Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Reuters
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ पांच हफ़्तों से चल रहे अमेरिका-इसराइल युद्ध के दौरान कई डेडलाइन तय कीं, मांगें रखीं और धमकियां दीं. लेकिन इस बार उनके बयान पहले से ज़्यादा साफ़ और सख़्त हैं.
उन्होंने कहा कि ईरान पर हमलों का नया दौर बेहद विनाशकारी होगा. यह मंगलवार को वॉशिंगटन समय के अनुसार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5.30 बजे) से शुरू हो सकता है. चार घंटे के भीतर देश के हर पुल और पावर प्लांट को “तबाह” कर दिया जाएगा.
ट्रंप ने सोमवार को कहा, “लगभग कुछ भी अब सीमा से बाहर नहीं है.”
उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए ईरान को ऐसा समझौता करना होगा “जो मुझे मंज़ूर हो.” इस समझौते में होर्मुज़ स्ट्रेट से “तेल की आवाजाही को पूरी तरह खुला रखना” भी शामिल होना चाहिए.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
ईरान का क्या रुख़ रहेगा?
इमेज स्रोत, Reuters
डेडलाइन ख़त्म होने से पहले तक यह संकेत नहीं मिले हैं कि ईरान ट्रंप की शर्तें मानने को तैयार है. ईरान ने अस्थायी युद्धविराम को ठुकरा दिया है और अपनी मांगों की सूची दी है, जिसे एक अमेरिकी अधिकारी ने “बहुत ज़्यादा मांगों वाली” बताया.
इससे ट्रंप के सामने मुश्किल स्थिति बन गई है. अगर कोई समझौता नहीं होता, तो वह पिछले तीन हफ्तों में चौथी बार डेडलाइन बढ़ा सकते हैं.
लेकिन इतनी सख़्त धमकियों, अपशब्दों और चेतावनियों के बाद पीछे हटना उनकी साख़ को नुक़सान पहुंचा सकता है.
यह भी संभव है कि ईरान और दुनिया के दूसरे देश यह मानें कि अमेरिका की सैन्य ताक़त और रणनीति के बावजूद वह पूरी मज़बूती की स्थिति में बातचीत नहीं कर रहा है. वो भी तब जब उसने ईरान में गिरे अपने दो एयरमैन को सुरक्षित बाहर निकाला है.
ट्रंप ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम जीत चुके हैं. वे सैन्य रूप से हार चुके हैं. उनके पास सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक तरीक़ा है जिसमें वो कहेंगे- ‘ओह हम पानी में कुछ बारूदी सुरंगें डालने जा रहे हैं.”
लेकिन यही “मनोवैज्ञानिक ताक़त” यानी ड्रोन, मिसाइल और बारूदी सुरंगों के ज़रिए होर्मुज़ स्ट्रेट में तेल टैंकरों को रोकने की क्षमता, ईरान की बड़ी ताक़त साबित हो सकती है, जिसे अमेरिका शायद कम आंक रहा है.
ट्रंप हालिया ऑपरेशन से उत्साह में
इमेज स्रोत, Reuters
सोमवार की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी सेना की सटीक कार्रवाई की तारीफ़ की, जिसमें पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर “मिडनाइट हैमर” हमला, जनवरी में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ना और हाल ही में ईरान में फंसे दो एयरमैन को बचाने का ऑपरेशन शामिल है.
उन्होंने और उनकी नेशनल सिक्योरिटी टीम ने इस ताज़ा ऑपरेशन की तारीफ़ की, जिसमें सैकड़ों एयरक्राफ्ट और एलीट मिलिट्री लोगों को कोऑर्डिनेट करना और टेक्नोलॉजिकल जादूगरी का इस्तेमाल करना शामिल था.
हालांकि यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक़ यह एक “संभावित बड़ी त्रासदी” को टालने के लिए किया गया था.
भले ही हादसा टल गया हो लेकिन यह घटना दिखाती है कि ईरान में अमेरिकी सेना को अभी भी कितना ख़तरा है और ट्रंप को यह समझ में आ रहा है कि अमेरिकी सैन्य ताक़त की भी सीमाएं हैं.
उन्होंने कहा, “हम उन पर बम बरसा सकते हैं. हम उन्हें चकमा दे सकते हैं लेकिन स्ट्रेट को बंद करने के लिए, आपको बस एक आतंकवादी की ज़रूरत है.”
दूसरा विकल्प यह है कि ट्रंप अपनी धमकियों को सच कर दें, हालांकि उन्होंने सोमवार को कई बार कहा कि वह ऐसा नहीं करना चाहते.
इमेज स्रोत, EPA/Shutterstock
वहीं ट्रंप ने कहा कि ईरानी लोग अमेरिका के चल रहे मिलिट्री कैंपेन को झेलने को तैयार हैं और असल में उन्होंने अपने शहरों पर गिर रहे बमों का स्वागत किया है.
लेकिन उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका अब जो कुछ भी नष्ट करेगा, उसे आख़िरकार फिर से बनाना होगा और अमेरिका उसे फिर से बनाने की कोशिश में मदद कर सकता है.
उन्होंने कहा, “क्या मैं उनका बुनियादी ढांचा तबाह करना चाहता हूं? नहीं.”
“अगर हम आज निकल जाएं, तो उन्हें देश को दोबारा बनाने में 20 साल लगेंगे.”
उन्होंने अपनी बात में आगे जोड़ा कि अगर बड़े हमले हुए, तो इसे फिर से बनाने में एक सदी लग सकती है.
हालांकि यह “पाषाण युग” जैसा नहीं होगा, जैसा ट्रंप ने पहले ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था, लेकिन इससे मानवीय संकट और ईरान की तरफ़ से “कड़ी जवाबी कार्रवाई” के चलते क्षेत्रीय असर बहुत गंभीर हो सकता है.
आख़िर ट्रंप क्या करेंगे?
इस आख़िरी समय के बावजूद ट्रंप अब भी किसी समझौते की उम्मीद जता रहे हैं.
उन्होंने कहा, “दूसरी तरफ़ एक तैयार पक्ष है. वे समझौता करना चाहते हैं. इससे ज़्यादा मैं अभी कुछ नहीं कह सकता.”
इतने बड़े दांव के साथ राष्ट्रपति की अस्पष्टता साफ़ दिखाती है कि उनके पास एक प्लान है. उन्होंने सोमवार को कहा, “हर एक चीज़ पर हम सबने सोचा है”, लेकिन वो इसे नहीं बताएंगे.
यह इस बात का संकेत हो सकता है कि पर्दे के पीछे बातचीत उससे कहीं ज़्यादा आगे बढ़ चुकी है जितनी पब्लिक में मानी गई है. या फिर यह एक झांसा और मनगढ़ंत सोच का मिला-जुला रूप भी हो सकता है.
ट्रंप ने कहा, “उनके पास कल तक का समय है.”
“देखते हैं क्या होता है. मुझे लगता है कि वे ईमानदारी से बातचीत कर रहे हैं. जल्द ही पता चल जाएगा.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
SOURCE : BBC NEWS


