Home विश्व समाचार स्ट्रेट ऑफ ट्रंप! क्यों चाहकर भी होर्मुज का नाम नहीं बदल सकते...

स्ट्रेट ऑफ ट्रंप! क्यों चाहकर भी होर्मुज का नाम नहीं बदल सकते US राष्ट्रपति, बयान से मची खलबली

17
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ का नाम दे दिया है। जानें क्या कोई राष्ट्रपति वैश्विक जलमार्ग का नाम बदल सकता है और इसके भू-राजनीतिक व आर्थिक मायने क्या हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को मियामी में सऊदी समर्थित फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) सम्मेलन में बोलते हुए दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया। फिर खुद ही अपनी ‘गलती’ सुधारते हुए कहा, ‘माफ कीजिए, मैंने गलती से कह दिया… स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। फेक न्यूज वाले कहेंगे कि यह एक्सीडेंट था। मेरे साथ एक्सीडेंट बहुत कम होते हैं।’ कुछ रिपोर्टों में तो यह भी कहा गया है कि ट्रंप ईरान को ‘खदेड़ने’ के बाद इस स्ट्रेट का नाम ‘स्ट्रेट ऑफ अमेरिका’ या अपने नाम पर रखने पर विचार कर रहे हैं। इसी महीने उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी शेयर की थी जिसमें होर्मुज को ‘स्ट्रेट ऑफ अमेरिका’ लिखा दिखाया गया। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान वाशिंगटन में कई इमारतों का नाम अपने नाम पर रखने वाले ट्रंप ने पहले कहा कि उनकी यह टिप्पणी एक ‘गलती’ थी, लेकिन फिर तुरंत यह भी कह दिया कि ‘मेरे साथ कोई भी चीज गलती से या अचानक नहीं होती है।’

इस टिप्पणी ने जहां एक ओर लोगों को हैरान किया और कुछ के लिए यह मजाक का विषय बनी, वहीं इस सुर्खियां बटोरने वाले बयान के पीछे एक बहुत ही गंभीर सवाल छिपा है: क्या कोई भी नेता, यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति भी किसी वैश्विक जलमार्ग का नाम बदल सकता है? और यदि नहीं, तो ऐसी बयानबाजी के क्या मायने हैं?

क्या कोई राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर जलमार्ग का नाम बदल सकता है?

इसका सीधा जवाब है- नहीं। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग वैश्विक सम्मेलनों द्वारा शासित होते हैं, जैसे कि ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ और लंबे समय से चली आ रही भौगोलिक सहमति। किसी भी एक देश या नेता के पास एकतरफा तरीके से इनका नाम बदलने का अधिकार नहीं है। ऐसे नाम संधियों, नेविगेशन सिस्टम और वैश्विक वाणिज्य में दर्ज होते हैं। ये नाम व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति से बनाए रखे जाते हैं, किसी राजनीतिक आदेश से नहीं। कानूनी तौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ का कोई अस्तित्व नहीं है।

इस बयानबाजी के भू-राजनीतिक मायने

भले ही इस नामकरण का कोई कानूनी आधार न हो, लेकिन यह टिप्पणी महत्वहीन नहीं है, क्योंकि भू-राजनीति में भाषा ही ताकत होती है। किसी भी जगह का नामकरण, भले ही वह केवल बयानों में हो उस पर प्रभाव, नियंत्रण और स्वामित्व का संकेत देता है। यहीं से यह टिप्पणी एक मजाक से आगे बढ़कर एक भू-राजनीतिक संकेत में बदल जाती है। ट्रंप की शैली अक्सर बिना सोचे-समझे की गई टिप्पणियों और सोचे-समझे संदेशों के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है। होर्मुज को व्यक्तिगत नाम देना उनके उस तरीके का हिस्सा है जहां वह भड़काऊ बातें कहकर अपना दबदबा जताने की कोशिश करते हैं और फिर उसे हल्का कर देते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व ट्रंप की इस टिप्पणी को और अधिक गंभीर बनाता है। दुनिया भर की तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। यह फारस की खाड़ी और वैश्विक बाजारों के बीच का मुख्य प्रवेश द्वार है। इसमें होने वाली छोटी सी भी रुकावट दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की इस जीवनरेखा को नियंत्रित करने के ऐसे बयान न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि दुश्मनी को भी और लंबा खींच सकते हैं।

इस बयान की टाइमिंग (समय) बहुत महत्वपूर्ण है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका ने जलमार्ग को खुला रखने के लिए तेहरान पर दबाव डाला है और खुद को समुद्री सुरक्षा के गारंटर के रूप में पेश किया है। दूसरी ओर, ईरान ने लगातार यह कहा है कि यह जलमार्ग केवल दुश्मन देशों के जहाजों के लिए बंद किया जाएगा, और अमेरिका के सहयोगियों को इस महत्वपूर्ण मार्ग तक पहुंच नहीं मिलेगी।

इन हालात में, इसे ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कहना केवल मजाक नहीं है; यह एक वैश्विक जीवनरेखा पर अपना प्रभुत्व जताने की कोशिश है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह ट्रंप की अप्रत्याशितता और ताकत को दर्शाता है, जबकि घरेलू स्तर पर यह उनके समर्थकों को यह संदेश देता है कि उनका नेता नियंत्रण में है और ताकत दिखाने के लिए किसी भी नियम को तोड़ सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN