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जिस ईरान ने वर्षों पाला, उसी को नसीहत देने लगा हमास, युद्ध के बीच में क्या कहा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर फिलिस्तीनी उग्रवादी संगठन हमास ने ईरान को खाड़ी देशों पर हमला न करने की नसीहत दी है। हालांकि, हमास ने तेहरान के आत्मरक्षा के अधिकार की वकालत करते हुए इजरायल और अमेरिका की निंदा की।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच हमास और ईरान के बीच पहली बार तनाव देखने को मिल रहा है। फिलिस्तीनी उग्रवादी संगठन हमास ने सार्वजनिक रूप से ईरान को नसीहत देते हुए कहा है कि वह खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों पर हमला न करे। विशेषज्ञों के मुताबिक 17 साल पुराने हमास और ईरान गठबंधन में यह पहली बार है, जब ईरान के किसी कदम पर हमास ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है।

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न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक हमास ने सार्वजनिक बयान जारी कर ईरान को पश्चिम एशिया के बाकी देशों पर हमला न करने के लिए कहा है। हालांकि, फिलिस्तीनी संगठन ने ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार की वकालत की है। हमास की तरफ से दिए गए इस बयान को अरबी मीडिया ने गहराई के साथ दिखाया है। गौरतलब है कि हमास की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और इजरायल के हमले का जवाब देते हुए ईरान कई खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है। इनमें कतर, यूएई, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं।

हमास ने ईरान को क्यों दी नसीहत

ईरान की इस्लामिक सत्ता पिछले दो दशक से लगातार हमास को समर्थन देती आ रही है। इसके पहले भी फिलिस्तीन के लिए कुद्स जैसे दिन मनाने वाले भी ईरान के पहले सुप्रीम लीडर ही थे। लेकिन परिस्थिति ऐसी है कि हमास को ईरान के सामने खड़ा होना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, हमास की इस अपील और नसीहत की सबसे बड़ी वजह खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाली उसकी वित्तीय और कूटनीतिक मदद को लेकर है। ऐसा माना जाता रहा है कि यूएई से जुड़े नेटवर्कों के माध्यम से हमास को काफी मदद मिलती है, यह मदद बड़े स्तर पर हमास और गाजा पट्टी की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखती है।

ऐसे में खुफिया सूत्रों का कहना है कि विशेष रूप से दुबई के आसपास अमीराती ठिकानों पर ईरानी मिसाइल हमले इन चैनलों को बाधित कर सकते हैं और गाजा की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाली आख़िरी काम कर रही वित्तीय पाइपलाइन में से एक को खतरे में डाल सकते हैं। इसके अलावा हमास के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि ईरान के अलावा उसे बाकी खाड़ी देशों से भी भरपूर समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में अगर वह केवल ईरान के साथ जाकर खड़ा हो जाता है, तो डर है कि कई खाड़ी देश उससे समर्थन न खींच लें।

कतर पर हमला

हमास की राजनैतिक शाखा कतर से ही काम करती है। हमास को डर है कि अगर ईरानी हमलों से कतर नाराज हो गया, तो फिर उसके लिए स्थिति मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि वह कतर ही है, जो इजरायल के अलावा तमाम देशों के साथ हमास की सीधी बातचीत का माध्यम बनता है।

दो दशकों के ईरान-हमास संबंध में यह पहली बार है, जब हमास सार्वजनिक रूप से ईरान के किसी कदम की आलोचना करता हुआ नजर आया है। ईरान पिछले दो दशकों से हमास को धन, हथियार और प्रशिक्षण प्रदान करता रहा है, जो क्षेत्र में उसके सहयोगी संगठनों के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है।हालाँकि खुफिया सूत्रों का कहना है कि यह नई अपील दिखाती है कि हमास ईरान के बढ़ते क्षेत्रीय टकराव से खुद को कुछ दूरी पर रखने की कोशिश कर रहा है। संगठन को डर है कि तेहरान की सैन्य रणनीति उसके उन राजनीतिक और वित्तीय समर्थन तंत्रों को खतरे में डाल सकती है जिन पर वह निर्भर करता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN