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धुएं का ग़ुबार, ख़ून से सने बस्ते और चीख़ते लोग: ईरान में स्कूल हमले के बारे में वीडियो और सैटेलाइट इमेज क्या बताते हैं?

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Source :- BBC INDIA

ग़मगीन दो महिलाएं

इमेज स्रोत, Reuters

चेतावनी: इस कहानी के विवरण कुछ पाठकों को विचलित कर सकते हैं

सैटेलाइट इमेज में दक्षिणी तेहरान के एक स्कूल के आस-पास कई हमले और जलने के निशान दिख रहे हैं, जिससे पता चलता है कि उस जगह पर एक से ज़्यादा बार हमला हुआ था.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि शनिवार को हुए हमले में 168 लोग मारे गए थे.

वीडियो और सैटेलाइट इमेज में मिनाब में शजराह तैयबा प्राइमरी स्कूल और पास के ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) कंपाउंड के आस-पास बहुत ज़्यादा नुक़सान दिख रहा है.

हथियार सामग्री विश्लेषक एनआर जेनसेन जोन्स का कहना है कि सबूत बताते हैं कि उस इलाक़े पर “कई बार या तो एक साथ या एक के बाद एक हमला हुआ.”

तस्वीरों में साफ़ तौर पर दो तबाह इमारतों पर असर दिख रहा है, जिनमें से एक आईआरजीसी कंपाउंड है, जो पूरी तरह से तबाह हो गया है, जबकि दूसरी एक स्कूल बिल्डिंग है जो थोड़ी तबाह हो गई है.

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हमले के तुरंत बाद के वेरिफ़ाइड फ़ुटेज में, लोगों को घबराकर चिल्लाते हुए और मलबे के नीचे पीड़ितों को ढूंढते हुए देखा जा सकता है. कुछ वीडियो में लोगों को बच्चों के बैग और किताबें ले जाते हुए देखा जा सकता है.

तीन दिन बाद सामने आए एक हवाई दृश्य में कम से कम 100 क़ब्रों की रेखाएं दिख रही हैं, जिन पर या तो निशान लगा हुआ है या नई खोदी गई हैं.

ईरानी अधिकारियों ने हमले के लिए अमेरिका और इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया, लेकिन किसी भी देश ने इसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

इसराइल का कहना है कि उसे इस इलाके़ में किसी भी ऑपरेशन के बारे में पता नहीं है, जबकि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि अमेरिका “कभी भी आम लोगों को टारगेट नहीं करता” और कहा कि वॉशिंगटन इस घटना की जांच कर रहा है.

ईरान में चल रहे इंटरनेट ब्लैकआउट की वजह से भी इस घटना की डिटेल्स को ख़ुद से वेरिफ़ाई करना मुश्किल हो गया है.

घटना के बारे में हमें क्या पता है?

ईरान में हमले के असली टारगेट को लेकर बहुत ज़्यादा कयास लगाए जा रहे हैं.

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़, हमला स्थानीय समयानुसार शनिवार सुबह 10:45 बजे हुआ.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई फ़ुटेज की पुष्टि की है जिसमें हमले के तुरंत बाद का नज़ारा दिखाया गया है.

एक वीडियो में एक आदमी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) कंपाउंड के उत्तर-पूर्व में मौजूद स्कूल के मैदान में घुसते हुए ख़ुद को रिकॉर्ड करता हुआ दिख रहा है.

वीडियो में प्रवेश द्वार के ऊपर एक बोर्ड का हिस्सा दिख रहा है, जिस पर फ़ारसी में ‘प्राइमरी स्कूल’ शब्द के पहले तीन अक्षर साफ़-साफ़ दिख रहे हैं.

स्कूल के मैदान से चार जगहों पर काले धुएं का ग़ुबार उठते हुए देखा जा सकते है. इनमें से दो जगह पर काफ़ी कम धुआं निकल रहा है. मुख्य स्कूल बिल्डिंग की ऊपरी मंज़िल की खिड़कियों से भी धुआं निकलता दिखाई दे रहा है.

स्कूल की दीवारों पर बच्चों की तस्वीरें और फ़ारसी वर्णमाला में लिखे शब्दों से सजावट की गई है. ये बिल्डिंग को आईआरजीसी कंपाउंड से अलग करता है.

एक चलती गाड़ी से शूट किए गए एक अन्य वीडियो में आईआरजीसी कंपाउंड का दक्षिणी कोना साफ़-साफ़ दिख रहा है और प्रवेश द्वार पर एक साइन भी दिख रहा है.

वीडियो में प्रवेश द्वार पर दो साफ़ लोगो दिख रहे हैं: ‘सैय्यद अल-शोहादा एजुकेशनल एंड कल्चरल कोर’ और एक मेडिकल क्लिनिक. ईरानी मीडिया के मुताबिक, ये आईआरजीसी नेवी से जुड़े हैं.

फ़ुटेज में काले धुएं के कम से कम तीन पिलर दिख रहे हैं. दो प्रवेश द्वार के पास हैं और तीसरा मेडिकल क्लिनिक से कुछ दूरी पर हैं.

वेरिफ़ाइड वीडियो में धुएं का ग़ुबार उसी जगह से उठ रहा है जहां सैटेलाइट इमेज में साफ़ और गंभीर नुक़सान दिख रहा है.

सैटेलाइट इमेज का विश्लेषण

दिन में बाद में ली गई फ़ुटेज में स्कूल की बिल्डिंग खंडहर में साफ़ दिख रही है. रेस्क्यू टीमें मलबे में रेस्क्यू ऑपरेशन में व्यस्त हैं, जबकि परेशान परिवार आंगन में धीरे-धीरे आगे बढ़ते दिख रहे हैं, उनमें से कुछ रो रहे हैं.

एक बहुत ज़्यादा शेयर किए गए वीडियो में रेस्क्यू टीम मौके पर एक बच्चे का कटा हुआ हाथ मलबे के नीचे से निकालते हुए दिख रही है. स्कूल की किताबें और ख़ून से सने स्कूल बैग भी वीडियो का हिस्सा हैं.

सैटेलाइट इमेज क्या दिखाती हैं?

सैटेलाइट इमेज घटनाओं को समझने के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि घटनास्थल से और फ़ुटेज या चश्मदीदों तक पहुँच की कमी है.

घटना के चार दिन बाद, 4 मार्च को प्लेनेट लैब्स की ली गई सैटेलाइट इमेज, वीडियो में पहले बताई गई तबाही से कहीं ज़्यादा तबाही दिखाती है.

इलाके़ की कई इमारतें थोड़ी या पूरी तरह से तबाह हो गई हैं, और बीबीसी वेरिफ़ाई ने कम से कम पाँच इमारतों की पहचान की है जिन पर जलने के साफ़ काले निशान हैं.

ये सभी निशान वहाँ दोबारा हमलों की संभावना को और पक्का करते हैं.

सैटेलाइट इमेज का विश्लेषण

ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के सैटेलाइट इमेज एक्सपर्ट जेमन वैन डेन होक ने बीबीसी को बताया, “हमले की जगहों के पास होने से पता चलता है कि एक या एक से अधिक टारगेट एक-दूसरे के बहुत पास थे.”

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि उस इलाक़े को जानबूझकर टारगेट किया गया था, लेकिन यह साफ़ नहीं है कि वे क्या हिट करने की कोशिश कर रहे थे.”

मैकेंज़ी इंटेलिजेंस सर्विसेज़ के एक सीनियर एनालिस्ट ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया कि दो मंज़िला स्कूल बिल्डिंग के निचले फ़्लोर में बने गड्ढे से पता चलता है कि शायद एक ख़ास तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया था जो “बिल्डिंग के निचले स्तर तक पहुँच सकता था.”

क्या स्कूल आईआरजीसी के बेस से अलग था?

स्कूल की बिल्डिंग रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के एक कंपाउंड के पास है.

2013 की सैटेलाइट इमेज में स्कूल बिल्डिंग कंपाउंड का हिस्सा दिखती है, जबकि 2016 की इमेज में एक दीवार इसे आईआरजीसी से अलग करती हुई दिखती है.

सैटेलाइट इमेज की टाइमलाइन

हमले के लिए कौन ज़िम्मेदार?

ईरान ने कहा है कि अमेरिका और इसराइल ने हमला किया है, लेकिन न तो इसराइल और न ही अमेरिका ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है.

इसराइल ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया कि उसे इलाक़े में किसी भी इसराइली मिलिट्री ऑपरेशन का “पता नहीं” है, लेकिन वह घटना की जांच कर रहा है.

बुधवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बीबीसी को बताया कि अमेरिका अभी भी घटना की जांच कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि “हम कभी भी आम लोगों को टारगेट नहीं करते.”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक डिटेल्ड मैप पेश किया गया, जिसमें ईरान के साथ युद्ध के “पहले 100 घंटों के बारे में” बताया गया था.

मैप में ईरानी एयर डिफ़ेंस और मिनाब इलाके़ सहित दक्षिणी तट पर हमलों की जगहें दिखाई गई थीं.

अमेरिका के रक्षा मंत्रालय की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट जिसमें जंग के 'पहले 100 घंटों' के निशानों के बारे में बताया गया है

गोला-बारूद और हथियार की ज़्यादा फ़ुटेज के बिना, यह पक्के तौर पर कहना नामुमकिन है कि हमले के लिए कौन ज़िम्मेदार था.

सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा शेयर की गई एक तस्वीर में दावा किया गया कि धमाका रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की एक फ़ेल मिसाइल की वजह से हुआ था.

हालांकि, बाद में इस तस्वीर को मिनाब से 1,000 किलोमीटर से ज़्यादा दूर ज़ांजन में हुई एक घटना से जोड़ा गया.

आर्मामेंट रिसर्च सर्विसेज़ के डायरेक्टर जेनज़ेन जोन्स कहते हैं, “यहां दिख रहा बड़ा धमाका ज़मीन से हवा में मार करने वाली ईरानी मिसाइल की वजह से होने की उम्मीद कम है क्योंकि इसमें तुलनात्मक रूप से छोटे विस्फोटक वॉरहेड होते हैं.”

मारे जाने वाले कौन थे?

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस घटना में मारे गए 168 लोगों में से ज़्यादातर बच्चे थे, लेकिन बीबीसी वेरिफ़ाई की टीम, उपलब्ध फ़ुटेज से इसे ख़ुद से वेरिफ़ाई नहीं कर पाई है.

यह भी साफ़ नहीं है कि हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कोई सदस्य मारा गया था या उस समय कौन मौजूद था.

ईरान के शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक़, स्कूल में कुल 264 छात्र थे.

ईरानी मीडिया में छपी एक हाथ से लिखी लिस्ट में मरने वालों में से 56 के नाम और जन्म की तारीख़ें लिखी हैं.

इनमें से 48 की उम्र छह से 11 साल के बीच थी.

बीबीसी वेरिफ़ाई इन डिटेल्स को ख़ुद से वेरिफ़ाई नहीं कर पाया है, लेकिन कम से कम तीन नाम एक दूसरे वीडियो में भी दिख रहे हैं जिसमें इन नामों वाले ताबूत दिखाए गए हैं.

तस्वीरों में तीन बच्चों की लाशें बैग में रखी हुई दिख रही हैं.

ताबूत के साथ खड़ी भारी भीड़

इमेज स्रोत, Reuters

अमेरिका की ह्यूमन राइट्स न्यूज़ एजेंसी (एचआरएएनए) के मुताबिक़, जंग शुरू होने के बाद से अब तक 1114 ईरानी आम लोग मारे गए हैं, जिनमें 183 बच्चे भी शामिल हैं.

हमले के कुछ दिनों बाद, ईरान की सरकारी मीडिया ने एक जनाज़े के जुलूस का फ़ुटेज दिखाया, जिसमें हज़ारों लोग सड़कों पर खड़े दिख रहे थे.

फ़ुटेज में कुछ ताबूत ईरानी झंडों से लिपटे हुए दिख रहे थे, जो बच्चों के साइज़ के थे, जबकि जनाज़े में मौजूद महिलाओं ने लड़के और लड़कियों की तस्वीरें पकड़ी हुई थीं.

ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने एक फ़ोटो पब्लिश की और कहा कि हमले में 14 स्कूल टीचर भी मारे गए.

पॉल ब्राउन की अतिरिक्त रिपोर्टिंग

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS