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‘AI के इंपैक्ट पर फोकस करने का यह बिल्कुल सही समय, हेल्थ के लिए भी बड़े काम का है AI’

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Source :- LIVE HINDUSTAN

फ्रांस के राष्ट्रपति की एआई मामलों की विशेष दूत ऐनी बोवेरोट ने अनिरुद्ध सूरी के साथ बैठकर इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 की योजनाओं, एआई क्षेत्र में उभरती चुनौतियों और फ्रांस और भारत जैसे देशों के लिए अवसरों के क्षेत्रों पर चर्चा की।

फ्रांस के राष्ट्रपति की एआई मामलों की विशेष दूत ऐनी बोवेरोट (Anne Bouverot) ने अनिरुद्ध सूरी के साथ बैठकर इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 की योजनाओं, एआई क्षेत्र में उभरती चुनौतियों और फ्रांस और भारत जैसे देशों के लिए अवसरों के क्षेत्रों पर चर्चा की। यहां पॉडकास्ट- एआई फ्यूचर्स: द रोड टू इंडिया एआई समिट 2026 के संपादित अंश दिए गए हैं, जिसे सूरी ने इंडिया एआई मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeiTY) के सहयोग से होस्ट किया है।

पिछले एक साल में एआई में आई नई चुनौतियों के बारे में आपकी क्या राय है?

पिछले साल पेरिस शिखर सम्मेलन में, हमने एआई और एनर्जी कन्जंप्श और क्लाइमेट पर इसके प्रभावों पर पहली वैश्विक चर्चा की थी। यह चर्चा अभी भी जारी है और देश अधिक डेटा सेंटर, एनर्जी सप्लाई चेन और एआई डिवेलपमेंट प्लान्स को व्यवस्थित करने की होड़ में लगे हैं। दूसरी चुनौती है भविष्य के काम पर एआई का प्रभाव। 2023 में Bletchley Park में आयोजित एआई सेफ्टी समिट में यह डराने वाली भविष्यवाणी की गई थी कि दो साल के भीतर आधी नौकरियां गायब हो जाएंगी, जो अभी तक सच नहीं हुआ है। हालांकि, इसमें बड़े बदलाव की संभावना है। इसने पॉलिसी फ्रंट पर और वर्कर्स दोनों का ध्यान खींचा किया है। तीसरी चुनौती है एआई का सोशल इंपैक्ट। यह शिक्षा या स्वास्थ्य सेवा को कैसे बदलेगा? इसके कई लाभ हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ये लाभ सभी को समान रूप से मिलें, न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों को।

जैसे-जैसे कंपनियां एआई को और ज्यादा अपनाना शुरू करेंगी, तो क्या जॉब्स पर एआई का प्रभाव और तेजी से बढ़ेगा?

बड़े स्तर पर देखा जाए, तो मुझे ऐसा नहीं लगता। Philippe Aghion के साथ मैंने जो काम किया, जिसने उन्हें नोबेल पुरस्कार दिलाने में मदद की, उसमें अलग-अलग दौर में इनोवेशन का अध्ययन किया गया था। डिजिटल इनोवेशन की अलग-अलग लहरों में नौकरियो पर दिक्कतें आती हैं और लोगों को फिर से प्रशिक्षित करने की जरूरत पड़ती है। हालांकि, इसके साथ ही बहुत सारी नई नौकरियां भी पैदा होती हैं। साइबर सेफ्टी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि एआई से सुरक्षा को लेकर कई खतरे सामने आ रहे हैं। इसी तरह कोडिंग में हम एआई के यूज से बहुत सारे बेनिफिट देखने की उम्मीद कर सकते हैं। एक बार जब ये एआई सिस्टम कोड तैयार कर लेते हैं, तो आपको इसकी जांच और वेरिफिकेशन करने की आवश्यकता होती है। इससे आईटी इंजीनियरों के काम में बदलाव आएगा, लेकिन हमें उनकी आवश्यकता बनी रहेगी।

पिछले साल के एआई डिवेलपमेंट को लेकर आप सबसे ज्यादा किस बात से उत्साहित हैं?

एआई और हेल्थ। मैं नवंबर में भारत में थी और मैंने एआई के कुछ बेहतरीन काम देखे जो टीबी के साथ ही डायबिटीज से होने वाली ब्लाइंडनेस को समय रहते डिटेक्ट करने में काफी मददगार हैं। फ्रांस में मैंने ब्रेस्ट कैंसर का समय रहते इसका पता लगाने में इसके कुछ बेहतरीन यूज देखे हैं।

पिछले साल पेरिस शिखर सम्मेलन की कुछ जरूरी बातें और ऐक्शन आइटम क्या थे?

शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रॉन ने की थी और इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों, सीईओ और रिसर्चर्स ने भाग लिया था। यह मल्टी-स्टेकहोल्डर स्ट्रक्चर वाकई में बहुत सहायक रहा। यह शिखर सम्मेलन एक विशेष जियोपॉलिटिकल क्षण में हुआ, जब अमेरिका में स्टारगेट की घोषणा हुई और फिर चीन में डीपसीक की खबर आई। हमने दुनिया भर के स्टार्टअप्स को शोकेस किया – फ्रांस में मिस्ट्रल, कनाडा में Cohere और जर्मनी में हेलसिंग। इन घटनाक्रमों ने दिखाया कि रेस अभी भी जारी है और दूसरे लोग भी एआई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पेरिस शिखर सम्मेलन से मेरे लिए यही एक बड़ा निष्कर्ष है। हमने एआई के क्लाइमेट इंपैक्ट को कम करने में मदद करने के लिए Coalition for Sustainable AI जैसे जरूरी ग्लोबल इनिशिएटिव्स की भी घोषणा की। हमें भारत में अगले शिखर सम्मेलन की घोषणा से विशेष रूप से खुशी हुई क्योंकि पिछले शिखर सम्मेलन नॉर्दर्न हेमिस्फेयर में आयोजित किए गए थे।

हम अमेरिका और चीन में टैलेंट के कॉन्सेंट्रेशन के बारे में पर्याप्त चर्चा नहीं कर रहे हैं। इस समस्या के बारे में आपके क्या विचार हैं?

प्रतिभा बेहद महत्वपूर्ण है और इसे एक या दो देशों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। कई देशों में शानदार एजुकेशन सिस्टम है – भारत में, आप ऐसे प्रतिभाशाली इंजीनियर और वैज्ञानिक पैदा करते हैं, जिन्हें दुनिया भर में जाना जाता है और फ्रांस में भी हमारे पास बेहतरीन लोग हैं। अमेरिका में दुनिया भर से प्रतिभाओं को आकर्षित करने का मॉडल रहा है, लेकिन अब वे ऐसा करने में उतने इच्छुक नहीं दिखते, जिससे लोगों के लिए आना और टिकना बहुत मुश्किल हो गया है। फ्रांस और भारत जैसे देशों के लिए यह एक बड़ा अवसर है कि वे इसे सार्वजनिक और निजी परियोजनाओं के रूप में लें जो लोगों को यहां रहने या वापस आने के लिए प्रेरित करें।

आपको किस देश की एआई स्ट्रैटिजी सबसे अधिक प्रभावित करती है?

अमेरिका की लेटेस्ट एआई स्ट्रैटिजी बहुत ही जबर्दस्त है। ग्लोबल शहरों में सिंगापुर हमेशा एआई-रेडी देशों में टॉप पर रहता है। वे ट्रेनिंग, इनोवेशन और अडॉप्ट करने में काफी अच्छे हैं। यूरोप, खास तौर से फ्रांस को अपनी एआई स्ट्रैटिजी में जिस एक चीज बदलने की जरूरत है, वह जोखिम लेने की अधिक क्षमता और तेज गति। भारत को अपने प्रशिक्षित प्रतिभाओं का बेहतर लाभ उठाना चाहिए। अमेरिका और चीन दोनों को दूसरों के साथ बेहतर ढंग से काम करने की जरूरत है। फ्रांस और दुनिया के अन्य सभी देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है और मुझे खुशी है कि हम फ्रांस और भारत के बीच Year of Innovatoion के जरिए ऐसा कर रहे हैं।

कई देशों में चुनौती डिजिटल संप्रभुता हासिल करने के साथ-साथ नवीनतम तकनीकों को अपनाना और उनका प्रसार करना भी है। फ्रांस और भारत जैसे देश इन दो परस्पर विरोधी उद्देश्यों के बीच संतुलन कैसे बना सकते हैं?

मेरा मानना ​​है कि आपको अडॉप्शन के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध होना चाहिए, लेकिन आपको विकल्प भी खुला रखना चाहिए। बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अडॉप्ट करें, लेकिन कुछ क्षेत्रों को इनोवेशन के लिए रिजर्व रखें। इनोवेशन में आपको दूसरे देशों के साथ पार्टनरशिप की स्थिति में रहना होगा। इसलिए, फ्रांस, भारत, जापान और ब्राजील के बीच साझेदारी के बारे में दिल्ली में की जाने वाली कुछ घोषणाएं बहुत आशाजनक हैं। राष्ट्रपति मैक्रॉन दिल्ली आ रहे हैं। 2026 को भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर के रूप में भी मनाया जाएगा, जो हमारे दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों और सक्रिय रिश्तों का जश्न मनाने का एक शानदार अवसर है।

इस शिखर सम्मेलन का एक लक्ष्य इंक्लूजन है। आपको क्या लगता है कि आम लोगों को एआई शिखर सम्मेलन में दिलचस्पी क्यों होनी चाहिए?

पेरिस में हमने पाया कि एआई हर किसी के लिए एक बेहद दिलचस्प विषय है। लोगों के मन में एआई को लेकर चिंता, उम्मीदें, भ्रम और सवाल हैं और वे इन पर चर्चा करने के अवसर चाहते हैं। हमने पूरे फ्रांस में कई सहायक कार्यक्रम भी आयोजित किए, जहां लोग स्थानीय स्तर पर कुछ विशेषज्ञों से बातचीत कर सकते थे। हमारे कुछ व्यावसायिक संगठनों द्वारा आयोजित एआई का ‘टूर डी फ्रांस’ बेहद सफल रहा। भारत भी इसी तरह के क्षेत्रीय पूर्व-शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है।

भारत एआई इंपैक्ट समिट से बाकी दुनिया क्या उम्मीद कर रही है?

मुझे इसका नाम, ‘एआई इम्पैक्ट समिट’, बहुत पसंद है क्योंकि असल में महत्वपूर्ण यह है कि एआई का लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। क्या इसका स्वास्थ्य सेवा पर वाकई कोई प्रभाव पड़ेगा? क्या इसका शिक्षा पर वाकई कोई प्रभाव पड़ेगा? कृषि, ऐरोनॉटिक्स जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को बेहतर बनाने में इसका क्या महत्व होगा? अब प्रभाव का महत्व इसलिए है क्योंकि टेक्नोलॉजी परिपक्व हो रही है और इसका सार्थक प्रभाव न केवल समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं के लोगों पर, बल्कि दुनिया भर के लोगों पर पड़ सकता है।

आप इस पूरे पॉडकास्ट को यहां देख सकते हैं:

अनिरुद्ध सूरी एक वेंचर कैपिटलिस्ट, द ग्रेट टेक गेम पॉडकास्ट के होस्ट और Carnegie India के नॉन-रेसिडेंट स्कॉलर हैं।

(Photo Credit : IT Chronicles)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN