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₹1 के शेयर को खरीदने की लूट, 5 दिन में 21% चढ़ा शेयर, अब कंपनी को लेकर बड़ी खबर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

आरकॉम के शेयर कल सोमवार को फोकस में रह सकते हैं। कंपनी के शेयर शुक्रवार को 1.01 रुपये पर बंद हुए थे। इसमें 4 पर्सेंट से ज्यादा की तेजी थी। पिछले पांच दिन में यह शेयर 21 पर्सेंट तक चढ़ गया है।

Reliance Communications Share: टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने सुप्रीम कोर्ट में एक समीक्षा याचिका दायर की है। इसमें अदालत के 15 फरवरी के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि टेलीकॉम कंपनियों को दिया गया स्पेक्ट्रम कॉरपोरेट संपत्ति नहीं माना जा सकता और इसलिए इसे दिवालिया प्रक्रिया के तहत बेचा या पुनर्गठित नहीं किया जा सकता। इस मामले को लेकर अब एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है। बता दें कि आरकॉम के शेयर कल सोमवार को फोकस में रह सकते हैं। कंपनी के शेयर शुक्रवार को 1.01 रुपये पर बंद हुए थे। इसमें 4 पर्सेंट से ज्यादा की तेजी थी। पिछले पांच दिन में यह शेयर 21 पर्सेंट तक चढ़ गया है।

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क्या है डिटेल

आरकॉम के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल अनीश निरंजन नानावती ने 11 मार्च को दाखिल याचिका में कहा है कि अगर स्पेक्ट्रम को दिवालिया प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है तो टेलीकॉम सेक्टर में दिवालिया कानून को लागू करना लगभग असंभव हो जाएगा। उनका तर्क है कि सिर्फ टेलीकॉम ही नहीं, बल्कि खनन, जलविद्युत और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई ऐसे सेक्टर हैं जो सरकार से मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल के अधिकार पर आधारित होते हैं। ऐसे में यह फैसला पूरे क्रेडिट बाजार को प्रभावित कर सकता है।

याचिका में क्या कहा गया है

याचिका में कहा गया है कि कंपनी ने कभी भी स्पेक्ट्रम के प्राकृतिक संसाधन के रूप में मालिकाना हक का दावा नहीं किया। बल्कि उसने सिर्फ उस कानूनी अधिकार की बात की है जिसके तहत लाइसेंस अवधि के दौरान कंपनियां स्पेक्ट्रम का उपयोग कर सकती हैं और उससे व्यावसायिक लाभ कमा सकती हैं। टेलीकॉम कंपनियां अपने वित्तीय खातों में इस अधिकार को एक “इंटैन्जिबल एसेट” यानी अमूर्त संपत्ति के रूप में दिखाती रही हैं, जो कंपनी की वैल्यू का अहम हिस्सा होता है।

इस मामले में याचिका में यह भी कहा गया है कि दिवालिया प्रक्रिया कंपनी ने खुद शुरू नहीं की थी, बल्कि इसे एरिक्सन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसे एक ऑपरेशनल क्रेडिटर ने शुरू किया था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा जरूरी है। इसके अलावा याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि दूरसंचार विभाग यानी दूरसंचार विभाग (DoT) खुद ट्रिपार्टाइट एग्रीमेंट में स्पेक्ट्रम उपयोग के अधिकार को एक संपत्ति मानता रहा है। ऐसे में अब यह कहना कि यह दिवालिया प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता, विरोधाभासी है।

क्या है विवाद

यह विवाद उन मामलों से जुड़ा है जिनमें टेलीकॉम कंपनियां एयरसेल लिमिटेड, एयरसेल सेलुलर लिमिटेड और डिशनेट वायरलेस लिमिटेड 2018 में दिवालिया प्रक्रिया में चली गई थीं। इन कंपनियों पर लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के करीब 9,900 करोड़ रुपये बकाया थे। इन मामलों में बैंकों, जिनमें एसबीआई प्रमुख था, ने दलील दी थी कि स्पेक्ट्रम उपयोग का अधिकार एक संपत्ति की तरह है और इसे बेचकर बैंकों का कर्ज वसूला जा सकता है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच — जस्टिस PS नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर — ने अपने फैसले में कहा था कि स्पेक्ट्रम सरकार का प्राकृतिक संसाधन है और इसे कंपनियों की संपत्ति नहीं माना जा सकता। इस फैसले के बाद सरकार के लिए कंपनियों से स्पेक्ट्रम वापस लेने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन बैंकों को डर है कि इससे दिवालिया कंपनियों से कर्ज वसूलना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि अब इस फैसले की समीक्षा की मांग की जा रही है और आने वाले समय में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम काफी अहम माना जा रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN