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एनल कैंसरः ‘इलाज के छह साल बाद भी मैं असहनीय पीड़ा में हूं’

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Source :- BBC INDIA

ट्रिश ने बताया है कि एनल कैंसर से पीड़ित होने के बाद उन्हें किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा

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एनल कैंसर से पीड़ित एक महिला ने बताया कि पेल्विक रेडियोथेरेपी ट्रीटमेंट के बाद असहनीय पीड़ा झेलने के कारण उन्हें लगा कि उनकी मौत होने वाली है.

57 साल की ट्रिश प्रॉसर ने बताया कि उनकी वजाइनल वॉल्स सिकुड़ गईं और छह साल बाद भी उन्हें दर्द का सामना करना पड़ रहा है.

चार बच्चों की मां ट्रिश ने कहा कि उन्हें अपने प्रियजनों को अपने कैंसर के प्रकार के बारे में बताने में शर्म आ रही थी क्योंकि उन्हें लगता था कि एनल कैंसर को लेकर समाज में स्टिग्मा जुड़ा हुआ है.

एनल कैंसर दुर्लभ है. ब्रिटेन में हर साल लगभग इसके 1,500 मामले सामने आते हैं और इनमें से करीब 40-50 मामले उत्तरी आयरलैंड से होते हैं.

चिकित्सकों का कहना है कि एनल कैंसर के इलाज के बाद भी लंबे समय से ख़्याल रखने की ज़रूरत है.

ट्रिश को 2020 में कोविड महामारी जब चरम पर थी उसी दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था

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ट्रिश ने कहा, “लोग अपने गुप्तांगों से जुड़ी समस्याओं के बारे में बात करने में बहुत शर्म महसूस करते हैं. लेकिन मैं इस टैबू को तोड़ना चाहती हूं.”

साल 2020 में जब कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत हुई तब ट्रिश को कैंसर का पता चला. इसके क़रीब छह साल बाद ट्रिश ने बताया कि इस मुश्किल सफ़र के दौरान वो कैसे अकेली थीं.

उन्होंने कहा, “बाहर से देखने पर मैं सामान्य लग रही थी क्योंकि मेरे बाल नहीं झड़े थे, लेकिन अंदर से मैं बहुत दुखी थी, मुझे लग रहा था कि मैं बिखर रही हूं.”

“मेरा सबसे बुरा लक्षण थकान था, मैं बहुत थकी हुई रहती थी. मुझे एनल के आसपास खुजली भी होती थी, लेकिन मेरे बाउल मूवमेंट में कोई बदलाव नहीं आया था और सच कहूं तो कैंसर से जुड़े ऐसे कोई लक्षण नहीं थे.”

ट्रिश और उनके पार्टनर मार्क सीमोर की शादी मई में होने वाली है

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ब्रिटेन के बाकी हिस्सों के उलट, उत्तरी आयरलैंड में पेल्विक रेडियोथेरेपी करा चुके पेशेंट्स के लिए किसी एक क्लिनिक या एक ही स्थान पर सारे ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने वाली कोई सुविधा नहीं है.

बेलफ़ास्ट की रहने वाली ट्रिश के मुताबिक, ट्रीटमेंट से उबरना तो रिकवरी का पहला पड़ाव है, जिसमें कई लोगों को सालों लग सकते हैं.

उन्होंने कहा, “शरीर पर निशान रह जाते हैं. पेल्विक रेडियोथेरेपी ट्रीटमेंट कराने वालों को आंत और वजाइना में गहरे घाव झेलने पड़ते हैं, जो बेहद दर्दनाक होते हैं.”

“मैं नहीं चाहती थी कि लोगों को पता चले कि मैं किस दौर से गुजर रही हूं, क्योंकि यह मेरे शरीर का एक बेहद निजी हिस्सा था, इसलिए जब लोग पूछते थे, तो मैं बस यही कहती थी कि मैं ठीक हूं.”

एनल कैंसर क्या होता है

दरअसल, एनल कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन के लगातार संक्रमण के कारण होता है, जो लगभग 90 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार है.

एचपीवी एनल कैनाल में कोशिकाओं को असामान्य रूप से बढ़ने और ट्यूमर बनाने का कारण बनता है.

अन्य महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या अन्य स्त्री रोग संबंधी कैंसर का इतिहास शामिल है.

हालांकि, एचपीवी से संक्रमित बहुत कम पेशेंट्स को ही कैंसर होता है.

क्या पेल्विक रेडियोथेरेपी ट्रीटमेंट से इंटिमेसी प्रभावित होती है

ट्रिश के मुताबिक इलाज के बाद उबरना एक लंबी प्रक्रिया है

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एनल कैंसर के लिए पेल्विक रेडियोथेरेपी वजाइना टिश्यू को लंबे समय तक बने रहने वाला नुकसान पहुंचा सकती है.

इस स्थिति को अक्सर रेडिएशन-इंड्यूस्ड वेजाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है. इसमें ऐसे टिश्यू बन जाते हैं जिनसे वजाइना छोटी और शुष्क हो जाती है. जिसकी वजह से टिश्यू में कट लग सकते हैं और नुकसान भी पहुंच सकता है.

हालांकि ये इलाज के दौरान होता है. लेकिन अक्सर इलाज ख़त्म होने के महीनों या सालों बाद तक ये समस्या बनी रह जाती है.

ट्रिश ने कहा, “मुझे पता नहीं था कि मेरी वजाइना वास्तव में आपस में चिपक गई थी और मुझे इसे फिर से ओपन करने की ज़रूरत थी. जो कि डाइलेटर या शारीरिक संबंध के माध्यम से ही संभव था. शारीरिक संबंध दर्दनाक थे.”

“लेकिन जैसे-जैसे आप ठीक होने लगते हैं, आप फिर से शारीरिक संबंध बनाने के बारे में सोचने लगते हैं और मैं बहुत खुशकिस्मत थी कि मेरे पास एक मजबूत, प्यार करने वाला साथी था जो धैर्यवान था और उन्होंने उस दौर में मेरी मदद की.”

इलाज के बाद ख़्याल रखने की ज़रूरत

ट्रिश को कैंसर का पता लगाने स्कैन सहित कई टेस्ट कराने पड़े

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रेडियोथेरेपी यूके ने बेलफ़ास्ट हेल्थ एंड सोशल केयर ट्रस्ट की जीआई क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी टीम के साथ मिलकर कहा है कि वे कैंसर के बारे में एक ऐसी चर्चा शुरू करना चाहते हैं जिसे सबसे कम चर्चित कैंसरों में से एक माना जाता है.

इनका उद्देश्य कैंसर के दौरान और उसके बाद एक पूरी देखभाल का जरिया डेवलप करना है.

रेडियोथेरेपी यूके की सारा क्विनलान ने कहा, “कैंसर से होने वाले साइड इफेक्ट्स महीनों या सालों के बाद भी सामने आ सकते हैं. जो लाइफ़ की क्वालिटी, फ्रीडम और व्यक्ति के स्वास्थ्य को काफ़ी हद तक प्रभावित करते हैं.”

“हम एक व्यवस्था चाहते हैं जिसके चलते इलाज के बाद पेशेंट्स अकेला महसूस न करें.”

ट्रिश भी पेल्विक रेडियोथेरेपी के साइड इफ़ेक्ट से निपटने के लिए एक क्लिनिक की मांग कर रही हैं.

ट्रिश कहती हैं, “मेरे इलाज के दौरान, मेरे सामान्य डॉक्टर्स मेरे लिए एक सहारा थे. दयालु और मदद के लिए तैयार. लेकिन इलाज ख़त्म होने के बाद यह दर्दनाक रूप से साफ़ हो गया कि पेल्विक रेडियोथेरेपी बाद में सामने आने वाले साइड इफ़ेक्ट्स के दौरान मुझे सब कुछ अकेले ही संभालना पड़ा.”

“वजाइना टिश्यू को फैलाने के लिए डिजाइन किए गए डाइलेटर का इस्तेमाल बहुत पीड़ादायक था.”

ट्रिश ने बताया, “लंबे समय से कब्ज़ और वज़न बढ़ने के कारण मेरा पेट इतना फूल गया था कि जब मैंने आईने में देखा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं खुद को पहचान ही नहीं पा रही थी.”

शारीरिक और मानसिक प्रभाव

डॉ. कैथरीन हन्ना बेलफ़ास्ट हेल्थ ट्रस्ट में कंसल्टेंट क्लिनिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हैं

जल्द ही उत्तरी आयरलैंड में पहली बार पेशेंट्स, डॉक्टर्स और चैरिटी संस्थाएं मिलकर एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं जो पूरी तरह से एनल कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है.

बेलफ़ास्ट कैंसर सेंटर में क्लिनिकल नर्स स्पेशलिस्ट एलिसन इरविन आमतौर पर इलाज के बाद पेशेंट्स से संपर्क करने वाली पहली शख़्स होती हैं.

उन्होंने कहा, “इसका मकसद उन्हें एनल कैंसर से जुड़े टैबू को दूर करने के लिए आवश्यक शब्द और शब्दावली प्रदान करना है. जिसमें अपने परिवार और कंपनियों को इसके बारे में बताना शामिल है.”

“ये बेहद ज़रूरी है कि पेशेंट्स को महसूस हो कि वे हमसे खुलकर बात कर सकते हैं और अपने शरीर के बारे में सब कुछ बता सकते हैं. मैंने ये सब पहले भी सुना है, इसलिए पेशेंट्स के साथ मेरा संबंध महत्वपूर्ण है.”

बेलफ़ास्ट हेल्थ ट्रस्ट की सलाहकार क्लिनिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर कैथरीन हन्ना ने कहा कि अगर एनल कैंसर का जल्दी पता चल जाए तो रेडियोथेरेपी से इसका इलाज संभव है.

उन्होंने कहा, “यह एक दुर्लभ कैंसर है और लोगों को उस जगह पर गांठ, खुजली और यहां तक ​​कि रक्तस्राव पर भी ध्यान देना चाहिए. अगर किसी को अपने शरीर में कुछ असामान्य लगे, तो उन्हें जांच करवानी चाहिए.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

SOURCE : BBC NEWS