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जंग के बाद नमकीन इंडस्ट्री का बिगड़ा माहौल, बीकानेर भुजिया के बढ़ेंगे दाम?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार बीकानेर से हर महीने भुजिया, पापड़ और नमकीन के 15 से 20 कंटेनर निर्यात किए जाते हैं। दूसरे सामान के लगभग 60 कंटेनर भी बाहर भेजे जाते हैं। फिलहाल इस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा रुक गया है। 

अमेरिका और इजराइल-ईरान के बीच छिड़ी जंग का असर अब दुनिया भर में मशहूर बीकानेर की नमकीन इंडस्ट्री पर भी पड़ने लगा है। नमकीन के एक्सपोर्ट की रफ्तार धीमी पड़ गई है। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि युद्ध के कारण कंटेनरों की कमी हो गई है, जिसका असर न सिर्फ एक्सपोर्ट पर पड़ा है बल्कि इंपोर्ट भी प्रभावित हो रहा है।

निर्यातकों के अनुसार कंटेनरों का आवागम काफी धीमा हुआ है। जो खेप पहले लगभग 30 दिन में पहुंच जाती थी उसमें अब 60 दिन तक का समय लग रहा है क्योंकि युद्ध के चलते उसे लंबे और सुरक्षित रास्तों से भेजा जा रहा है। मैन्युफैक्चरर्स को डर है कि जंग के कारण पैदा हुई आर्थिक अस्थिरता से प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में बीकानेर भुजिया के दाम बढ़ेंगे।

क्या कहा नमकीन कारोबारी ने?

भीखाराम ग्रुप से जुड़े नमकीन कारोबारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि कच्चे माल और ढुलाई आदि की बढ़ती लागत से उद्योग को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से माल भाड़े में भारी बढ़ोतरी हुई है और कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में खाद्य तेल की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है।

क्या कहते हैं निर्यातक?

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक खबर में निर्यातक राजेश जिंदल ने कहा कि आने वाले और जाने वाले, दोनों तरह के माल की खेप में देरी हो रही है। इससे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा- आने वाला और जाने वाला, दोनों तरह का माल देर से पहुंच रहा है और लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है।

अरब देशों में बीकानेरी नमकीन (स्नैक्स) और मसालों की मांग अब भी काफी ज्यादा है लेकिन आपूर्ति ढांचे में आई रुकावटों की वजह से नुकसान हो रहा है। व्यापारियों ने बताया कि निर्यात के साथ साथ पाम ऑयल और सोयाबीन जैसे जरूरी कच्चे माल के आयात पर भी असर पड़ा है। पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों से पैकेजिंग की लागत को 30-40 प्रतिशत तक बढ़ी है जिससे जिससे निर्माताओं के लिए लागत अधिक आ रही है।

निर्यातकों ने कहा कि यह समय नमकीन के व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्यात के ‘व्यस्ततम समय’ के लिए तैयारियां आमतौर पर इसी समय शुरू हो जाती हैं। उत्पादों की आपूर्ति के समय को लेकर बनी अनिश्चितता और बढ़े माल भाड़े की वजह से व्यापारी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार को मजबूर हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN