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इस कार कंपनी के प्रॉफिट में आई बड़ी गिरावट, अब 50000 लोगों की नौकरी जाएगी; EV बिजनेस पर भी संकट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूएस-इजराइल-ईरान युद्ध का असर दुनियाभर का बाजारों में दिखाई दे रहा है। साथ ही, कई देशों को यूएस टैरिफ का सामना भी करना पड़ा रहा है। अब, ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी कंपनियों में शामिल फॉक्सवैगन ने बताया कि वो 2030 तक जर्मनी में 50,000 नौकरियां कम करेगी। 

यूएस-इजराइल-ईरान युद्ध का असर दुनियाभर का बाजारों में दिखाई दे रहा है। साथ ही, कई देशों को यूएस टैरिफ का सामना भी करना पड़ा रहा है। अब, ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी कंपनियों में शामिल फॉक्सवैगन ने बताया कि वो 2030 तक जर्मनी में 50,000 नौकरियां कम करेगी। इसके पीछे की वजह उसका प्रॉफिट लगभग एक दशक में सबसे कम हो गया है। यह फैसला ऐसे वक्त में आ रहा है जब 10-ब्रांड वाला यह ग्रुप चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वालों से बढ़ते कॉम्पिटिशन, बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट और यूएस टैरिफ के असर से जूझ रहा है। इन सभी ने मिलकर कंपनी की कमाई पर असर डाला है।

पसंदीदा मॉडल्स पर सीमित समय की शानदार डील

फर्म की सालाना रिपोर्ट में शेयरहोल्डर्स को लिखे एक लेटर में फॉक्सवैगन के CEO ओलिवर ब्लूम ने कहा, “जर्मनी में फॉक्सवैगन ग्रुप 2030 तक कुल मिलाकर लगभग 50,000 नौकरियां कर करेगी।”

ऑडी और पोर्श के कर्मचारियों पर भी असर
न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप ने 2024 के आखिर में यूनियनों के साथ एक डील की थी कि वह 2030 तक अपने कोर ब्रांड में 35,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देगा, जो सालाना 15 बिलियन यूरो बचाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। CEO ब्लूम ने कहा कि ये और कटौती सिर्फ कोर फॉक्सवैगन ब्रांड तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इससे इसके प्रीमियम ब्रांड ऑडी और पोर्श के वर्कर्स के साथ-साथ ग्रुप की सॉफ्टवेयर सब्सिडियरी कैरियड पर भी असर पड़ेगा।

लोकल कॉम्पटीटर्स से मिल रही चुनौती
यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के एडमिनिस्ट्रेशन के 2025 में नॉन-अमेरिकन कार बनाने वाली कंपनियों पर टैरिफ लगाने से पहले ही, फॉक्सवैगन यूरोप में धीमी डिमांड, कम डिमांड के बावजूद EVs में इन्वेस्ट करने की ज्यादा लागत और चीन में सेल्स में तेजी से गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही थी। जर्मनी में हेडक्वार्टर वाली फॉक्सवैगन लंबे समय से दुनिया के सबसे बड़े ऑटो मार्केट, चीन में एक बड़ी कंपनी रही है। हालांकि, कार बनाने वाली कंपनी को अब लोकल कॉम्पिटिटर्स से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। इसकी सेल्स BYD और गीली (Geely) जैसे दूसरे ब्रांड्स से पीछे रह गई है।

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लूम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीनी कार ब्रांड्स जो अपने देश में चल रही जबरदस्त प्राइस वॉर से बाहर निकलने के लिए यूरोपियन मार्केट का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं, इससे फॉक्सवैगन पर दबाव और बढ़ेगा। उन्होंने कहा, “हमें इस बात के लिए खुद को तैयार करने की जरूरत है कि हम यहां प्राइस प्रेशर में आएंगे। यह हमारे लिए कॉस्ट साइड पर तेजी से काम करने का एक बड़ा इंसेंटिव है।”

कंपनी का रेवेन्यू भी तेजी से घट रहा
फॉक्सवैगन ने 2025 के लिए 8.9 बिलियन यूरो ($10.4 बिलियन) का ऑपरेटिंग प्रॉफिट बताया, जो पिछले साल से 53% ज्यादा है। LSEG कंसेंसस डेटा के मुताबिक, यह आंकड़ा एनालिस्ट्स की 9.4 बिलियन यूरो की उम्मीदों से भी कम रहा। कार बनाने वाली कंपनी का पूरे साल का रेवेन्यू लगभग 322 बिलियन यूरो रहा, जबकि 2024 में यह 324.7 बिलियन यूरो था और 2026 में कंपनी की सेल्स ग्रोथ का अनुमान काफी कम है। फॉक्सवैगन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि इस साल रेवेन्यू 0% से 3% के बीच रहेगा, जो एनालिस्ट्स की उम्मीदों से कम है।

CNBC के मुताबिक, फॉक्सवैगन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर अर्नो एंटलिट्ज़ ने 2025 को बहुत मुश्किल साल बताया, लेकिन इन्वेस्टर्स को भरोसा दिलाया कि कंपनी यूरोप में अच्छी स्थिति में बनी हुई है। मंगलवार सुबह फॉक्सवैगन के शेयर लगभग 4% बढ़ गए। इस साल अब तक स्टॉक में 15% से ज्यादा की गिरावट आई है। इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनो में यूएस-इजराइल-ईरान युद्ध के असर के चलते कई कंपनियों के रेवेन्यू पर असर होगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN