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हासिल तो कुछ हुआ नहीं, पर US ने ईरान जंग में गंवा दिए अरबों के हथियार; 1200 पैट्रियट और 1000 टोमहॉक भी खाक

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका ने 2025 में कुल लगभग 600 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें ही बनाईं लेकिन इस युद्ध में 1,200 से ज़्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी दी हैं, जिनकी एक मिसाइल की कीमत 40 लाख डॉलर से ज़्यादा है।

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने न केवल मिडल-ईस्ट की भू-राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि अमेरिकी सेना की युद्ध लड़ने की क्षमता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पेंटागन के आंतरिक अनुमानों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘युद्ध विकल्प’ ने अमेरिकी सैन्य भंडार को बुरी तरह प्रभावित किया है। पेंटागन के एक अंदरूनी अनुमान के मुताबिक, सेना ने अपने हजारों महंगे हथियारों का जखीरा ईरान पर खर्च कर दिया है, जिसमें टोमहॉक क्रूज़ मिसाइलों से लेकर पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं। हालांकि, इस संघर्ष में अमेरिका को कुछ खास हासिल होता अब तक नजर नहीं आ रहा है।

28 फरवरी को अमेरिका-इज़रायल के हमलों के जवाब में ईरान की जवाबी कार्रवाई ने अमेरिकी सेना को अपने उस ज़खीरे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने को मजबूर कर दिया, जिसे असल में चीन और रूस जैसे बड़े दुश्मनों के खिलाफ किसी संभावित सैन्य अभियान के दौरान इस्तेमाल करने के लिए सहेज कर रखा गया था। हालांकि, वाइट हाउस ने अब तक इस संघर्ष की अनुमानित लागत जारी नहीं की है, लेकिन दो स्वतंत्र समूहों ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी जंग का खर्च 28 अरब डॉलर से 35 अरब डॉलर के बीच रहा है या यह खर्च रोज़ाना 1 अरब डॉलर से थोड़ा कम रहा है।

दो दिन में फूंक डाले 5.6 अरब डॉलर के हथियार

इस युद्ध की चौंकाने वाली वित्तीय लागत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध के शुरूआती मात्र दो दिनों में ही अमेरिकी सेना ने 5.6 अरब डॉलर (करीब 46,000 करोड़ रुपये) के गोला-बारूद ईरान के खिलाफ का इस्तेमाल कर डाला। युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान में 13,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसके लिए हजारों की संख्या में हाई-एंड मिसाइलों का उपयोग किया गया।

ईरान जंग में खर्च हुए प्रमुख हथियारों का विवरण:

JASSM-ER मिसाइलें: रक्षा विभाग के अंदरूनी अनुमानों का हवाला देते हुए, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने अपने भंडार में मौजूद कुल 1,500 ‘जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज’ (JASSM-ER) मिसाइलों में से लगभग 1,100 मिसाइलें दाग दी हैं। इनमें से प्रत्येक की कीमत 11 लाख डॉलर है। JASSM-ER की मारक क्षमता 600 मील से ज़्यादा है और इसे दुश्मन की हवाई सुरक्षा की सीमा से बाहर रहते हुए भी मज़बूत ठिकानों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

टॉमहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलें: अमेरिकी सेना ने ईरान में 1,000 से ज़्यादा टोमहॉक क्रूज़ मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है, जो अमेरिका द्वारा प्रति वर्ष खरीदी जाने वाली संख्या से 10 गुना अधिक हैं। एक टॉमहॉक की कीमत लगभग 36 लाख डॉलर है। टोमहॉक लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलें हैं, जिनका इस्तेमाल 1991 में पहले खाड़ी युद्ध के बाद से ही अमेरिकी सेना द्वारा युद्ध लड़ने में बड़े पैमाने पर किया जाता रहा है, और ये भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए भी अमेरिका के लिए एक अहम हथियार बनी हुई हैं। CSIC के एक अध्ययन के मुताबिक, अमेरिका के पास अब अपने ज़खीरे में सिर्फ़ 3,000 टोमहॉक मिसाइलें ही बची हैं।

पैट्रियट (Patriot) इंटरसेप्टर: NYT की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने इस युद्ध में 1,200 से ज़्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी दागी हैं, जिनकी एक मिसाइल की कीमत 40 लाख डॉलर से ज़्यादा है। अमेरिका ने 2025 में कुल मिलाकर लगभग 600 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने 1,000 से ज़्यादा प्रिसिजन स्ट्राइक और ATACMS जमीन से मार करने वाली मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है, जिससे उनके भंडार चिंताजनक रूप से कम हो गए हैं।

भविष्य के खतरों पर मंडराया संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में इस भारी सैन्य खर्च ने अमेरिका को रूस और चीन जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ कमजोर कर दिया है। पेंटागन ने एशिया और यूरोप में तैनात कमांडों से गोला-बारूद खींचकर मध्य पूर्व भेजा है, जिससे अन्य क्षेत्रों में मुकाबला करने की तैयारी कम हुई है। चिंताजनक बात यह है कि उत्पादन की गति बहुत धीमी है। उदाहरण के लिए, अमेरिका ने पूरे 2025 में केवल 600 पैट्रियट मिसाइलों का ही उत्पादन किया, जबकि युद्ध में इसका दोगुना (1,200) इस्तेमाल हो चुका है। सीनेटर जैक रीड के अनुसार, इस कमी को पूरा करने में कई साल लग सकते हैं।

वाइट हाउस ने दावों को नकारा

हालांकि, वाइट हाउस ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में कहा कि यह कहानी “पूरी तरह से गलत” है और अमेरिका के पास अपनी रक्षा और किसी भी सैन्य अभियान को अंजाम देने के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं। परंतु, रक्षा विशेषज्ञों और आंतरिक रिपोर्टों का इशारा स्पष्ट है कि अत्याधुनिक हथियारों पर अत्यधिक निर्भरता और उनके उत्पादन में लगने वाला समय आने वाले वर्षों में अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इस बीच, पेंटागन ने अमेरिकी संसद कांग्रेस से अतिरिक्त धन की माँग की है, ताकि वह हथियारों के निर्माताओं को भुगतान करके अमेरिका के खाली हो चुके भंडार को फिर से भर सके। फिलहाल, उसे इस मंज़ूरी का इंतज़ार है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN