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1 ही दिन में 15% तक टूटी चांदी, सोने के रेट में भी भूचाल, क्यों आई बड़ी गिरावट और आगे क्या होगा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Silver Price Today: ग्लोबल मार्केट में आज चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। इंटरनेशनल मार्केट में सिल्वर 13 से 15% तक गिरकर करीब 67 डॉलर पर आ गई और कुछ समय के लिए 65 डॉलर के नीचे जाने का दबाव भी बना।

Silver Price Today: ग्लोबल मार्केट में आज चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। इंटरनेशनल मार्केट में सिल्वर 13 से 15% तक गिरकर करीब 67 डॉलर पर आ गई और कुछ समय के लिए 65 डॉलर के नीचे जाने का दबाव भी बना। यह हाल के सालों की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावटों में से एक है। इस दौरान गोल्ड भी करीब 5% टूट गया, जबकि सिल्वर ETF में 20% तक की गिरावट और माइनिंग स्टॉक्स में करीब 10% की कमजोरी देखी गई।

सर्राफा बाजार की कीमतें

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में गुरुवार को चांदी की कीमतें 17,800 रुपये लुढ़ककर 2.38 लाख प्रति किलोग्राम रह गईं, जबकि वैश्विक जिंस बाजारों में भारी बिकवाली के चलते सोने की कीमत 7,000 रुपये के नुकसान के साथ 1.53 लाख प्रति 10 ग्राम रह गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 17,800 रुपये या लगभग 7 प्रतिशत गिरकर 2,38,700 प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई, जो बुधवार को बंद हुई कीमत 2,56,500 रुपये प्रति किलोग्राम से काफी कम है। चांदी अब 29 जनवरी को दर्ज किए गए अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम से 1,65,800 रुपये या 41 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी है। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 7,000 रुपये या 4.37 प्रतिशत के नुकसान के साथ 1,53,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गया, जो पिछली बंद कीमत 1,60,300 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम है। सोने की कीमत 29 जनवरी को दर्ज किए गए अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से 29,700 रुपये या 16.23 प्रतिशत तक गिर चुकी है।

क्या है डिटेल

सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि यह गिरावट ऐसे समय आई जब वैश्विक तनाव, खासकर ईरान से जुड़ी स्थिति, बढ़ रही है। आमतौर पर ऐसे हालात में सोना-चांदी जैसी सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली संपत्तियों में तेजी आती है, लेकिन इस बार ट्रेंड उल्टा रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार इस समय ‘रिस्क-ऑफ’ मोड में है, जहां निवेशक सुरक्षा खरीदने के बजाय हर लिक्विड एसेट बेचकर कैश जुटा रहे हैं।

दरअसल, सिल्वर ने 2025 में 135% से ज्यादा की जबरदस्त तेजी दिखाई थी, जिससे इसमें काफी सट्टेबाजी आ गई थी। अब जैसे ही अनिश्चितता बढ़ी, वही निवेशक तेजी से बाहर निकलने लगे। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया, क्योंकि मजबूत डॉलर में मेटल्स महंगे हो जाते हैं और उनकी मांग घटती है।

गिरावट की वजह

इस गिरावट को और तेज करने में लीवरेज्ड ETF और फ्यूचर्स ट्रेडिंग का बड़ा रोल रहा। जैसे ही कीमतें गिरीं, कई ट्रेडर्स को मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ा। जिनके पास अतिरिक्त पैसा नहीं था, उनकी पोजिशन अपने आप कट गई, जिससे बाजार में जबरदस्त बिकवाली शुरू हो गई। यह एक तरह का ‘डोमिनो इफेक्ट’ बन गया कीमत गिरी, बिकवाली बढ़ी और गिरावट और तेज हो गई।

ईरान तनाव और बढ़ती महंगाई भी इस गिरावट से जुड़े हुए हैं, लेकिन सीधे तौर पर नहीं। दरअसल, तेल-गैस की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है। ऐसे में बिना ब्याज वाले एसेट जैसे Silver कम आकर्षक हो जाते हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल कैश और अन्य एसेट्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।

अब आगे क्या होगा?

इस पर बाजार में अलग-अलग राय है। फिलहाल वोलैटिलिटी बनी रहने की संभावना है क्योंकि अभी भी बाजार में लीवरेज्ड पोजिशन मौजूद हैं। हालांकि, लंबे समय में चांदी की डिमांड और महंगाई जैसे फैक्टर इसे सपोर्ट दे सकते हैं। लेकिन शॉर्ट टर्म में बाजार का मूड ‘सावधानी और जोखिम कम करने’ का है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN