Source :- LIVE HINDUSTAN
एजेंटिक AI और ग्राफ इंटेलिजेंस जैसे एडवांस सिस्टम अब फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस को पहले से ज्यादा सेफ बना रहे हैं। यह टेक्नोलॉजी साइबर अटैक्स को रोकने और फाइनेंशियल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में मददगार है।
आज अपने पैसों को मैनेज करने के लिए हम दिन के हर वक्त कार्ड्स, फोन और कंप्यूटर जैसे डिवाइसेज का इस्तेमाल करते हैं। इस आसान सी सुविधा के पीछे एक बड़ी चुनौती सामने आई है कि साइबर अपराधी अब पहले से ज्यादा तेज और स्मार्ट होते जा रहे हैं। ऐसे में AI कैसे आपके पैसों की सुरक्षा कर रहा है, यह समझने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ने साइबर सिक्योरिटी आर्किटेक्चर के एक्सपर्ट और एक बड़े अमेरिकी इंटरनेशनल फाइनेंशियल ऑर्गनाइजेशन में इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट योगेश जायसवाल चमारिया से बात की। उनका मानना है कि इन सिक्योरिटी सिस्टम्स के काम करने के तरीके में एक बड़ा बुनियादी बदलाव आ रहा है।
एंटरप्राइज-स्केल सिक्योरिटी सिस्टम्स का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने बताया कि मॉडर्न फाइनेंस वर्ड में सबसे बड़ी चुनौती ढेर सारी सिक्योरिटी वॉर्निंग्स और उसपर फास्ट के साथ-साथ ऑटोमेटेड रिस्पॉन्स की कमी है। ग्लोबल बैंक्स रोजाना ट्रिलियन डॉलर के ट्रांजैक्शंस प्रोसेस करते हैं, जिससे वे साइबर अपराधियों का मेन टारगेट बन जाते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेडिशनल सिक्योरिटी रिएक्टिव रखी है, जैसे घर का सिक्योरिटी अलार्म खिड़की टूटने के बाद ही बजता है। इसके अलावा ढेरों अलर्ट्स मुश्किल और बढ़ा रहे हैं।
ढेर सारे फाल्स अलर्ट बने परेशानी
ट्रेडिशनल सिक्योरिटी सिस्टम्स की ओर से भेजे जाने वाले ढेरों अलर्ट्स में से कई फाल्स या फिर झूठे होते हैं। ऐसे ढेर सारे अलर्ट्स का एकसाथ आना, इन्हें मैनेज करना और उनपर प्रतिक्रिया देना मुश्किल बना देता है। कल्पना कीजिए कि आपके फोन में दिन में हजारों बार संदिग्ध एक्टिविटी के अलर्ट्स भेजे जाएं। सिटी कॉलेज ऑफ न्यूयॉर्क (CCNY) के पूर्व छात्र रहे चमारिया कहते हैं कि जाहिर है, इंसानी टीम इनमें से ढेरों अलर्ट्स को झूठा पाने के बाद कई बार बाकियों को भी अनदेखा करने लगती है और कई बार असली खतरा नजरंदाज हो जाता है।
चमारिया का मानना है कि इसका सॉल्यूशन सिर्फ और टूल्स जोड़ना नहीं है, बल्कि सिस्टम को इंटेलिजेंट बनाना है और यहीं पर बात होती है एजेंटिक AI की। उन्होंने कहा, ‘हम अलग-अलग टूल्स का एक बड़ा कलेक्शन नहीं खोज रहे हैं बल्कि हमें एक स्मार्ट फाउंडेशन चाहिए, जो खुद सोच सके, छिपे हुए कनेक्शन ढूंढ पाए और तुरंत ऐक्शन ले सकता हो।’
डिजिटल डिटेक्टिव बना एजेंटिक AI
मौजूदा सिक्योरिटी सिस्टम्स को एडवांस बनाने की चुनौती में एजेंटिक AI एक टर्निंग पॉइंट बनकर उभरा है। योगेश ने खुद एक कॉम्प्लेक्स साइबर सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म के आर्किटेक्चरल डिजाइन को लीड किया है, जिसके साथ मैनुअल डिफेंस से आगे बढ़ा जा सकेगा। हमने इस बारे में और जानने की कोशिश की, जिसपर योगेश ने बताया कि इसे लार्ज-स्केल फाइनेंशियल इनवायरमेंट में अप्लाई किया जा रहा है और यह एक स्टैंडर्ड सॉफ्टवेयर प्रोग्राम से कहीं ज्यादा है। यह खास AI ‘एजेंट्स’ का ऐसा सिस्टम है, जो डिजिटल इन्वेस्टिगेटर के तौर पर जांच करता रहता है।
AI एजेंट्स लगातार सिस्टम ऐक्टिविटी पर नजर रखते हैं, खामियों की पहचान करते हैं और तुरंत उसपर प्रतिक्रया भी देते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें किसी मैनुअल निर्देश या कमांड की जरूरत नहीं होती। इसके बजाय वे पुराने डाटा, रियल-टाइम सिस्टम ऐक्टिविटी और अन्य खतरों से जुड़े इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए सोच-समझकर फैसले लेते हैं। जब भी किसी एजेंट को गड़बड़ी का पता चलता है, वह तुरंत जांच शुरू कर देता है। क्लूज को आपसे में जोड़ने और रिस्क-लेवल कैल्कुलेट करने के बाद वह इंसानी सिक्योरिटी टीम्स को आसान भाषा में साफ और ऐक्शन लेने के लिए जरूरी जानकारी देता है।
जवाब देने का समय घंटों से सेकेंड्स में लाने वाला यह प्लेटफॉर्म हाई-स्टेक्स वाले ऐसे बेहद महत्वपूर्ण फाइनेंशियल इनवायरमेंट्स को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जहां थोड़ी सी देर से भी बड़ा नुकसान हो सकता है।
ग्राफ इंटेलिजेंस से जुड़ती हैं कड़ियां
अगर एजेंटिक AI एक डिटेक्टिव है तो ‘ग्राफ इंटेलिजेंस’ उसका वह बड़ा एविडेंस बोर्ड है, जहां सारे सुराग आपस में जुड़ते हैं। चमारिया का अप्रोच फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को एक बड़े ‘नॉलेज ग्राफ’के तौर पर देखता है, यह एक ऐसा मुश्किल मैप होता है जो दिखाता है कि लोग, डिवाइस, ट्रांजैक्शन और बिहेवियर एकदूसरे के साथ जुड़े हैं। किसी एक ट्रांजैक्शन को देखने के बजाय सिस्टम कॉन्टेक्स्ट समझता है कि यूजर कौन हैं, कौन सा डिवाइस यूज कर रहे हैं, पैसा कहां जा रहा है और क्या ट्रांजैक्शन उनके पुराने बिहेवियर से मेल खाता है? इस तरह डाटा में छिपे डीटेल्स को पहचानकर प्लेटफॉर्म उन कॉम्प्लिकेटेड अटैक्स को रोक सकता है, जो ट्रेडिशनल सिक्योरिटी सिस्टम्स को नॉर्मल लगते हैं।
इन खतरों को रोकना है सही अप्रोच
योगेश का मानना है कि खतरों से बचाव के बजाय उन्हें पूरी तरह रोकना सही अप्रोच है। अपनी टेक एक्सपर्टीज के चलते उन्हें इंजीनियरिंग एप्लीकेशन ऑफ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (EAAI) और IEEE ट्रांजैक्शन ऑन कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जाने-माने एकेडमिक जर्नल्स में रिसर्च पेपर को इवैल्युएट करने के लिए इनवाइट किया जाता रहा है। इसके अलावा वे रोबोटिक्स और अप्लाइड टेक्नोलॉजी में स्टूडेंट्स इनोवेशन प्रोग्राम में टेक्निकल जज की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उन्हें भविष्य में सकारात्मक बदलाव और इनोवेशंस की उम्मीद है।
वह कहते हैं, लक्ष्य ऐसे सिस्टम डिजाइन करने का है, जो फाइनेंशियल इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचने से पहले ही खतरों का अनुमान लगा सकें, जांच कर सकें और उन्हें पूरी तरह रोक पाएं। आम कंज्यूमर्स के लिए यह टेक्नोलॉजिकल डिवेलपमेंट शायद उतना विजिबल ना हो लेकिन हर बार जब कोई पेमेंट प्रोसेस होता है या बैलेंस चेक किया जाता है, तो ये इंटेलिजेंट सिस्टम स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए बैक-एंड में काम कर रहे होते हैं। योगेश कहते हैं कि जैसे-जैसे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस कॉम्प्लेक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदले हैं, साइबर सिक्योरिटी सिर्फ प्रोटेक्टिव लेयर नहीं बल्कि जीता-जागता एडॉप्टिव सिस्टम बन रही है।
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