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पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाएंगी ट्रंप की हरकतें? इस एक डिमांड पर अटकी ईरान से बात

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Source :- LIVE HINDUSTAN

डोनाल्ड ट्रंप की सख्त ‘परमाणु शर्त’ के कारण ईरान से डील अटक गई है। इससे ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा, जिससे भारत में जल्द ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। जानें ट्रंप की जिद का आपकी जेब पर क्या असर होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी समझौते यानी डील के लिए एक बहुत सख्त और स्पष्ट शर्त रख दी है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जब तक तेहरान यह पूरी तरह स्वीकार नहीं कर लेता कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे, तब तक कोई डील संभव नहीं है। ईरान की हालिया पेशकश में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और युद्ध समाप्त करने की बात कही गई लेकिन परमाणु मुद्दे को बाद में टालने का प्रस्ताव है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस पेशकश को ठुकरा दिया है। ट्रंप और ईरान के बीच चल रही इस तनातनी ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल का डर पैदा कर दिया है।

क्या है ट्रंप की वह ‘एक डिमांड’?

ट्रंप ने खुली और स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक ईरान इस बात की पूरी तरह से गारंटी नहीं देता कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा या अपने पास नहीं रखेगा, तब तक अमेरिका की तरफ से कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। यह मांग ईरान के लिए एक बहुत बड़ा कूटनीतिक दबाव है। ईरान हमेशा से दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। वहीं, अमेरिका और पश्चिमी देशों को शक है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु बम बनाने की फिराक में है। इसी भारी अविश्वास और ट्रंप की सख्त शर्त के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह से अटक गई है।

अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

अमेरिका द्वारा ईरान पर फिर से हमले की आशंकाओं के बीच, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें युद्धकाल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस बात का डर बना हुआ है कि यदि अमेरिका कदम उठाता है, तो ईरान भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगा जिससे पूरा मध्य पूर्व एक बार फिर से भारी संकट में घिर जाएगा।

कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि: बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में 6% का भारी उछाल आया और यह 122 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया, जो जून 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।

WTI क्रूड का हाल: वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी बढ़कर लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

सप्लाई में भारी कमी: इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने मध्य पूर्व के इस संकट को इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बताया है। वहीं, विटोल ग्रुप का अनुमान है कि बाजार को लगभग 1 अरब बैरल तेल का नुकसान हो रहा है।

अमेरिका की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति

सैन्य विकल्प और नाकेबंदी: एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सेंट्रल कमांड से ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर ब्रीफिंग मिलने वाली है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान के साथ कोई नया परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक वे ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाएंगे।

हाइपरसोनिक मिसाइलों की तैनाती: अमेरिकी सेना ने पहली बार मध्य पूर्व में ‘हाइपरसोनिक मिसाइलें’ तैनात करने की मांग की है, जो स्थिति के बेहद गंभीर होने का संकेत है।

ईरानी टैंकरों की जब्ती: अमेरिका अब ईरान से जुड़े उन दो तेल टैंकरों को जब्त करने की कोशिश कर रहा है जिन्हें नाकेबंदी के दौरान पकड़ा गया था। 13 अप्रैल से अब तक दर्जनों जहाजों को वापस लौटाया जा चुका है।

अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन: वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब अन्य देशों से एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की अपील कर रहा है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरानी अधिकारी इस दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही, तो ईरान इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने ट्रंप पर आरोप लगाया है कि वे आर्थिक दबाव और ईरान के अंदरुनी मतभेदों का फायदा उठाकर तेहरान को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर करना चाहते हैं।

फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावी रूप से बंद है। अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य हो गई है। इसके बंद होने से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई रुक गई है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं।

अमेरिकी तेल निर्यात में रिकॉर्ड तेजी

मध्य पूर्व से सप्लाई रुकने के कारण दुनिया भर के खरीदार अब अमेरिका से तेल खरीद रहे हैं। पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल का निर्यात रिकॉर्ड 60 लाख बैरल प्रतिदिन को पार कर गया। इसने 2023 के अंत में बने 5.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।

वेस्टपैक बैंकिंग कॉर्प के रॉबर्ट रेनी का कहना है कि बाजार को उम्मीद थी कि यह युद्ध जल्द खत्म होगा, लेकिन ट्रंप ने यह उम्मीद खत्म कर दी है। सच्चाई यह है कि दोनों ही देशों को लगता है कि वे जीत रहे हैं, इसलिए कोई भी समझौते के मूड में नहीं है। तेल की बढ़ती कीमतें इस बात का सबूत हैं कि कागजी बाजार अब भौतिक बाजार की उस सच्चाई को अपना रहा है, जहां तेल की वास्तविक कमी है और सप्लाई में काफी देरी हो रही है।

आम जनता की जेब पर कैसे पड़ेगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला कोई भी इजाफा सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। अगर ट्रंप की सख्ती के कारण ईरान का तेल बाजार में नहीं आता है, तो भारतीय तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा। इसका सीधा बोझ पेट्रोल पंपों पर आम जनता की जेब पर डाला जाएगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का मतलब है ट्रांसपोर्टेशन (माल ढुलाई) का महंगा होना। इसके कारण फल, सब्जियां, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है।

सरकार ने पहले ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है, लेकिन अगर ट्रंप की नीति से संघर्ष लंबा खिंचा या सैंक्शंस सख्त हुए तो वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अगर अंततः डील हो जाती है और होर्मुज पूरी तरह खुल जाता है, तो ट्रंप का दावा है कि तेल की कीमतें बहुत नीचे आ जाएंगी।

फिलहाल कूटनीतिक गेंद बीच में अटकी हुई है। ट्रंप के सख्त और अडियल रवैये को देखते हुए यह साफ है कि अमेरिका अपने रुख से आसानी से पीछे हटने वाला नहीं है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच इस परमाणु गतिरोध का जल्द ही कोई समाधान नहीं निकलता है, तो दुनिया भर के देशों के साथ-साथ भारत को भी जल्द ही महंगे पेट्रोल-डीजल के झटके के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN