Source :- LIVE HINDUSTAN
Not take home this temple prasad: मंदिर जाते हैं और प्रसाद घर लेकर आना बिल्कुल कॉमन है। लेकिन क्या आपको पता है कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां के प्रसाद को घर लेकर आने के लिए अक्सर लोग मना करते हैं।
मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए जाना। उन्हें भोग-प्रसाद चढ़ाना तो बिल्कुल नॉर्मल है। जब लोग दूर-दराज किसी मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं तो खासतौर पर अपने घरवालों, रिश्तेदारों और परिचितों के लिए प्रसाद लेकर आते हैं। लेकिन आप जानकर हैरान हो जाएंगे, कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां के प्रसाद को घर ले जाना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि इन मंदिरों से जुड़ी एनर्जी आम इंसान के लिए रहस्यमयी होती है और प्रसाद घर लेकर आने का मतलब है कि उन एनर्जी घर लेकर आना, जोकि ठीक नहीं। जैसे इन 5 मंदिरों के प्रसाद को घर ले जाने की पूरी तरह से मनाही होती है
मेहंदीपुर बालाजी
मेहंदी पुर बालाजी मंदिर में दर्शन करने जाने वाले भक्तों के लिए वहां का प्रसाद घर लेकर जाना पूरी तरह से मना होता है। इस मंदिर में भूत-प्रेत, बाधाओं के निवारण के लिए ज्यादातर लोग पहुंचते हैं। यहां पर कई तरह की निगेटिव एनर्जी होती है। मान्यता है कि ये एनर्जी प्रसाद के साथ घर तक पहुंच सकती है। इसीलिए यहां के प्रसाद को घर नहीं लाना चाहिए।
नैना देवी टेंपल
नैनीताल में 51 शक्तिपीठों में शामिल नैना देवी टेंपल को जाग्रत शक्तिपीठ में गिना जाता है। यहां पर मिलने वाले प्रसाद को भी मान्यतानुसार घर लाने की मनाही होती है।
कामाख्या देवी टेंपल
मां कामाख्या शक्तिपीठ असम के गुवाहाटी में नीलांचल पहाड़ियों पर बना है। 51 शक्तिपीठों में से एक ये मंदिर तांत्रिक सिद्धियों के लिए जाना जाता है। इस मंदिर में लोग तंत्र-मंत्र साधना के लिए आते हैं। इस मंदिर में माता की मूर्ति ना होकर कुंड स्वरूप में पूजा होती है। मान्यतानुसार इस मंदिर के प्रसाद को वहीं पर खा लेना चाहिए और भूलकर घर नहीं लाना चाहिए।
कालभैरव का प्रसाद
वैसे तो उज्जैन के काल भैरव मंदिर के प्रसाद को घर ना लाने की मान्यता है। दरअसल इस मंदिर में कालभैरव को शराब का भोग लगाया जाता है। जिसे अगर कोई गृहस्थ प्रसाद स्वरूप ले तो उसके जीवन में परेशानियां आने लगती है। लेकिन काफी सारे लोग काल भैरव के किसी भी मंदिर के प्रसाद को घर तक लाने से बचते हैं। मान्यतानुसार काल भैरव का प्रसाद घर लाना अपशकुन होता है।
कोटिलिंगेश्वर मंदिर
कर्नाटक के कोलार जिले में एक करोड़ शिवलिंग की स्थापना है। यहां पूजा के बाद दिया गया प्रसाद केवल प्रतीकात्मक रूप में खाया जाता है। इसे खाना अशुभ माना जाता है। वैसे भी शिवलिंग के ऊपर चढ़े प्रसाद को ग्रहण करने की मनाही होती है। मान्यता है कि ये प्रसाद मनुष्यों को नहीं खाना चाहिए।
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