Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Getty Images
एक घंटा पहले
पढ़ने का समय: 6 मिनट
सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों से उम्मीद बंधी कि ईरान जंग के ख़त्म होने को लेकर जल्द ही कोई अच्छी ख़बर आ सकती है.
लेकिन ये उम्मीद भी बस चंद घंटों के लिए ही रही. उसके बाद से लगातार अमेरिका और ईरान के बयानों से लगा कि फ़िलहाल शांति दूर है.
सोमवार देर रात ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा है कि ईरान फ़िलहाल अमेरिका के साथ होने वाली अगली दौर की बातचीत में हिस्सा लेने की कोई योजना नहीं बना रहा है.
ये बात उन्होंने तब कही जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल संभावित दूसरे दौर की पाकिस्तान-प्रायोजित अमेरिका-ईरान बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचने की तैयारी कर रहा है.
20 अप्रैल को साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बक़ाई ने कहा, “अभी तक हमारे पास अगले दौर की बातचीत की कोई योजना नहीं है और इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है.” बीबीसी मॉनिटरिंग ने ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से ये जानकारी दी.
जबकि इससे पहले सोमवार को ही डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी ”अगर ईरान के नए नेता समझदार निकले, तो ईरान का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल और समृद्ध हो सकता है.”
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से लागू हुआ सीज़फ़ायर 22 अप्रैल को ख़त्म हो रहा है. पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहा है.
इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल 20 अप्रैल की शाम इस्लामाबाद पहुंचेगा. लेकिन अब तक ये साफ़ नहीं है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा या नहीं
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान किसी समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के “हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को नष्ट कर देगा.”
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बक़ाई ने ट्रंप की चेतावनी पर कहा कि ईरान किसी भी तरह की डेडलाइन, अल्टीमेटम और दबाव को खारिज करता है और उसके फ़ैसले राष्ट्रीय हितों के आधार पर होते हैं, न कि संघर्षविराम की समय-सीमा के अनुसार.
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी अमेरिका का मामला है, ईरान का नहीं.
‘फ़िलहाल बातचीत की कोई प्लानिंग नहीं’
इमेज स्रोत, Press TV
उन्होंने कहा कि ईरान आगे की बातचीत में हिस्सा लेने को लेकर अभी ज़्यादा उत्सुक नहीं है, क्योंकि उसे इस बात के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं कि “अमेरिका बातचीत को लेकर गंभीर है.”
बक़ाई ने यह भी कहा कि अमेरिका का रुख़ ‘तर्कहीन और काल्पनिक बातों’ पर आधारित है.
एक ईरानी कहावत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो पहले परखा जा चुका है, उसे दोबारा परखना गलती है, और चेतावनी दी कि अमेरिका ने सख़्ती दिखाई तो उसे पहले जैसी ही प्रतिक्रिया मिलेगी.
उन्होंने कहा कि अमेरिका का पिछला बर्ताव और बातचीत की बात कहकर भी बार-बार हमलों के कारण दोनों के बीच ‘गहरा अविश्वास’ है और अब आगे का कोई समझौता अमेरिकी आश्वासनों के बजाय ईरान की अपनी ताक़त और गारंटी पर आधारित होना चाहिए.
उन्होंने बातचीत में मिस्र की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर कहा कि फ़िलहाल पाकिस्तान ही अमेरिका और ईरान के बीच एकमात्र मध्यस्थ है, हालांकि अन्य देश भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क में हैं.
उन्होंने अमेरिकी मीडिया की उन खबरों को भी खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि पिछले दौर की बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप फोन पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर चिल्लाए थे.
बक़ाई ने इसे ‘अमेरिकी मीडिया की कहानी’ बताया.
बक़ाई ने यह भी साफ किया कि ईरान ने अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अमेरिका को सौंपने पर सहमति नहीं दी है और यह मुद्दा किसी भी दौर की बातचीत में नहीं उठा.
उन्होंने कहा, “जिस तरह ईरान की ज़मीन हमारे लिए पवित्र और महत्वपूर्ण है, उसी तरह संवर्धित यूरेनियम भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है.”
पाकिस्तान की कोशिशें जारी
शॉर्ट वीडियो देखिए
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

SOURCE : BBC NEWS



