम में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। उम्मीद है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालयों के बीच बनी एक समिति को सौंपा जाएगा। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो ईंधन का मजबूत विकल्प तैयार हो सकता है।
क्या है पूरा मामला?
Moneycontrol की एक रिपोर्ट में सूत्र ने बताया-एथेनॉल को खाना पकाने के लिए एक पूरक स्वच्छ ईंधन के तौर पर देखा जा सकता है न कि LPG के विकल्प के तौर पर। यह आयात पर निर्भरता कम कर सकता है। वहीं, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकता है और अतिरिक्त एथेनॉल का इस्तेमाल करने का एक व्यावहारिक रास्ता दे सकता है।
खास तौर पर बड़े पैमाने पर खाना पकाने के कॉमर्शियल कामों में जैसे कि होटलों, हवाई अड्डों और रेस्टोरेंट में। सूत्र ने बताया कि सरकार एथेनॉल की बढ़ती उपलब्धता और LPG की सप्लाई से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों, दोनों से वाकिफ है। एक बेहतर पॉलिसी बनाने के लिए कमेटी को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपा जाएगा। अधिकारियों से उम्मीद है कि वे कोई भी फैसला लेने से पहले इसकी तकनीकी व्यवहार्यता, कीमत और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी व्यवस्थाओं का आकलन करेंगे।
एथेनॉल के बारे में
भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और टूटे चावल को फर्मेंट और डिस्टिल करके बनाया जाता है। इसे एक रिन्यूएबल बायोफ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर कच्चे तेल का आयात और कार्बन उत्सर्जन कम किया जाता है। घरों में, यह परफ्यूम, पेंट और सफाई के सामान जैसे प्रोडक्ट्स में एक सॉल्वेंट के तौर पर काम करता है। हाल के ग्लोबल टेंशन की वजह से LPG की सप्लाई में कमी आई है, जिससे घरों में इस्तेमाल को प्राथमिकता देनी पड़ रही है जबकि कॉमर्शियल इस्तेमाल करने वालों को कमी का सामना करना पड़ रहा है।
इस बीच, सरकार ने बताया है कि देश में एलपीजी की मांग अब धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट रही है क्योंकि घरेलू आपूर्ति बढ़ी है और गर्मियों की शुरुआत के साथ मांग में कमी आई है। बता दें कि पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के कारण ग्लोबल एनर्जी आपूर्ति प्रभावित होने से भारत में भी एलपीजी की उपलब्धता पर असर पड़ा था। इसके बाद सरकार ने घरेलू रसोई उपयोग को प्राथमिकता देते हुए होटल एवं रेस्तरां जैसे कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों को आपूर्ति में कटौती कर दी थी। इस कदम से उपभोक्ताओं में घबराहट बढ़ी और पिछले महीने दैनिक बुकिंग बढ़कर 88 लाख तक पहुंच गई जबकि सामान्य समय में प्रतिदिन करीब 45 लाख सिलेंडर की ही बुकिंग होती है।
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