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BJP ने बांग्लादेश चुनाव में जीती एक सीट, सोशल मीडिया पर खूब वायरल; क्या है हकीकत

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Source :- LIVE HINDUSTAN

बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी ने बहुमत हासिल किया है। लेकिन अगर हम आपसे बताएं कि बांग्लादेश में एक सीट बीजेपी ने भी जीती है तो आपको कैसा लगेगा? निश्चित तौर पर आप चौंक जाएंगे, लेकिन इसमें एक ट्विस्ट है।

बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी ने बहुमत हासिल किया है। लेकिन अगर हम आपसे बताएं कि बांग्लादेश में एक सीट बीजेपी ने भी जीती है तो आपको कैसा लगेगा? निश्चित तौर पर आप चौंक जाएंगे, लेकिन इसमें एक ट्विस्ट है। असल में यह भारत की सत्ताधारी बीजेपी नहीं है। यह बांग्लादेश जातीय पार्टी है, जिसका शॉर्ट फॉर्म बीजेपी होता है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब कमेंट्स हो रहे हैं, जहां बांग्लादेश की बीजेपी को भारत की बीजेपी समझा जा रहा है।

कैसा रहा प्रदर्शन
अब यह भी जान लेते हैं कि बांग्लादेश के चुनाव में वहां की बीजेपी का कैसा रहा। भारत में तो बीजेपी कई साल से सत्ता में हैं। लेकिन इसके उलट बांग्लादेश की बीजेपी मात्र एक ही सीट जीतने में कामयाब रही। बता दें बीजेपी वहां पर तारिक रहमान की बीएनपी की सहयोगी पार्टी है। बीएनपी ने शुक्रवार को बांग्लादेश में 209 सीटें जीतकर करीब दो दशक बाद सत्ता में वापसी की है। तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

चुनाव में ऐसा रहा हाल
बीएनपी के सहयोगी दलों, बीजेपी और अन्य ने चार सीटें जीती हैं। इसके साथ इस गठबंधन की कुल सीटों की संख्या 212 हो गई है। बीजेपी ने बारिसल डिवीजन की भोला-1 (सदर) विधानसभा में जीत हासिल की है। यहां पर बीजेपी के मुखिया अंदालीव रहमान पार्थो, जो एक वकील हैं, दूसरी बार जीते हैं। उन्हें करीब 30 हजार वोट मिले हैं। पार्थो ने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार नजरुल इस्लाम को हराया। आधिकारिक नतीजों के मुताबिक पार्थो को 1,05,543 वोट मिले, जबकि जमात का उम्मीदवार 75,337 वोटों पर सीमित रह गया।

कौन हैं रहमान पार्थो
रहमान पार्थो का जन्म 20 अप्रैल 1974 को हुआ था। वह बांग्लादेश की राजनीति के युवा चेहरों में शामिल हैं। उन्होंने साल 2008 में भोला-1 सीट से पहली बार चुनाव जीता था। उस वक्त वह बांग्लादेश के सबसे युवा विपक्षी नेता और सांसद थे। पार्थो के पिता नजीउर रहमान मंजूर, एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, जिन्होंने 1971 की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में वह मंत्री बने थे और ढाका के मेयर भी बने थे। उन्होंने साल 2001 में जातीय पार्टी से अलग होकर बांग्लादेशी जातीय पार्टी बनाई थी।

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