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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट! UAE ने पिछले 7 सालों में पहली बार 3 अरब डॉलर के कर्ज को ‘रोलओवर’ करने से इनकार कर दिया है। जानिए इसका पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार, IMF लोन और गिरती अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण भारी दबाव में है। अब उसको एक नया और बड़ा झटका लगा है। पिछले सात वर्षों में पहली बार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के अपने 3 अरब डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाने यानी रोलओवर करने से इनकार कर दिया है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव
यह 3 अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 18% है। इस कर्ज को चुकाने से पाकिस्तान के खजाने पर भारी असर पड़ेगा। 27 मार्च तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, जो मुश्किल से तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। अब इसमें से 3 अरब डॉलर कम होने से अर्थव्यवस्था के बाहरी झटके सहने की क्षमता कमजोर हो गई है।
UAE ने यह कदम क्यों उठाया?
UAE ने अचानक कर्ज वापस क्यों मांगा, इसके असल कारण साफ नहीं हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 4 अप्रैल को एक बयान में इसे एक नियमित वित्तीय लेनदेन बताया है, ताकि दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के राजनीतिक तनाव की अटकलों को कम किया जा सके। स्थानीय मीडिया का मानना है कि कर्ज की शर्तों पर बातचीत विफल हो गई। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अबू धाबी (UAE) के इस रुख में बदलाव का कारण पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ बढ़ती नजदीकियां हो सकती हैं।
सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के साजिद अमीन के अनुसार, यह भी संभव है कि सरकार ने 6.5% की उच्च लागत पर लंबी अवधि का रोलओवर न मिलने के कारण इसे चुकाने का फैसला किया हो।
अर्थव्यवस्था और बाजार पर असर
हाल के वर्षों में IMF, UAE, चीन और सऊदी अरब जैसे मित्र देशों की मदद से पाकिस्तान ने अपनी अर्थव्यवस्था को थोड़ा स्थिर किया था। ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया 278-282 के दायरे में स्थिर था। हालांकि, शेयर बाजार में निराशा है; पाकिस्तान का बेंचमार्क KSE-100 इंडेक्स अपने पिछले कई सालों के शानदार प्रदर्शन के बाद अब 15% नीचे आ गया है।
दोहरे दबाव में पाकिस्तान
खजाने से पैसे निकलने का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला है। इसी महीने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को 1.3 अरब डॉलर का बॉन्ड रीपेमेंट भी करना है। पाकिस्तान अभी भी IMF से मिलने वाली 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त का इंतजार कर रहा है, जो अब तक नहीं मिली है।
अब पाकिस्तान के पास क्या विकल्प हैं?
विश्लेषकों के अनुसार, इस बड़े फंड के बाहर जाने की भरपाई के लिए पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान) को कुछ अलोकप्रिय और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। जैसे-
- आयात पर सख्त प्रतिबंध लगाना।
- ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करना।
कमर्शियल बैंकों से उधारी
टॉपलाइन सिक्योरिटीज के सीईओ मोहम्मद सुहैल के मुताबिक, केंद्रीय बैंक कमर्शियल बैंकों के जरिए ‘डॉलर स्वैप’ का पुराना तरीका अपना सकता है। हालांकि IMF इसे पसंद नहीं करता और इसकी एक तय सीमा है, लेकिन फिलहाल यह एक खुला रास्ता है।
UAE और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक निवेश का दांव
पाकिस्तान ने पहले UAE के कुछ कर्ज को इक्विटी (हिस्सेदारी) में बदलने की कोशिश की थी। उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने नवंबर में बताया था कि UAE सैन्य-प्रबंधित ‘फौजी फाउंडेशन’ की सहायक कंपनियों में निवेश करने पर विचार कर रहा है। अबू धाबी की फर्म ‘इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC)’ ने पाकिस्तान के फर्स्ट वीमेन बैंक का अधिग्रहण किया है। इसके अलावा, 2024 में ‘AD पोर्ट्स ग्रुप’ ने कराची पोर्ट ट्रस्ट के साथ 25 साल का समझौता भी किया है।
भविष्य का खतरा मंडराया
लकी इन्वेस्टमेंट्स के सीईओ मोहम्मद शोएब के अनुसार, अगर सऊदी अरब की तरफ से कोई बड़ा फंड नहीं आता है, तो पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से गिरेगा। इससे न केवल बाजार की धारणा बिगड़ेगी, बल्कि केंद्रीय बैंक का 2026 के अंत तक 20 अरब डॉलर का रिजर्व हासिल करने का महत्वकांक्षी लक्ष्य भी खतरे में पड़ जाएगा।
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