Source :- BBC INDIA
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इसराइल में ‘परमाणु ठिकाने’ के पास स्थित दक्षिणी इसराइली क्षेत्र के दो शहरों पर ईरानी मिसाइल हमलों में 160 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है.
इसराइल के आपातकालीन सेवा के अधिकारियों के अनुसार शनिवार शाम बैलिस्टिक मिसाइलों के इन शहरों पर गिरने के बाद अरद में 84 और डिमोना में 78 लोगों का इलाज किया जा रहा है.
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि उसे डिमोना से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित ‘परमाणु अनुसंधान’ केंद्र को किसी तरह के नुक़सान की जानकारी नहीं है.
इससे पहले ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने कहा था कि ये हमले शनिवार को ईरान के नतांज़ परमाणु संयंत्र पर हुए हमले के जवाब में किए गए हैं.
आपात सेवाओं के अनुसार, रविवार को तेल अवीव पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में कम से कम सात लोग घायल हुए.
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने रविवार को अरद में घटनास्थल का दौरा किया और कहा, “अगर आपको इसका सबूत चाहिए कि ईरान पूरी दुनिया को ख़तरे में डाल सकता है तो पिछले 48 घंटे में उसने ये दे दिया है. पिछले 48 घंटे में ईरान ने नागरिक क्षेत्रों पर हमला किया है.”
इसराइल न तो परमाणु हथियार रखने की पुष्टि करता है और न ही इसका खंडन करता है.
हालांकि स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के अनुसार, उसके पास लगभग 90 परमाणु वॉरहेड हैं, जिससे वह मध्य-पूर्व का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश बन जाता है.
‘बच्चों के सिर और सीने में चोटें’
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इसराइली वायुसेना का कहना है कि 28 फ़रवरी को ईरान पर अमेरिका‑इसराइल के हमले के बाद से ईरान अब तक इसराइल पर 400 मिसाइलें दाग चुका है.
वायुसेना के अनुसार, इनमें से 92 फ़ीसदी मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया.
अरद में स्थानीय निवासियों ने बताया कि शनिवार को उन्होंने जो धमाके सुने, वे बेहद डरावने थे.
मिसाइल हमले में कई इमारतों को गंभीर नुक़सान पहुंचा और ज़मीन में एक गहरा गड्ढा बन गया.
शहर की एक पैरामेडिक नरम ज़ैद ने बीबीसी न्यूज़ को बताया कि उन्होंने क्षतिग्रस्त इमारत के भीतर वस्तुओं के गिरने से घायल हुए कई बच्चों के सिर और सीने में चोटें देखीं.
उन्होंने कहा, “एक 10 साल की बच्ची के सिर में टूटे हुए कांच से चोट लगी थी और खून उसके चेहरे पर आ रहा था. मैं उसे ढाढ़स बंधाने की कोशिश कर रही थी.”
“वह एंबुलेंस में जाने से इनकार कर रही थी, क्योंकि उसके माता‑पिता अब भी इमारत के अंदर थे. हम तब तक रुके रहे, जब तक उसके माता‑पिता को नष्ट हो चुके अपार्टमेंट ब्लॉक से बाहर नहीं निकाल लिया गया, और फिर हमने उन तीनों को अस्पताल भेजा.”
हमले के प्रभाव से दो रिहायशी अपार्टमेंट इमारतों की बाहरी दीवारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं.
नेगेव रेगिस्तान के इस कट्टर-रूढ़ीवादी शहर में काले कपड़े पहने लोगों की भीड़ नुकसान को देखते हुए खड़ी दिख रही थी.
‘जांच तत्काल शुरू’
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पास के शहर, डिमोना, में भी इसी तरह का मिसाइल हमला हुआ.
घायलों में एक दस साल का लड़का भी शामिल था. चिकित्सकों ने उसकी हालत को गंभीर बताया है.
इसराइली अग्निशमन सेवा ने कहा, “डिमोना और अरद, दोनों जगहों पर इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी गईं, लेकिन वे उन्हें रोकने में नाकाम रहीं. इसके नतीज़े में सैकड़ों किलोग्राम वज़न वाले वारहेड्स से लैस दो बैलिस्टिक मिसाइलें शहरों में आ गिरीं.”
इसराइल के भीतर इस तरह का नुक़सान पहुंचाने की ईरान की क्षमता, युद्ध की मानवीय कीमत की याद दिलाती है.
इस बात की जांच तत्काल शुरू कर दी गई है कि ये मिसाइलें इसराइल की हवाई रक्षा प्रणाली को भेदने में सफल कैसे हुईं.
लेकिन पिछली गर्मियों में हुए 12 दिवसीय युद्ध की तरह ही, इसराइलियों को पता है कि यह प्रणाली अचूक नहीं है.
और तब की तरह, ऐसे हमलों से जनता का संकल्प कमजोर होने के बजाय और मज़बूत होने की संभावना ज़्यादा है.
‘किसी हमले की जानकारी नहीं’
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नेगेव रेगिस्तान में स्थित शिमोन पेरेज़ नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र को आम बोलचाल में अक्सर ‘डिमोना रिएक्टर’ कहा जाता है.
लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि यहीं इसराइल का अघोषित परमाणु हथियार भंडार मौजूद है.
आधिकारिक तौर पर कहा जाता है कि यह केंद्र केवल अनुसंधान कार्यों पर केंद्रित है, लेकिन करीब छह दशकों से यह एक खुला रहस्य रहा है कि इसराइल ने यहीं परमाणु बम विकसित किया.
भले ही हर अगली सरकार ने इस मुद्दे पर जानबूझकर अस्पष्टता बनाए रखी हो.
इसका मतलब यह है कि इसराइल मध्य पूर्व की एकमात्र परमाणु शक्ति है.
इसलिए इस तरह के किसी भी संकेत को कि उसे निशाना बनाया जा रहा है, इसराइल बेहद गंभीरता से लेता है.
इसराइल और अमेरिका, दोनों ने ईरान की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता की किसी भी संभावना को ख़त्म करना इस युद्ध का प्रमुख लक्ष्य बताया है.
ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था ने नतांज़ पर हुए हमले को परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का उल्लंघन बताया.
हालांकि उसने यह भी कहा कि रेडियोधर्मी पदार्थ के रिसाव की कोई रिपोर्ट नहीं है और आस-पास के इलाकों के निवासियों के लिए कोई खतरा नहीं है.
नतांज़ को युद्ध के शुरुआती दिनों में भी निशाना बनाया गया था. यह युद्ध 28 फ़रवरी को शुरू हुआ था, और उस दौरान अमेरिका इसराइल के हमले हुए थे.
इसके अलावा, पिछले साल जून में हुए 12 दिवसीय युद्ध के दौरान भी नतांज़ पर हमले किए गए थे.
शनिवार को जब नतांज़ को लेकर सवाल किया गया, तो इसराइली रक्षा बलों (आईडीएफ़) ने इसराइली और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से कहा कि उन्हें उस क्षेत्र में किसी हमले की जानकारी नहीं है.
(अतिरिक्त रिपोर्टिंग : टॉम बैनेट और गैब्रिएला पोमेरॉय)
SOURCE : BBC NEWS



