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यूरोप में फ्यूल अलार्म… सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन बचा, IEA प्रमुख बोले- कैंसल हो सकती हैं फ्लाइट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बड़ा दिया है। मिडल ईस्ट में जारी संकट के बीच उन्होंने कहा कि यूरोप के पास जेट ईंधन की आपूर्ति केवल शायद छह सप्ताह या उससे थोड़ा अधिक समय के लिए ही बची है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बड़ा दिया है। मिडल ईस्ट में जारी संकट के बीच उन्होंने कहा कि यूरोप के पास जेट ईंधन की आपूर्ति केवल ‘शायद छह सप्ताह या उससे थोड़ा अधिक’ समय के लिए ही बची है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति बाधित रही तो जल्द ही उड़ानें रद्द हो सकती हैं। एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए बिरोल ने होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से तेल, गैस और अन्य महत्वपूर्ण आपूर्तियों के अवरुद्ध होने को ‘अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले एक समूह था जिसे ‘डायर स्ट्रेट्स’ कहा जाता था, लेकिन अब स्थिति बेहद गंभीर है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। जितना लंबा यह संकट चलेगा, दुनिया भर में आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति के लिए उतना ही बुरा होगा।

बिरोल ने आगे कहा कि इस संकट का असर पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतों के रूप में देखने को मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक नुकसान असमान रूप से वितरित होगा और सबसे ज्यादा प्रभाव विकासशील देशों पर पड़ेगा। 2015 से आईईए का नेतृत्व कर रहे तुर्की के अर्थशास्त्री बिरोल ने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान उन देशों को नहीं होगा जिनकी आवाज ज्यादा सुनी जाती है। मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के गरीब देशों को होगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज स्थायी रूप से नहीं खुला तो सभी को नुकसान उठाना पड़ेगा। कोई भी देश इस संकट से अछूता नहीं रहेगा।

धीमी वृद्धि या मंदी का खतरा

बिरोल ने बताया कि ईरान युद्ध से पहले विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज समुद्री मार्ग से गुजरता था। अगर कुछ हफ्तों में इस जलमार्ग को नहीं खोला गया तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि यूरोप में हमारे पास शायद छह सप्ताह का जेट ईंधन बचा है। अगर हम होर्मुज को नहीं खोल पाते… तो जल्द ही हमें यह खबर सुनने को मिलेगी कि जेट ईंधन की कमी के कारण कुछ उड़ानें रद्द हो रही हैं। उन्होंने आगे बताया कि कई सरकारी नेताओं का मानना है कि यदि मई के अंत तक होर्मुज नहीं खुला तो कई देशों, खासकर कमजोर अर्थव्यवस्थाओं वाले को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इससे उच्च मुद्रास्फीति, धीमी आर्थिक वृद्धि और कुछ मामलों में मंदी तक की स्थिति बन सकती है।

‘टोल बूथ’ प्रणाली का किया विरोध

बिरोल ने ईरान द्वारा कुछ जहाजों पर लगाई गई ‘टोल बूथ’ प्रणाली का विरोध किया, जिसमें शुल्क लेकर होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसे स्थायी बनाने से खतरनाक मिसाल कायम होगी, जिसे बाद में मलक्का स्ट्रेट जैसे अन्य महत्वपूर्ण जलमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर हम इसे एक बार बदल देते हैं तो वापस लाना मुश्किल होगा। तेल को बिना किसी शर्त के बिंदु ए से बिंदु बी तक बहना चाहिए।

फातिह बिरोल ने बताया कि फारस की खाड़ी में 110 से अधिक तेल टैंकर और 15 से अधिक एलएनजी वाहक इंतजार कर रहे हैं। अगर ये होर्मुज से गुजरकर विश्व बाजार में पहुंचें तो संकट कुछ कम हो सकता है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं होगा। युद्ध के कारण क्षेत्र में 80 से अधिक महत्वपूर्ण संपत्तियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिनमें से एक तिहाई से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन को पूर्व-संघर्ष स्तर पर बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं और पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौटने में लगभग दो साल का समय लग सकता है।

बिरोल ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि ‘कुछ सौ बंदूकधारी सैनिक’ वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना सकते हैं। आईईए वर्षों से होर्मुज स्ट्रेट के अत्यधिक महत्व के बारे में चेतावनी देती रही है। उन्होंने कहा कि यह संकट परमाणु ऊर्जा समेत अन्य ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा दे सकता है और आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा मानचित्र को नया आकार दे सकता है। बिरोल ने कहा कि ऊर्जा और भू-राजनीति हमेशा जुड़ी रही हैं, लेकिन मैंने भू-राजनीति की इतनी गहरी और लंबी छाया पहले कभी नहीं देखी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN