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LPG ग्राहकों को अब करना होगा यह काम, घरेलू एलपीजी पर सरकार की अपील

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिंदी में पोस्ट करते हुए बताया कि सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (e-KYC) कराना जरूरी है।

LPG Gas Cylinder: घरेलू एलपीजी ग्राहकों के लिए सरकार ने एक अहम अपील जारी की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार (10 मार्च) को सभी एलपीजी उपभोक्ताओं से जल्द से जल्द अनिवार्य e-KYC कराने को कहा है। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिंदी में पोस्ट करते हुए बताया कि सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (e-KYC) कराना जरूरी है। मंत्रालय के मुताबिक, यह प्रक्रिया बिल्कुल मुफ्त, आसान और तेज है और इसे लोग घर बैठे अपने स्मार्टफोन से कुछ ही मिनटों में पूरा कर सकते हैं।

सरकार की अपील

सरकार की यह अपील ऐसे समय आई है जब देश के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव को बड़ी वजह माना जा रहा है, जिससे वैश्विक ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को e-KYC कराने के लिए एक लिंक भी साझा किया है, जहां से लोग पूरी जानकारी लेकर प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि समय पर e-KYC पूरा करने से एलपीजी सेवाओं में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी।

घर बैठे करें e-KYC

अगर आप घर बैठे e-KYC करना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ आसान स्टेप्स दिए गए हैं। सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी गैस कंपनी (इंडेन, भारत गैस या एचपी गैस) का मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद आधार फेसआरडी ऐप डाउनलोड करना होगा। फिर गैस कंपनी के ऐप में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए आधार फेसआरडी ऐप के जरिए फेस स्कैन करना होगा। फेस ऑथेंटिकेशन पूरा होते ही e-KYC प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो जाएगी।

सरकार की योजना

इधर सरकार ने एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। सोमवार रात जारी एक गजट अधिसूचना के मुताबिक अब देश में उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति उन इकाइयों को प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी जो एलपीजी उत्पादन करती हैं। इससे पहले घरेलू प्राकृतिक गैस की प्राथमिक आपूर्ति मुख्य रूप से सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस सेक्टर को दी जाती थी। नए फैसले के बाद अब एलपीजी को भी प्राथमिकता सूची में शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब है कि एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड गैस की जरूरतें पूरी करने के बाद ही बाकी क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

दरअसल पश्चिम एशिया में हालिया सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी क्षेत्र में जवाबी कदम उठाए, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले समुद्री यातायात में तेज गिरावट आई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और एलएनजी कारोबार के लिए बेहद अहम माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के समुद्री मार्ग से भेजे जाने वाले लगभग 20% तेल और करीब एक-तिहाई एलएनजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है।

इसी बीच तेल मंत्रालय ने व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की अचानक कमी की जांच के लिए एक समिति भी बनाई है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के तीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टरों की यह समिति रेस्तरां, होटल और अन्य उद्योगों को एलपीजी आपूर्ति से जुड़े मामलों की समीक्षा करेगी। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल करीब 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से लगभग 87% गैस घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल की जाती है, जबकि बाकी हिस्सा वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में जाता है। सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN