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BBC में बड़ी छंटनी! 2,000 नौकरियां जाएंगी, कंपनी ने बताई ये बड़ी वजह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

BBC layoffs: BBC ने बढ़ते खर्च और आर्थिक दबाव के चलते अगले दो वर्षों में करीब 2,000 नौकरियां खत्म करने का फैसला लिया है, जिससे कंपनी अपने बजट में लगभग 10% की कटौती कर सके। महंगाई, घटती आय और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक फंडिंग मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

BBC layoffs: ब्रिटेन की मशहूर ब्रॉडकास्टिंग संस्था BBC एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। बढ़ते खर्च और आर्थिक दबाव के चलते कंपनी ने अगले दो साल में करीब 2,000 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है। इसका मकसद अपने कुल बजट में लगभग 10% यानी करीब 500 मिलियन पाउंड की बचत करना है। यह कदम पिछले एक दशक में सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है, जिससे कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

बीबीसी के अंतरिम डायरेक्टर जनरल रोडरी तलफान डेविस (Rhodri Talfan Davies) ने कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कहा कि यह फैसला आसान नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई, लाइसेंस फीस से होने वाली आय में दबाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता इसके पीछे मुख्य कारण हैं। बीबीसी पहले ही संकेत दे चुका था कि 2029 तक उसे अपने खर्चों में बड़ी कटौती करनी पड़ेगी और अब इसका असर दिखना शुरू हो गया है।

दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है, जब मैट ब्रिटिन (Matt Brittin) जल्द ही नए डायरेक्टर जनरल का पद संभालने वाले हैं। उन्हें ऐसे समय में जिम्मेदारी मिल रही है, जब संस्था वित्तीय संकट, बदलते मीडिया ट्रेंड और कानूनी चुनौतियों से जूझ रही है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से जुड़े एक विवादित डॉक्यूमेंट्री एडिट के बाद कंपनी पर मानहानि का मुकदमा भी चल रहा है, जिससे बीबीसी की छवि और दबाव दोनों बढ़े हैं।

बीबीसी की फंडिंग का मुख्य स्रोत यूके में लिया जाने वाला लाइसेंस शुल्क है, जिसे टीवी देखने वाले हर घर को देना होता है। हालांकि, डिजिटल स्ट्रीमिंग के बढ़ते दौर में इस मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि अब कई लोग रेगुलर टीवी नहीं देखते। ऐसे में सरकार और इंडस्ट्री दोनों इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या भविष्य में फंडिंग का तरीका बदला जा सकता है।

बीबीसी का यह कदम सिर्फ लागत घटाने की कोशिश नहीं, बल्कि बदलते मीडिया परिदृश्य में खुद को ढालने की रणनीति भी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह संस्था कैसे अपने ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखते हुए नए दौर की चुनौतियों का सामना करती है। (S-apnews)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN