Source :- LIVE HINDUSTAN
मेकअप आजकल हर किसी को करना पसंद है और बिना मेकअप के लोग सोशल मीडिया पर अपनी फोटो तक पोस्ट नहीं करते। मेकअप का ट्रेंड भी हर दिन बदलता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है आखिर ये कहां से शुरू हुआ। चलिए आपको मेकअप से जुड़ा इतिहास बताते हैं।
मेकअप आज के समय में सभी के लिए जरूरी चीज बन चुकी है। आजकल हर किसी के लिए सुंदरता के मायने बदल चुके हैं और लोगों को नेचुरल रहना ज्यादा पसंद नहीं आता है। बिना मेकअप के लोग बाहर निकलना पसंद नहीं करते हैं। पहले मेकअप सिर्फ कला के लिए इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब आमतौर पर हर किसी के पास मेकअप के हजारों प्रोडक्ट्स हैं। मेकअप आज के समय में किसी का भी हुलिया पूरी तरह से बदल सकता है लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब कलाकार अपनी आंखों को उभारने के लिए मेकअप लगाते थे। जिससे उनकी कला को पसंद किया जाए। पहले के लोग चेहरे पर मेकअप के नाम पर रेड क्ले, ऐश, डास्ट समेत कई नेचुरल चीजें लगाया करते थे। आंखों को उभारने के लिए काला रंग या फिर काजल का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब मेकअप के इतने प्रोडक्ट्स आ चुके हैं कि आप हर दाग-धब्बे को छिपा सकते हैं। चलिए आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि मेकअप कैसे ब्यूटी टूल बन गया।
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मेकअप का पुराना इतिहास
मेकअप की शुरुआत सबसे पहले प्राचीन सभ्यताओं में देखने को मिलती है, जब रानियां सुंदरता को निखारने के लिए नेचुरल चीजों से बना लेप या फिर लाली लगाया करती थीं। माना जाता है कि लगभग 4000 ईसा पूर्व में प्राचीन मिस्र में लोग सुंदरता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते थे। उस समय पुरुष और महिलाएं दोनों ही आंखों को उभारने के लिए काजल जैसे पदार्थ का उपयोग करते थे, जिसे कोहल कहा जाता था। यह न केवल सुंदरता बढ़ाने के लिए बल्कि धूप और इंफेक्शन से भी आंखों को बचाता था।
मेकअप को किया गया बैन
धीरे-धीरे मेकअप करने को लेकर काफी नॉर्मल किया जाने लगा लेकिन मध्यकाल के दौरान यूरोप में मेकअप का उपयोग कुछ समय के लिए कम हो गया क्योंकि इसे कई बार सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता था। लेकिन फिर 16वीं शताब्दी में इंग्लैंड की महारानी Elizabeth I ने अपने चेहरे के दाग-धब्बे को छिपाने के लिए मेकअप का इस्तेमाल किया। यहां से एक बार फिर मेकअप का दौर शुरू हुआ और फिर हॉलीवुड की हीरोइनों ने इसे अपनाया। उस वक्त गोरे चेहरे के साथ लाल लिपस्टिक का दौर चला और काफी ट्रे़ंड में रहा।
नेल पॉलिश और लिपस्टिक
इसके बाद मेकअप के नाम पर चीन और जापान जैसी एशियाई सभ्यताओं की महिलाएं नाखूनों को रंगने के लिए नेचुरल कलर्स का इस्तेमाल करती थी। आज उसकी जगह नेल पॉलिश ने ले ली है। तो वही सुमेरियन सभ्यता के लोगों को लिपस्टिक के शुरुआती उपयोगकर्ताओं का श्रेय दिया जा सकता है। इन लोगों ने ही होठों को लाल दिखाने के लिए नेचुरल लाल रंगों का इस्तेमाल करना शुरू किया और इसे नाम दिया गया था लाली। लाल फूल, मेहंदी, मिट्टी और कुछ कीड़ों का इस्तेमाल कर नेचुरल लिपस्टिक बनाई गई। इसके बाद धीरे-धीरे लिपस्टिक नेचुरल चीजों के बजाय बीवैक्स से बनाई जाने लगी और अब इसे केमिकल और रंगों से बनाया जाता है। अब कई रंगों में लिपस्टिक आती है।
बड़ा बदलाव हुआ
जब मेकअप का दौर चलने लगा, तब 20वीं सदी में मेकअप इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आया और कई कंपनियों ने मेकअप प्रोडक्ट्स बनाने शुरू किए। फिर फाउंडेशन, काजल, आईलाइनर, ब्लश, हाईलाइटर, लिपस्टिक, नेल पॉलिश, जैसी चीजों को धड़ल्ले और कई रंगों में बनाया जाने लगा। अब मेकअप सिर्फ चेहरे की सुंदरता को निखारने तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि अब ये आत्म-विश्वास का भी एक जरिया बन चुका है। सोशल मीडिया और फैशन इंडस्ट्री के बदलते दौर की वजह मार्केट में हर दिन नए-नए ट्रेंड तेजी से सामने आ रहे हैं। अब ऑर्गेनिक और स्किन-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
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