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EPFO: पेंशन कैलकुलेशन का बदलेगा तरीका? सरकार ने दिया जवाब

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) को लेकर लंबे समय से चल रही मांगों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि फिलहाल पेंशन को असली बेसिक सैलरी के आधार पर बिना किसी सीमा के जोड़ने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

EPFO Latest News: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) को लेकर लंबे समय से चल रही मांगों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि फिलहाल पेंशन को असली बेसिक सैलरी के आधार पर बिना किसी सीमा के जोड़ने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह जानकारी केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने 30 मार्च 2026 को लोकसभा में लिखित जवाब के दौरान दी।

सरकार ने क्या कहा

दरअसल, सांसद गिरिधारी यादव ने सरकार से पूछा था कि क्या EPS पेंशन अभी भी ₹15,000 की सैलरी कैप के आधार पर ही तय होती है, जिससे ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को कम पेंशन मिलती है? साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या सरकार भविष्य में इसे बदलकर असली सैलरी के आधार पर पेंशन तय करने की योजना बना रही है।

मंत्री ने क्या कहा

अपने जवाब में मंत्री ने साफ किया कि EPS-1995 एक “परिभाषित अंशदान-परिभाषित लाभ” सामाजिक सुरक्षा योजना है। उन्होंने बताया कि पेंशन फंड में योगदान दो हिस्सों से आता है—एक नियोक्ता का 8.33% और दूसरा केंद्र सरकार का 1.16%, लेकिन यह सरकारी योगदान अधिकतम ₹15,000 सैलरी तक ही सीमित है। यही वजह है कि पेंशन पूरी तरह असली सैलरी से लिंक नहीं हो पाती।

मंत्री ने यह भी बताया कि 1 सितंबर 2014 के बाद नियम और सख्त किए गए हैं। अब केवल वही कर्मचारी EPS के सदस्य बन सकते हैं जिनकी जॉइनिंग के समय सैलरी ₹15,000 या उससे कम हो। हालांकि, 2014 से पहले के कुछ कर्मचारियों को ज्यादा वेतन पर योगदान का विकल्प दिया गया था, लेकिन नए कर्मचारियों के लिए यह सीमा लागू है।

पेंशन कैलकुलेशन के तरीके में बदलाव!

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अब Code on Social Security, 2020 लागू हो चुका है, जिसके तहत EPS भी आता है। हालांकि, इस नए कानून के बावजूद पेंशन कैलकुलेशन के तरीके में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। इधर, कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगें लगातार तेज होती जा रही हैं। उनका कहना है कि ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन, जो 2014 से नहीं बढ़ी, आज के महंगाई भरे दौर में बेहद कम है। ट्रेड यूनियन और पेंशनर्स संगठन इसे बढ़ाकर ₹7,500 से ₹9,000 करने और उसमें महंगाई भत्ता (DA) जोड़ने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने इन मांगों को माना तो है, लेकिन फंड पर बढ़ते बोझ और वित्तीय संतुलन की चुनौतियों का हवाला देते हुए अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN