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ईरानी स्कूल पर हमले के पीछे अमेरिका का हाथ, कैसे एक गलती ने खोद दीं 168 मासूमों की कब्रें

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के मीनाब में स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले में 175 मौतें। जानिए कैसे AI (Claude) की चूक और पुराने सैन्य डेटा ने ली मासूमों की जान और क्या है इस पर ट्रंप का बयान।

अमेरिकी सेना की एक जांच में यह बात सामने आई है कि ईरान के मीनाब शहर के एक स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले के लिए खुद अमेरिका जिम्मेदार है। इस हमले में लगभग 175 लोगों की मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह भीषण त्रासदी संभवतः अमेरिकी सेना द्वारा लक्ष्य निर्धारित करने में हुई एक भारी चूक का नतीजा थी।

अमेरिकी सैन्य जांच की एक प्रारंभिक रिपोर्ट और अधिकारियों के अनुसार, पुरानी खुफिया जानकारी के आधार पर अमेरिका ने जंग के शुरुआती घंटों में ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय पर घातक मिसाइल हमला किया। इस दर्दनाक हमले में 175 से अधिक लोगों की जान चली गई, जिनमें से 168 मासूम बच्चे थे। अगर यह आधिकारिक तौर पर पुष्ट हो जाता है कि यह हमला अमेरिका ने किया था, तो यह पिछले दो दशकों के अमेरिकी सैन्य अभियानों में नागरिकों की मौत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होगा।

कैसे हुई इतनी बड़ी त्रासदी

जांच में पाया गया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अधिकारियों ने रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) द्वारा दिए गए पुराने डेटा का इस्तेमाल करके हमले के लिए टार्गेट के कॉर्डिनेट (निर्देशांक) तैयार किए थे। टॉमहॉक मिसाइल का असली लक्ष्य ‘शजरा तैयबा’ प्राथमिक विद्यालय की इमारत से सटा हुआ एक ईरानी सैन्य बेस था। स्कूल की इमारत पहले उसी सैन्य बेस का एक हिस्सा हुआ करती थी।

यह हमला शनिवार की सुबह हुआ, जो ईरान में स्कूल के सप्ताह का पहला दिन होता है और उस समय स्कूल बच्चों से भरा हुआ था। एपी के विश्लेषण से पता चलता है कि यह स्कूल (शजरेह तैयबेह एलीमेंट्री स्कूल) 2017 तक एक सैन्य परिसर का हिस्सा था। लेकिन इसके बाद एक दीवार बनाकर इसे अलग कर दिया गया था और एक वॉचटावर भी हटा दिया गया था। स्कूल की दीवारों को चमकीले नीले और गुलाबी रंगों से रंगा गया था, जो अंतरिक्ष (सैटेलाइट) से भी स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन मैप्स में इसे साफ तौर पर ‘स्कूल’ बताया गया था और इसकी अपनी एक वेबसाइट भी है।

अमेरिकी सैन्य अधिकारी फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं और उनका कहना है कि ये निष्कर्ष अभी केवल प्रारंभिक हैं। सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि इस पुराने डेटा को हमले से पहले दोबारा चेक क्यों नहीं किया गया।

क्या AI सिस्टम से हुई यह जानलेवा गलती?

ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बहुत अधिक निर्भर है। तकनीक की मदद से अमेरिका ने केवल 24 घंटों के भीतर ईरान में 1000 ठिकानों को निशाना बनाया है। इस हमले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या किसी एडवांस AI सिस्टम की गलती से यह हादसा हुआ।

पलंटिर और क्लॉड का इस्तेमाल

द वाशिंगटन पोस्ट और द गार्जियन की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना वॉर-टेक कंपनी पलंटिर के ‘मेवेन स्मार्ट सिस्टम’ का इस्तेमाल करती है। इस सिस्टम में एंथ्रोपिक के एआई मॉडल ‘क्लॉड’ का इस्तेमाल किया गया है, जो सेना को रियल-टाइम और सटीक लोकेशन प्रदान करता है। प्रारंभिक जांच को ध्यान में रखते हुए, यह अंदेशा जताया जा रहा है कि एआई टूल स्कूल की लोकेशन में हुए बदलाव को अपने सिस्टम में अपडेट करने में विफल रहा, जिसके कारण यह चूक हुई।

अमेरिकी रुख क्या है?

अमेरिका नागरिक ठिकानों पर हमला न करने की अपनी नीति पर कायम है और मामले की जांच कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अलग ही दावा करते हुए आरोप लगाया है कि ईरान ने खुद ही स्कूल पर बमबारी की है क्योंकि वे अपने हथियारों के इस्तेमाल में बहुत ही गैर-सटीक हैं। हालांकि ट्रंप ने बाद में कहा कि वह निश्चित नहीं हैं कि गलती किसकी है, लेकिन वह पेंटागन की जांच के नतीजों को स्वीकार करेंगे।

45 से अधिक डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को पत्र लिखकर इस हमले की जिम्मेदारी और पूर्व में किए गए विश्लेषण पर तीखे सवाल किए हैं। रिपब्लिकन सीनेटर केविन क्रैमर ने भी गहरी जांच की मांग करते हुए कहा कि गलती स्वीकार की जानी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। सीनेटर टिम केन ने टिप्पणी की- या तो हमने अपने पारंपरिक लक्ष्यीकरण नियम बदल दिए हैं या हमसे कोई बहुत बड़ी गलती हुई है।

ईरान का पलटवार

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने एक्स पर हमले का वीडियो फुटेज शेयर करते हुए अमेरिका पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा- 28 फरवरी 2026 को मीनाब शहर में 168 मासूम ईरानी बच्चों की जान लेने वाली डबल-टैप अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल… यह एक अक्षम्य और जघन्य युद्ध अपराध है जिसे बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कुछ छोटी सामूहिक कब्रों के ड्रोन शॉट्स साझा करते हुए ट्रंप पर निशाना साधा और लिखा- मिस्टर ट्रंप ने जिस ‘बचाव’ का वादा किया था, वह हकीकत में ऐसा दिखता है। ईरान की राजधानी तेहरान की ओर से इस कृत्य को बर्बर और आक्रमणकारियों द्वारा किए गए अनगिनत अपराधों के रिकॉर्ड में एक और काला पन्ना करार दिया गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN