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दुनियाभर में मौत की सजा देने के लिए इस्तेमाल होते थे ये खौफनाक तरीके, सुनकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Most Cruel Method Too Give Death Punishment: मौत की सजा देने के लिए फांसी का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन दुनियाभर के देशों में सदियों पुराने समय में बेहद खूंखार और भयानक तरीकों का इस्तेमाल कर मौत के घाट उतारा जाता था। जिन्हें जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

किसी के साथ कुछ गलत काम किया तो सजा में कई बार मौत भी होती है। भले ही आज के समय में मौत की सजा देना आसान ना हो लेकिन पुराने वक्त में छठी शताब्दी, पंद्रहवीं शताब्दी जैसे टाइम में राजा-महाराजा देश्द्रोह, गद्दारी और चोरी जैसे छोटे अपराध के लिए दंड में मौत की सजा सुना देते थे। ब्रिटानिका में लिखा है कि पूरी दुनिया में 15 ऐसे खौफनाक तरीके थे जिनसे लोगों को यातनाएं और मौत की सजा दी जाती थी। इन सजा के बारे में अगर आपने जाना तो हैरानी जरूर होगी।

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अपराइट जर्कर

वैसे तो फांसी के जरिए किसी को मौत के घाट उतारना सबसे धीमा और कम दर्दनाक तरीका होता है, मौत देने का। जो कि आज के समय में भारत जैसे कई देशों में इस्तेमाल होता है। लेकिन पुराने समय में जब दर्दनाक मौत देकर लोगों के दिलों मे खौफ बनाकर रखा जाता था तो फांसी के उलट अपराइट जर्कर नाम के तरीके का इस्तेमाल किया जाता था। जिसमे मौत देने वाले को किसी भारी वजन और पुली के सहारे तेजी से उछाला जाता था। जिससे कि गर्दन जल्दी टूट जाए और इंसान मर जाए।

ऊंचाई से फेंकना

ऊंचाई से गिरकर तो कोई भी मर जाएगा और अभी भी सुसाइड के लिए लोग बिल्डिंग या छत से छलांग लगा देते हैं। वहीं पुराने समय में भी मौत की सजा देने के लिए किसी ऊंची पहाड़ी या चट्टान से धक्का देकर मार दिया जाता था। ईरान में आज भी सरकारी रूप से मौत देने के लिए इसी सजा का इस्तेमाल होता है।

हाथी के पैरों से कुचलवाना

आपने कई बार सुना होगा कि पुराने समय के राजा-महाराजा पागल हाथी के पैर के नीचे कुचलवाकर मौत के घाट उतार देते थे। ये मौत की सजा उन देशों में थी जहां पर हाथियों की संख्या ज्यादा होती थी, जैसे साउथ और साउथईस्ट एशिया।

लिंग ची

लिंग ची चीन की बेहद दर्दनाक मौत देने की प्रक्रिया थी। लिंग ची का मतलब होता है धीरे-धीरे काटना या हजार कट लगाना। दोषी को एक खंभे से बांध दिया जाता था और धीरे-धीरे एक-एक करके उसकी स्किन और हाथ-पैर के टुकड़े निकाले जाते थे। और ये कट लगाने का सिलसिला तब तक चलता था जब तक कि दिल पर आखिरी कट या सिर कलम ना कर दिया जाए। इसका इस्तेमाल 10वीं सदी की शुरुआत में किया जाता था, और यह लगभग एक हजार साल तक चलता रहा। अच्छी बात यह है कि 1905 में इस पर बैन लगा दिया गया।

ब्लड ईगल

डेनमार्क, फिनलैंड, नॉर्वे जैसे नॉर्डिक देशों में ये ब्लड ईगल के जरिए मौत देने की कहानियां प्रचलित थीं और इनका सच्चाई से कितना वास्ता है इसकी जानकारी नही है। इसमे सजा पाए इंसान की पीठ पर कट लगाकर पसलियों तक तोड़ा जाता था और जख्मों पर नमक डालते थे।

कीलहॉलिंग

कीलहॉलिंग सजा आमतौर पर नाविकों को दी जाती थी। 16वीं सदी के आखिर में इस मौत का आइडिया डच नेवी ने दिया था। इसमे इंसान को बांधकर जहाज के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पानी के अंदर खसीटा जाता था। जिससे गुनहगार की मौत डूबने या अंदरूनी चोट से हो जाती थी। अगर इंसान बच गया तो नाव और जहाज के नीचे लगे कील से उन पर गहरे निशान बन जाते थे जो बचने पर जिंदगीभर रहते थे।

उबालना

सुनकर यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन मौत देने का ये तरीका ब्रिटानिका के मुताबिक पूर्वी एशिया से लेकर इंग्लैंड तक का एक आम तरीका था। सजा पाए व्यक्ति के कपड़े उतार दिए जाते थे और फिर उसे उबलते हुए लिक्विड, आमतौर पर पानी, तेल या टार से भरे एक बर्तन में डाल दिया जाता था। ये बहुत ही भयानक अनुभव होता था।

चूहों के जरिए मौत

मौत देने का ये तरीका फिल्म फास्ट एंड फ्यूरियस 2 और टीवी सीरीज गेम ऑफ थ्रोंस में भी दिखाया गया है। जिसमे किसी बीमार या भूखे चूहे को मौत देने वाले के नंगे बदन पर डाल दिया जाता है और चूहे को डालने से पहले किसी बाल्टी में रखते और बाल्टी को गर्म करते हैं। जिससे घबराकर चूहा बाहर इंसान के बदन पर कूदता है और उसके शरीर के मांस को चबाता है।

एक वैन जिसमे मौत की सजा दी जाती है

चीन में सजा देने के तरीके को आसान बनाया गया है। चीन में कई फांसी अब मोबाइल एग्जीक्यूशन यूनिट में दी जाती हैं, ये वैन ऐसी होती हैं जिनमें जहरीले इंजेक्शन के लिए जरूरी बांधने की चीजें और दवाएं होती हैं। ये वैन, जो आम पुलिस वैन जैसी दिखती हैं, लगभग दस सालों से सड़क पर रहती है और सजा देने का काम करती है।

इंसान को आग में जलाना

ग्रिड आयरन असल में एक ग्रिल था। लोगों को भूनने के लिए। जैसा कि कोई सोच सकता है, यह लोहे की जाली जैसा दिखता था, और इसे आग या जलते हुए कोयले पर रखा जाता था। कुछ लोगों को पहले तेल में भी डुबोया जाता था, ताकि वे ठीक से भून सकें।

ड्राइंग एंड क्वार्टरिंग

इसके बारे में इतिहास में कभी ना कभी जिक्र मिल जाता है। जब देशद्रोहियों को सजाने के लिए उन्हें घोड़े से बांधकर घसीटा जाता है और फिर फांसी दे दी जाती है। ड्राइंग एंड क्वाटरिंग सबसे भयानक सजाओं में से एक है। जिसे सबसे पहले इंग्लैंड में 13वीं सदी में दिया गया था। इस सजा को 1867 में खत्म कर दिया गया था।

पोएना कुलेई

ये मौत की सजा देने का काफी अजीब तरीका था। जिसमे किसी संबंधी की हत्या करने वाले इंसान को चमड़े की बोरी में कई जानवरों के साथ सिल दिया जाता था, इन जानवरों में कुत्ता, बंदर, सांप और मुर्गा होता था। फिर पूरे बैग को पानी में फेंक दिया जाता था। अगर जानवर हत्यारे को नहीं मारते थे, तो डूबने से जरूर मर जाते थे।

स्कैफिज्म

ग्रीक हिस्ट्री में इसके बारे में लिखा है। ये मौत देने का सबसे खूंखार और दर्दनाक तरीका था। जिसमे इंसान की धीमी मौत बेहद दर्द देती थी। ग्रीक लोगों ने इसे पर्शियन लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सजा बताया था। ये सच है या केवल मनगढंत इसमे आरोपी को दो नावों के बीच (या एक खोखले पेड़ के तने में) फंसा दिया जाता था और जबरदस्ती दूध और शहद पिलाया जाता था। दूध और शहद वाले खाने से आखिर में भयानक डायरिया हो जाता था, जो लकड़ी के घेरे के अंदर ही रहता था। बदकिस्मत सजा पाए व्यक्ति पर और दूध और शहद लगाया जाता था और उसे धूप में या शांत पानी के पास छोड़ दिया जाता था, जहां पर कीड़े सड़ांध और मिठास की ओर खिंचे चले आते थे। फिर वो इंसान कीड़ों के डंक या डिहाइड्रेशन से मर जाता था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN