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अब खत्म होगा LPG संकट? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने देशों की टीम बना रहे ट्रंप, एक ने किया मना

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज भेजने का आग्रह किया था। साथ ही कहा था कि अमेरिका तटरेखा पर बमबारी जारी रखेगा और ईरानी पोतों एवं नौकाओं को निशाना बनाएगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए अमेरिका एक टीम तैयार करता नजर आ रहा है। खबर है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही इसे लेकर एक वैश्विक गठबंधन का ऐलान करने वाले हैं, जिसमें शामिल देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों को निकालने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे। हालांकि, अब तक किसी भी देश ने अमेरिका के इस प्लान पर सहमति नहीं जताई है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने युद्धपोत भेजने से साफ इनकार कर दिया है।

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वॉल स्ट्रीट जनरल से अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत के हवाले से बताया जा रहा है कि वाइट हाउस इस गठबंधन का ऐलान इस सप्ताह कर सकता है। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि मिशन कब तक शुरू होगा। खास बात है कि ईरान ने सी माइन्स और छोटे जहाजों की मदद से समुद्री रास्ते को रोककर रखा है, जिसके चलते तेल बाजार पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है।

ट्रंप ने सोमवार को कहा, ‘…यह कुछ ऐसा है जिसकी हमें (अमेरिका को) जरूरत नहीं है, लेकिन इन देशों को है… वर्षों तक हमने इसकी रक्षा की और बेहतरीन काम किया। अब जबकि युद्ध खत्म हो गया है और सैन्य शक्ति के मामले में ईरान कमजोर पड़ चुका है… मुझे लगता है कि यह अच्छी बात है कि अब दूसरे देश यहां आएं। जैसा कि मैंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से कहा था—जो दो हफ्ते पहले अपने दो विमानवाहक पोतों को हॉर्मुज भेजने में हिचकिचा रहे थे। अगर वे पहले आते तो बेहतर होता। अब जबकि हमने उसे (खतरे को) लगभग खत्म कर दिया है, हम बहुत मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने (ब्रिटिश पीएम) कहा कि वे अपने पोत भेजना चाहते हैं, तो मैंने जवाब दिया कि मुझे वे युद्ध जीतने के बाद नहीं चाहिए, मुझे वे युद्ध शुरू होने से पहले चाहिए थे। अब हमें समर्थन मिले या न मिले, मैं इतना कह सकता हूं और मैंने उनसे भी कहा है: हम इसे याद रखेंगे।’

अमेरिका ने मांगी थी मदद

ट्रंप ने प्रभावित देशों से आग्रह किया था कि वे तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस संकरे समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए पोत भेजें। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज भेजने का आग्रह किया था। साथ ही कहा था कि अमेरिका तटरेखा पर बमबारी जारी रखेगा और ईरानी पोतों एवं नौकाओं को निशाना बनाएगा।

इस देश ने किया इनकार

ऑस्ट्रेलिया ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलवाने के लिए अपने पोत भेजने से इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की कैबिनेट की सदस्य कैथरीन किंग ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपना जहाज नहीं भेजेंगे। हम जानते हैं कि वह इलाका कितना अहम है, लेकिन न तो हमसे ऐसा करने के लिए कहा गया है और न ही हम इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका कुछ सहयोगियों और कुछ देशों ने इस अपील को लेकर टाल मटोल का रवैया अपनाया है। अब तक किसी भी देश ने खुलकर ट्रंप की अपील का समर्थन नहीं किया है।

क्यों जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। खास बात है कि 60 प्रतिशत कच्चा तेल भारत का होर्मुज मार्ग से आता है।

दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा LNG इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN