Source :- LIVE HINDUSTAN
सरकारी स्वामित्व वाले आईडीबीआई बैंक की बिक्री प्रक्रिया अधर में लटक सकती है। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में एलआईसी के साथ मिलकर आईडीबीआई बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचकर इसके निजीकरण के लिए अभिरुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किए थे।
सरकारी स्वामित्व वाले आईडीबीआई बैंक की बिक्री प्रक्रिया अधर में लटक सकती है। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट में यह कहा जा रहा है कि बैंक में मेजर स्टेक के लिए प्राप्त बोलियों को रद्द किया जा सकता है। ये बोलियां डील के लिए निर्धारित रिजर्व प्राइस से कम हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि हिस्सेदारी बिक्री के लिए निर्धारित रिजर्व प्राइस बहुत अधिक माना गया था और यह बैंक के प्राइस-टू-बुक रेश्यो के अनुरूप नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि शेयर में अपेक्षाकृत कम फ्री फ्लोट ने भी शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव को प्रभावित किया है, जिससे विनिवेश के लिए उपयोग किए जाने वाले वैल्युएशन मानदंड में दिक्कत आ गई है। सरकार ने अभी तक इस घटनाक्रम की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।
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तीन साल तक अटकी रही प्रक्रिया
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से लटकी हुई है। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के साथ मिलकर आईडीबीआई बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचकर इसके निजीकरण के लिए अभिरुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किए थे। इसमें केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। इसके बाद विभाग ने जनवरी, 2023 में कहा था कि उसे आईडीबीआई बैंक के लिए कई ईओआई मिले हैं। आईडीबीआई बैंक के संभावित खरीदार को गृह मंत्रालय की तरफ से पहले ही सुरक्षा मंजूरी दी जा चुकी है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी मंजूरी दे दी है। कोटक महिंद्रा बैंक के प्रक्रिया से बाहर होने के बाद फेयरफैक्स फाइनेंशियल और एमिरेट्स एनबीडी शेष दावेदार थे। एमिरेट्स एनबीडी पहले से ही आरबीएल बैंक में हिस्सेदारी हासिल करने के सौदे की प्रक्रिया में है।
बैंक की वित्तीय सेहत
आईडीबीआई बैंक का दिसंबर 2025 को समाप्त चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही का मुनाफा लगभग स्थिर रहा। बैंक ने इस दौरान 1,935 करोड़ रुपये का मुनाफा अर्जित किया है और पिछले साल की समान अवधि में 1,908 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। तिमाही में बैंक की कुल आय घटकर 8,282 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 8,565 करोड़ रुपये थी। वहीं, बैंक की ब्याज आय भी पिछले साल के 7,816 करोड़ रुपये से कम होकर 7,074 करोड़ रुपये पर आ गई।
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। अवधि के दौरान बैंक का एनपीए अनुपात सुधरकर 2.57 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 3.57 प्रतिशत था। हालांकि, शुद्ध एनपीए 0.18 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रहा। बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात दिसंबर 2024 के 21.98 प्रतिशत से सुधरकर 24.63 प्रतिशत हो गया है।
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