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HSBC Layoffs: बैंकिंग सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर अब साफ दिखने लगा है। AI के कारण 20,000 नौकरियों पर खतरा। जानिए किन कर्मचारियों पर पड़ेगा असर और कब तक होगी छंटनी।
बैंकिंग सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर अब साफ दिखने लगा है। दुनिया के बड़े बैंकों में शामिल HSBC Holdings में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी चल रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी आने वाले कुछ वर्षों में करीब 20,000 कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है, जो कुल वर्कफोर्स का लगभग 10% हिस्सा है।
AI के कारण बदल रहा बैंकिंग सेक्टर
HSBC में यह कदम AI आधारित तकनीकों को अपनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कंपनी का मानना है कि कई काम अब ऑटोमेशन और AI के जरिए किए जा सकते हैं, जिससे कर्मचारियों की जरूरत कम हो जाएगी। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर में टेक्नोलॉजी का दबदबा और बढ़ेगा।
किन कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर?
रिपोर्ट के अनुसार, छंटनी का सबसे ज्यादा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो सीधे ग्राहकों से जुड़े नहीं हैं। खासतौर पर बैक ऑफिस, ग्लोबल सर्विसेज सपोर्ट फंक्शन आदि। इन क्षेत्रों में AI के जरिए काम किया जा सकता है, इसलिए यहां नौकरियों में कटौती की संभावना ज्यादा है।
कब तक होगा बदलाव?
HSBC की यह योजना 3 से 5 साल की अवधि में लागू की जा सकती है। हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और कंपनी अंदरूनी स्तर पर चर्चा कर रही है। 2025 के अंत तक HSBC में करीब 2.1 लाख कर्मचारी थे, ऐसे में 20,000 की छंटनी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
लागत घटाने की रणनीति भी वजह
कंपनी पहले ही लागत कम करने की दिशा में काम कर रही है। HSBC ने हाल ही में 1.5 अरब डॉलर की लागत बचत का लक्ष्य तय किया था, जिसे समय से पहले हासिल करने की उम्मीद जताई गई है। सीईओ जॉर्ज एल्हेडेरी के नेतृत्व में कंपनी कई बड़े बदलाव कर चुकी है, जिसमें कारोबार बेचना और स्ट्रक्चर बदलना शामिल है।
AI के कारण ग्लोबल लेवल पर खतरा
ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले 3–5 वर्षों में दुनियाभर के बैंक AI के कारण 2 लाख तक नौकरियां खत्म कर सकते हैं। वहीं 2026 में ही टेक सेक्टर में छंटनी का असर दिखने लगा है।
कई कंपनियों में 35,000 कर्मचारियों की छंटनी
Amazon, Meta और Oracle जैसी कंपनियां पहले ही बड़े लेऑफ कर चुकी हैं। AI के बढ़ते इस्तेमाल से जहां कंपनियों की लागत घटेगी, वहीं कर्मचारियों के लिए नई चुनौतियां भी पैदा होंगी। खासकर ऐसे रोल, जिन्हें ऑटोमेशन से बदला जा सकता है, सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
यानी HSBC में संभावित छंटनी यह दिखाती है कि AI अब सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि रोजगार पर असर डालने वाली बड़ी ताकत बन चुका है। आने वाले समय में कंपनियां तेजी से ऑटोमेशन की ओर बढ़ेंगी, जिससे जॉब मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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