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दूसरे दौर की शांति वार्ता में ईरान क्यों लगा रहा अड़ंगा? सीजफायर टूटा तो क्या होगा अंजाम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं हैं। ट्रंप की हां-ना और ईरानी दल के बयानों के बीच सारी चीजें झूल रही हैं। अब दो हफ्तों का संघर्ष विराम भी खत्म होने वाला है। अगर सीजफायर खत्म हो जाता है तो इसके परिणाम कैसे हो सकते हैं…

ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं हैं। ट्रंप की हां-ना और ईरानी दल के बयानों के बीच सारी चीजें झूल रही हैं। अब दो हफ्तों का संघर्ष विराम भी खत्म होने वाला है। वहीं, ट्रंप की धमकियों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कह दिया है कि हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है। साथ ही उन्होंने शांति वार्ता में अमेरिका का पलड़ा भारी होने की बात कही है। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर शांति वार्ता को टालते रहने के पीछे ईरान का मकसद क्या हो सकता है? इसके अलावा इन संभावनाओं को भी टटोलना होगा कि अगर सीजफायर खत्म हो जाता है तो इसके परिणाम कैसे हो सकते हैं…आइए समझते हैं…

क्या शांति वार्ता होगी?
फिलहाल इसी पर पेच फंसा हुआ है। अमेरिका और ईरान दोनों ही बातचीत का समय स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। ईरान की तरफ से आए बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान की राजधानी में उनके देश का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं है। बयान में साफ है कि ईरान के किसी भी स्तर के अधिकारी ने पाकिस्तान की यात्रा नहीं की है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया भी कभी हां, कभी ना सरीखा रहा है। इन सबके बीच बुधवार को सीजफायर की समयसीमा खत्म हो रही है। इसको लेकर सभी की धुकधुकी बढ़ी हुई है।

दूसरे दौर की होनी है बातचीत
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच यह दूसरे दौर की वार्ता होने वाली है। पहले दौर की बातचीत इस्लामाबाद में हुई थी और इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। दूसरे दौर की वार्ता से उम्मीदें भी काफी ज्यादा हैं, लेकिन ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने साफ कह दिया है कि धमकियां नहीं चलेंगी। इतना ही नहीं, उन्होंने यहां कह डाला कि ईरान अब युद्ध में नए पैंतरे दिखाने की तैयारी में है। उधर ट्रंप की बातें भी बहुत स्पष्ट नहीं हैं।

ईरान के इनकार के पीछे क्या
शांतिवार्ता में शामिल होने को लेकर ईरान के इनकार के पीछे कई वजहें हैं। इनमें से पहली वजह है होर्मुज पर अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्लाइल बाघेई ने अमेरिका पर आरोप लगाया है वह सीजफायर लागू होने के पहले से ही इसका उल्लंघन कर रहा है। ईरान को अमेरिकी नाकेबंदी पर सख्त ऐतराज है। ईरान के पीछे हटने की एक अन्य वजह भी है। यह है ईरान की कार्गो शिप्स को सीज किया जाना।

ईरान का आरोप है कि अमेरिकी नेवी ने उसका झंडा लगे एक जहाज पर अमेरिकी नेवी ने चढ़ाई की और उसे जब्त किया। जबिक अमेरिकी अफसरों के मुताबिक यह जहाज होर्मुज के पास नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था। तेहरान की संयुक्त सेना ने इसे लूट बताया और जवाब देने की हुंकार भरी। इसके चलते पहले ही संकट में पड़ा सीजफायर फिर सवालों में घिर गया। वहीं, इन सबके चलते तेल के कीमतों में भी उछाल आ गया।

ईरान की मांगें हैं अधूरी
पहले दौर की वार्ता के दौरान ईरान ने कुछ मांगें उठाई थीं। अब उसका कहना है कि यह मांगें पूरी नहीं की गई हैं। इन मांगों में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों को रोकना, अमेरिका द्वारा 6 बिलियन डॉलर की फ्रोजेन संपत्ति को छोड़ा जाना, न्यूक्लियर प्रोग्राम पर गारंटी और होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से पैसों वसूली आदि थीं। लेकिन बताया जा रहा है कि इनमें से एक भी मांग पूरी नहीं की गई है। इसके अलावा ईरान भी अपने यूरेनियम ढांचों को लेकर अड़ा हुआ है। यह भी एक बड़ी वजह है कि वह दूसरे दौर की वार्ता में और ज्यादा मजबूत ढंग से अपनी मांगें उठाना चाहता है।

इन सबके बीच बाजार की हालत भी खराब है। जैसे-जैसे सीजफायर खत्म होने की डेडलाइन करीब आ रही है और दूसरे दौर की वार्ता पर अनिश्चितता बढ़ रही है, बाजार भी इसकी चपेट में आने लगा है। सोमवार को एसएंडपी में गिरावट आई, डॉउ जोन्स का भी ऐसा ही हाल रहा। वहीं, नैसडेक कंपोजिट भी किया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें अभी भी 95 डॉलर बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज पर बात नहीं बनी तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई पर संकट खड़ा हो सकता है।

अब आगे क्या
अगले 24 घंटे बेहद अहम होने वाले हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ सीजफायर की डेडलाइन खत्म होने से पहले इस्लामाबाद पहुंच जाएंगे। इन सबके बीच अल-जजीरा ने कुछ परिणामों की उम्मीद जताई है। इसके मुताबिक अंतरिम समझौते हो सकते हैं। इससे बात आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा और सीजफायर भी बढ़ेगा। हालांकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बाधा हो सकती है। एक अन्य सीन यह हो सकता है कि बातचीत ऐसी हो जिसमें सीजफायर तो बढ़ जाए, लेकिन किसी अन्य चीज पर सहमति न बने। यहां तक कि बिना किसी बातचीत के भी संघर्ष को टाला जा सकता है। बता दें कि ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दे रखी है कि बातचीत विफल होने की स्थिति में तनाव बढ़ेगा और फिर से बमबारी शुरू हो जाएगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN