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शेरगर दुनिया का सबसे मशहूर और क़ीमती घोड़ा था. लेकिन जब हथियारों से लैस लोगों ने उसका अपहरण कर लिया तो वह एक सनसनीख़ेज़ जुर्म की कहानी का अहम किरदार बन गया.
वह 1983 की एक सर्द रात थी जब आयरलैंड में शेरगर को अग़वा कर लिया गया था. यह वो वक़्त था जब शेरगर अपनी हैरान कर देने वाली कामयाबियों के बाद एक नई ज़िंदगी जीने की कोशिश कर रहा था.
ध्यान रहे कि किसी रेस के घोड़े की क़ीमत उसकी जीत के हिसाब से तय होती है.
सन 1981 में ‘एप्सम डर्बी’ में जीत के बाद पूरी दुनिया में शेरगर का डंका बज रहा था. इसके मालिक अरबपति आग़ा ख़ान थे.
साल 2011 में आग़ा ख़ान ने बीबीसी से बात करते हुए बताया था, “मुझे दो बातें बहुत हैरान करने वाली लगी थीं. पहली- जिस आसानी से वो दौड़ लगाता था और दूसरी बात यह थी कि जीतने के बाद भी वह दौड़ता चला जाता था. यह वाक़ई बहुत शानदार था.”
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‘आयरिश डर्बी’ और ‘किंग जॉर्ज चेस’ में मिली जीत ने शेरगर को दुनिया भर का सुपरस्टार बना दिया था.
आग़ा ख़ान ने उस वक़्त उसकी क़ीमत 10 मिलियन डॉलर लगाई थी और उसके 34 शेयर बेचे थे. इनमें से हर शेयर की क़ीमत ढाई लाख डॉलर थी.
ख़ुद आग़ा ख़ान ने शेरगर के छह शेयर अपने पास रखे. बाक़ी शेयर उन अमीर निवेशकों ने ख़रीदे जो शेरगर के चैंपियन बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे.
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एक चमत्कारिक रूप से सफल सीज़न के बाद शेरगर के लिए इनाम आयरलैंड में रिटायरमेंट की ज़िंदगी थी. 1983 तक शेरगर से इतने लोग अपने घोड़े की नस्ल बढ़ाना चाहते थे कि वह पूरे साल ब्रीडिंग के लिए बुक हो चुका था. इस वजह से सभी शेयरधारकों को उम्मीद हो गई कि उनका मुनाफ़ा बढ़ने वाला है.
लेकिन फिर अचानक 8 फ़रवरी को नक़ाबपोश हथियारबंद लोगों ने उसे अग़वा कर लिया. शेरगर की भारी क़ीमत के बावजूद उस फ़ार्म की सुरक्षा बहुत कम थी जहां उसे रखा गया था.
शेरगर की देखरेख करने वाले जेम्स फ़िट्ज़जेराल्ड को उनके परिवार समेत बंदूक़ भिड़ाकर बंधक बना लिया गया और उनसे कहा गया कि शेरगर को एक ट्रेलर पर चढ़ाएं.
ख़ुद जेम्स को एक वैन में जबरन बैठाकर कई घंटों तक बंधक रखा गया. लेकिन बाद में जेम्स को रिहा कर दिया गया और उन्हें एक कोडवर्ड दिया गया जो ‘किंग नेपच्यून’ था.
अग़वा करने वालों ने कहा कि वह इसी कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हुए पैसों की मांग करेंगे.
जेम्स ने डर के मारे बहुत देर तक किसी को कुछ नहीं बताया लेकिन जल्द ही ख़बर फैल गई.
आयरलैंड के दो मंत्रियों को पुलिस से भी पहले इसकी ख़बर मिली लेकिन तब तक वारदात को हुए इतना समय बीत चुका था कि सुराग़ मिलना मुश्किल था.
नक़ाबपोश हथियारबंद लोग
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शेरगर को क्यों अग़वा किया गया था? एक राय यह थी कि यह घोड़ा लीबिया के नेता कर्नल मुअम्मर ग़द्दाफ़ी को पहुंचाया गया है और उसके बदले आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (आईआरए) ने हथियार हासिल किए हैं. आईआरए पर शक भी था.
लेकिन यह पहेली जल्द ही सुलझ गई. 24 घंटे के भीतर उसी कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हुए अपहरणकर्ताओं ने 2 मिलियन पाउंड की मांग की. अब शेरगर के मालिक निवेशक इस सवाल पर बंट गए कि पैसे दिए जाएं या नहीं.
अमेरिकी ट्रेनर ब्रायन स्वीनी की राय पैसे देकर शेरगर को छुड़ाने की थी. उन्होंने बीबीसी को बताया, “अगर आप एक ऐसी मां से पूछें जिसका बच्चा अग़वा हुआ है कि पैसे दें या नहीं, तो मेरा मानना है कि जवाब ‘हां’ में होगा और वह भी जल्दी.”
एक दिन बाद बेलफ़ास्ट में बीबीसी न्यूज़रूम में एक फ़ोन आया, जो शेरगर के अपहरण की जगह से 130 मील दूर था. एक अनजान शख़्स ने बताया कि शेरगर की रिहाई की बातचीत केवल तीन प्रमुख पत्रकारों के साथ होगी जो घुड़दौड़ के विशेषज्ञ थे.
उन पत्रकारों को संदेश दिया गया कि उन्हें अगले दिन शाम तक बेलफ़ास्ट के यूरोपा होटल पहुंचना था. उनमें से एक आईटीवी के डेरेक थॉम्पसन थे, जिन्होंने 2013 में बीबीसी को बताया कि होटल पहुंचते ही अपहरणकर्ताओं का फ़ोन आ गया.
इन पत्रकारों को बेलफ़ास्ट से 30 मील दूर एक फ़ार्म पर बुलाया गया जिसके मालिक जेरेमी मैक्सवेल थे. अभी वह रास्ते में ही थे कि मशीनगन लिए पांच नक़ाबपोशों ने उनका रास्ता रोककर पूछा कि डेरेक थॉम्पसन कौन हैं. जब डेरेक ने जवाब दिया, तो उन हथियारबंद लोगों ने बताया कि वे पुलिसकर्मी हैं. डेरेक कहते हैं, “मैंने कहा, शुक्र है.”
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अगले आठ घंटों के दौरान डेरेक को 10 से 12 फ़ोन आए लेकिन बातचीत बहुत आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि डेरेक ने मांग की थी कि शेरगर के ज़िंदा होने का सबूत दिया जाए. दूसरी तरफ़ अपहरणकर्ता पहले 40 हज़ार पाउंड के भुगतान की मांग पर अड़े रहे.
अगली सुबह जब फ़ोन की घंटी बजी तो दूसरी तरफ़ से एक आवाज़ ने कहा, “घोड़े के साथ हादसा हो गया है, वह मर चुका है.”
ज्योतिषियों की मदद
2018 की बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री के अनुसार ये फ़ोन कॉल दरअसल एक ड्रामा था क्योंकि बैकग्राउंड में अपहरणकर्ता अब शेरगर के असली मालिक यानी आग़ा ख़ान से सीधे बातचीत कर रहे थे.
अपहरण के तीन दिन बाद एक अंतिम संदेश मिला कि अगर मांग नहीं मानी गई, तो बात ख़त्म.
इस दौरान एक और दिलचस्प बात हुई. मर्फ़ी नाम के एक शख़्स ने पत्रकारों को बताया कि इस मामले में केवल ज्योतिषी ही मदद कर सकते हैं. दो ज्योतिषियों ने यह दावा भी किया कि उन्होंने शेरगर को अपने सपने में देखा है.
तब तक इस जुर्म का राज़ बहुत गहरा हो चुका था.
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आईआरए के एक पूर्व सदस्य ने, जो बाद में पुलिस के मुख़बिर बने, दावा किया कि अपहरणकर्ताओं ने शेरगर को जल्दी ही मार दिया था क्योंकि वह उनके क़ाबू में नहीं आ रहा था. लेकिन यह मामला आज तक अनसुलझा है.
कुछ महीनों बाद आग़ा ख़ान ने अपनी एक नई तेज़ रफ़्तार सुपरयॉट (नाव) का नाम ‘शेरगर’ रखा.
कई सालों बाद उन्होंने कहा कि वह शेरगर की डर्बी जीत की फ़िल्म सैकड़ों बार देख चुके हैं. “यह एक ऐसी याद है जो कभी नहीं जाती.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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