Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव अब अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। अमेरिका ने मध्य-पूर्व में पिछले दो दशक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। अमेरिकी वायुसेना की शान F35, F22 से लेकर नौसेना के विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड और अब्राहम लिंकन पहुंच चुके हैं।
US Iran tension: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच हुई चर्चा का ज्यादा कोई मतलब निकलकर सामने नहीं आया है। इस बीच दोनों पक्षों की तरफ से लगातार तीखी बयानबाजी की जा रही है। इसी बीच ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व के क्षेत्र में पिछले दो दशक में सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है। वाशिंगटन की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब ईरान के ऊपर उसके हमला करने के कयास लगाए जा रहे हैं।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक इतनी बड़ी तैनाती के साथ अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है और इजरायल भी उसका साथ देता है, तो यह युद्ध कई हफ्तों तक चलेगा। यह युद्ध किसी सीमित अभियान की जगह एक पूर्ण युद्ध की तरह होगा।
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य-पूर्व ने पिछले 2 दशक में इतनी बड़ी अमेरिकी सैन्य तैनाती नहीं देखी है। ऐसी पिछली तैनाती 2003 के आसपास देखी गई थी, जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया था। अभी हाल में अमेरिका की तरफ से आधुनिक एफ-35, एफ-22 को मध्य-पूर्व की तरफ भेजा गया है। इससे इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका ईरान पर अब तेज हमला करने वाला है।
इन हवाई शक्तियों के अलावा अमेरिका का दूसरा सबसे मजबूत विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड भी इसी क्षेत्र में शेलिंग कर रहा है। इससे पहले अब्राहम लिंकन भी इसी क्षेत्र में तैनात है। इसके अलावा बड़े हवाई अभियानों के लिए महत्वपूर्ण कमांड एंड कंट्रोल विमान भी भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्र में अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती भी की गई है।
क्या हमला कर देंगे राष्ट्रपति ट्रंप?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अपने अचानक लिए गए फैसलों के लिए जाने जाते हैं। बयान बाजी में भी उनका कोई सानी नहीं है। हालांकि, वेनेजुएला के साथ उन्होंने जो किया उसके बाद इस बात की संभावना बढ़ गई है कि वह ईरान पर भी हमला बोल सकते हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वह ईरान पर हमला करने का आदेश देंगे या फिर नहीं। और यदि आदेश देते भी हैं, तो उसका उद्देश्य क्या होगा। क्योंकि ईरान, वेनेजुएला नहीं है, जहां पर मादुरो को उठाने के बाद आप कब्जा कर लेंगे। ईरान एक श्रृंखलाबद्ध शासन व्यवस्था के जरिए चलता है, ऐसे में अमेरिका के लिए इसे तोड़ना आसान नहीं होगा।
दरअसल, ट्रंप की तरफ से कहा गया है कि ईरान को अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को त्यागना होगा। इसके साथ ही उन्होंने खामेनेई को भी सत्ता से हटने के लिए कहा है। हालांकि ईरान की तरफ से इन दोनों ही बातों के लिए इनकार कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप को संभावित सैन्य विकल्पों की ब्रीफिंग दे दी गई है। अगर इन विकल्पों को खरा उतरा जाता है, तो ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को अधिकतम नुकसान पहुंचाया जाएगा।
रूस का बयान आया सामने
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर रूस की तरफ से भी बयान जारी किया गया है। मॉस्को और तेहरान के बीच जारी नौसैनिक अभ्यास पर टिप्पणी करते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि यह अभ्यास अमेरिकी तनाव की वजह से नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि यह पहले से ही तय थे और दोनों पक्षों की इस पर सहमति थी।
अमेरिका के साथ ईरान के तनाव को लेकर पेसकोस ने बका कि वह अपने ईरानी मित्रों और क्षेत्र के सभी लोगों से संयम और विवेक बरतने का आह्वान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव की वृद्धि के बीच भी उन्हें उम्मीद है कि कूटनीतिक के माध्यम से जल्दी ही शांति स्थापित की जाएगी।
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