Home विश्व समाचार तेल पर मचा हाहाकार, अब नए रास्ते की तलाश में खाड़ी देश;...

तेल पर मचा हाहाकार, अब नए रास्ते की तलाश में खाड़ी देश; भारत की हो सकती है बड़ी भूमिका

7
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान युद्ध के बीच पूरी दुनिया में कच्चे तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। इस बीच अब खाड़ी देश वैकल्पिक रास्ते पर विचार कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि चर्चा भारत द्वारा समर्थित इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर पर भी चल रही है। 

ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की वजह से पूरी दुनिया का अर्थव्यवस्था हिल गई है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो अब कई देश मिलकर वैकल्पिक रास्ते पर विचार कर रहे हैं। कई देशों के अधिकारियों और उद्योगपतियों का मानना है कि पाइपलाइन्स और अन्य ट्रांसपोर्ट लिंक के जरिे तेल का आयात निर्यात करना ही भविष्य में इस तरह के संकट से बचने का रास्ता है। इस चर्चा में प्रस्तावित इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) एक बड़ा विकल्प हो सकता है। इससे भारत भी मध्य एशिया के रास्ते यूरोप से सीधा जुड़ जाएगा।

बाइपास चाहते हैं खाड़ी देश

इस युद्ध के बीच खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था भी लड़खड़ा गई है। लंबे समय से तेल के आयात निर्यात के लिए होर्मुज का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही रास्ता आज ऊर्चा संकट का माध्यम बन गया है। अब खाड़ी देश भी विचार कर रहे हैं कि इस रास्ते के अतिरिक्त विकल्प पर काम किया जाए।

सऊदी अरब को मिला फायदा

सऊदी अरब ने लाल सागर तक के लिए पाइपलाइन पहले से ही बिछा रखी थी। इसका उसे फायदा मिला। सऊदी अरब लाल सागर तक पाइपलाइन के माध्यम से तेल भेजता रहा और होर्मुज बंद होने से इस तेल सप्लाई पर कोई फर्क नहीं पड़ा। सऊदी अरब अपने पुराने इन्फ्रास्ट्रक्चर का पूरा फायदा उठा रहा है।

हाइफा रूट पर भी चर्चा

इजरायल के हाइफा पोर्ट के जरिए अरब सागर और भूमध्य सागर को जोड़ने वाले रूट पर भी चर्चा चल रही है। इसके जरिए मध्य एशिया तक यूरोप का रास्ता बिना होर्मुज से गुजरे ही साफ हो जाएगा। इस इलाके में पाइपलाइन के जरिए तेल की सप्लाई हो सकती है। हालांकि एक ही पाइपलाइन से काम नहीं चलने वाला है। इसमें पाइपलान के साथ ही सड़क मार्ग, रेलवे की भी जरूरत होगी। ऐसे में यह विचार भविष्यके लिए ही हो सकता है। यह तत्काल प्रभाव से अपनाने वाला रास्ता नहीं है।

लेबनान की कंस्ट्रक्शन कंपनी कैट ग्रुप के सीईओ क्रिस्टोफर बुश ने कहा है कि इस तरह के पाइपलान वाले प्रोजेक्ट में इंटरेस्ट बढ़ रहा है और इसपर काम शुरू हो गया है। बता दें कि अमेरिका और भारत द्वारा समर्थित इंडिया-मिडल-ईस्ट यूरोप कॉरिडोर की चर्चा एक बार फिर नई हो गयी है। यह कॉरिडोर, रेलवे नेटवर्क, पाइपलाइन और सड़क मार्ग के जरिए होगा। इसमें यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराल शामिल होगा। इसमें बड़ी चुनौती सऊदी अरब और इजरायल के हाइफा को शामिल करना है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने भी वैकल्पिक रास्ते का समर्थन किया है।

भारत की भूमिका

I2U2 समूह में भारत ने पिछले महीने भी IMEC की चर्चा की थी। इसका ऐलान भारत में आयोजित जी20 सम्मेलन में किया गया था। I2U2 समूह में भारत, इजरायल, यूएई, अमेरिका शामिल हैं। इस वैकल्पिक रास्ते में भारत की बड़ी भूमिका हो सकती है। यह कॉरिडोर भारत तक जुड़ा हुआ है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN