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युद्ध से खेती पर भी संकट: भारत ने चीन से यूरिया के लिए मांगी मदद

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Source :- LIVE HINDUSTAN

War Impacts: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण भारत की गैस सप्लाई पर संकट गहरा गया है, जिससे फर्टिलाइजर के उत्पादन पर खतरा मंडराने लगा है। इससे निपटने के लिए भारत ने चीन से यूरिया के कुछ कार्गो की बिक्री की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण भारत की गैस सप्लाई पर संकट गहरा गया है, जिससे फर्टिलाइजर के उत्पादन पर खतरा मंडराने लगा है। इससे निपटने के लिए भारत ने चीन से यूरिया के कुछ कार्गो (खेप) की बिक्री की अनुमति देने का अनुरोध किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फैलते संघर्ष ने प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई को बाधित कर दिया है। यह गैस उर्वरक बनाने का मुख्य कच्चा माल है, जिसके चलते भारत की कुछ उर्वरक कंपनियों को अपने प्लांट्स करने पड़ रहे हैं। भारतीय अधिकारियों ने चीनी अधिकारियों से निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार करने का आग्रह किया है।

यूरिया की कीमतों में 21% की उछाल

यह घटनाक्रम उन असामान्य कदमों को दिखाता है, जो देश प्रमुख वस्तुओं की सुरक्षा के लिए उठा रहे हैं। अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों ने ग्लोबल ट्रेड को प्रभावित किया है और खाद्य व ऊर्जा सप्लाई के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। युद्ध के पहले सप्ताह में ही वैश्विक यूरिया की कीमतों में 21% की उछाल आई, जो तीन वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

चीन की निर्यात नीति

चीन कोटा प्रणाली के तहत यूरिया निर्यात को नियंत्रित करता है। पिछले वर्ष भारत सहित कुछ देशों को शिपमेंट की अनुमति दी गई थी, लेकिन 2026 के लिए अभी तक निर्यात कोटा आवंटित नहीं किया गया है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया उत्पादक है, और वहां किसान वसंत ऋतु में बुआई के चरम समय के लिए तैयारी कर रहे हैं।

भारत की स्थिति और रणनीति

भारत का यह अनुरोध ऐसे समय में आया है, जब उसने सीमावर्ती देशों के लिए निवेश नियमों में ढील दी है, जिसका उद्देश्य स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है। यह कदम बड़े पड़ोसी और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ आर्थिक संबंधों में सुधार का संकेत हो सकता है।

हालांकि, फिलहाल भारत में उर्वरक की कोई तत्काल कमी नहीं है, लेकिन कोई भी लंबा गैस संकट जून में मानसून की बारिश के साथ शुरू होने वाली मुख्य बुआई अवधि से पहले देश को अधिक सप्लाई की तलाश करने के लिए मजबूर कर सकता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है और चावल का सबसे बड़ा उत्पादक व निर्यातक भी है।

विकल्प और भविष्य की योजना

ब्लूमबर्ग के सूत्रों के अनुसार, मध्य पूर्व से कमी को पूरा करने के लिए यूरिया के संभावित स्रोतों में चीन, रूस, इंडोनेशिया, मलेशिया और मिस्र शामिल हैं। भारत के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक 9.8 मिलियन टन यूरिया का आयात हुआ है। उम्मीद है कि इस महीने के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक भारत एक नई यूरिया आयात निविदा जारी करेगा। इससे पहले, कतर ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद भारतीय खरीदारों के लिए ईंधन शिपमेंट में कटौती की थी, जिससे उर्वरक उत्पादन पर दबाव बढ़ा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN