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ईरान के पास जमा हो गया इतना तेल, रखने की ही जगह नहीं; अब डेड टैंकर में कर रहा स्टोर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

विशेषज्ञों के मुताबिक खार्ग द्वीप पर अब सिर्फ करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल रखने की जगह बची है। वहां रोज करीब 10 से 11 लाख बैरल तेल जमा हो रहा है। इस हिसाब से अगले 12-13 दिनों में स्टोरेज फुल हो सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग के बाद से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ईंधन की सप्लाई ठप है। जंग की शुरुआत में ईरान ने ऑयल टैंकर पर हमले शुरू कर यहां से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बंद कर दी, वहीं अमेरिका की नाकेबंदी से स्थिति और बिगड़ गई। तेल के आयात पर निर्भर कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। खुद ईरान में भी एक बड़ी मुसीबत ने दस्तक दे दी है। हालांकि यह मुसीबत तेल की कमी से नहीं, बल्कि तेल ज्यादा होने की वजह से हुई है। दरअसल सप्लाई ठप होने की वजह से ईरान के पास इतना तेल जमा हो गया है कि उसके पास रखने तक की जगह नहीं है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब इस तेल को डेड टैंकर में जमा कर रहा है।

इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि एक तरफ ईरान तेल उत्पादन अचानक बंद नहीं कर सकता क्योंकि इससे तेल कुओं को नुकसान हो सकता है, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंधों और होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के कारण उसका निर्यात लगभग ठप हो गया है। इससे कच्चा तेल तेजी से जमा होता जा रहा है। ऐसे में ईरान ने अतिरिक्त तेल को रखने के लिए एक अस्थायी समाधान निकाला है और अब वह समुद्र में तेल जमा कर रहा है।

डेड टैंकर का क्यों इस्तेमाल?

रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान ने अपने 30 साल पुराने टैंकर ‘नशा’ को फिर से सक्रिय कर दिया है। यह टैंकर कई सालों से बेकार पड़ा था, लेकिन अब इसे समुद्र में तैरते भंडारण (फ्लोटिंग स्टोरेज) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि जो तेल निर्यात नहीं हो पा रहा, उसे इसमें रखा जा सके।

12-13 दिनों की ही मोहलत

गौरतलब है कि ईरान के कुल तेल उत्पादन का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खार्ग द्वीप से आता है, जहां करीब 3 करोड़ बैरल तेल भंडारण की क्षमता है। लेकिन अब यह क्षमता लगभग पूरी होने के कगार पर है। समुद्री विशेषज्ञों के अनुसार, खार्ग द्वीप पर अब सिर्फ करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल रखने की जगह बची है, जबकि वहां रोजाना 10 से 11 लाख बैरल तेल आ रहा है। इस हिसाब से अगले 12-13 दिनों में भंडारण पूरी तरह भर सकता है।

आय पर भी असर

यह स्थिति ईरान के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। अगर भंडारण पूरी तरह भर गया, तो उसे तेल उत्पादन कम करना पड़ेगा या बंद करना पड़ेगा। खासतौर पर तेल कुएं, जिन्हें लगातार चलाना जरूरी होता है, बंद होने पर स्थायी नुकसान हो सकता है। वहीं तेल निर्यात रुकने से ईरान की आय पर भी असर पड़ रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN