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रूसी तेल खरीद के लिए US ने दी 30 दिन की छूट, भारत को है इजाजत की जरूरत? विशेषज्ञ क्या बोले

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति में खलल पड़ गया है। पहले रूसी तेल खरीदने की बात पर भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने वाले अमेरिका ने अब भारत को तथाकथित अनुमति दे दी है। इस पर भारतीय राजनीति लगातार उबल रही है।

अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला करके वैश्विक राजनीति के परिदृश्य को बदल दिया है। पिछले एक साल से, जो अमेरिका भारत को रूसी तेल खरीद को बंद करने के लिए कह रहा था और इस चक्कर में उसने नई दिल्ली पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दिया था। वही अमेरिका अब भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए कह रहा है। हालांकि, अमेरिका की तरफ से यह बयान इस तरीके से आया है कि भारत में कई लोग इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि आखिर अमेरिका कौन होता है, जो भारत जैसे एक संप्रभु देश को रूसी तेल खरीदने के लिए अनुमति हो रहा है। और क्या भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिकी अनुमति की जरूरत है?

इस सवाल का जवाब विदेशी मामलों के जानकार डॉ अनस एल हज्जी ने हिंदुस्तान के साथ किए पॉडकास्ट में दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच पैदा हुई यह स्थिति दो मायनों में ‘बहुत दुखद स्थिति’ को दर्शाती है। पहला सवाल तो यही है कि भारत जैसे देश को आखिर रूसी तेल खरीदने के लिए डोनाल्ड ट्रंप की अनुमति की जरूरत क्यों पड़ती है? दूसरा यह कि अमेरिका द्वारा 30 दिनों की बात करना इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया में जारी जंग अभी लंबी चलने वाली है। यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर गहरी अनिश्चितता को भी उजागर करता है।

संघर्ष लंबा चलने की संभावना

डॉ हज्जी ने कहा, “अमेरिका का कहना है कि यह युद्ध जल्दी ही खत्म हो जाएगा। हमें बताया गया है कि ईरानी नौसेना नष्ट हो चुकी है और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति जल्दी ही सामान्य हो जाएगी। लेकिन अगर ऐसा है तो फिर अमेरिका भारत पर इतना मेहरबान क्यों हो रहा है। यह वही, अमेरिका है, जो कुछ दिन पहले तक रूसी तेल की वजह से ही भारत पर टैरिफ लगाए हुए था।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “यह दुखद है कि भारत को अनुमति कि जरूरत पड़ती है और अमेरिका की तरफ से आया यह बयान इसलिए भी दुखद है कि अभी लंबे समय तक खाड़ी क्षेत्र की स्थिति सामान्य नहीं होने वाली। मैं केवल युद्ध की बात नहीं कर रहा हूँ, बल्कि उस समुद्री क्षेत्र की स्थिति की भी बात कर रहा हूँ।”

काले बाजार में रूसी तेल

डॉ हज्जी ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई है कि अमेरिका के साथ डील और छूट की कमी की वजह से भारत ने लगातार रूसी तेल खरीद कुछ हद तक कम किया है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ महीनों में हमने देखा कि भारत की कुछ कच्चे तेल की खरीद, खासकर रूस से, कम हुई है क्योंकि अमेरिका ने रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं।” उन्होंने बताया कि भारतीय रिफाइनरियां पहले रूसी कच्चे तेल पर काफी निर्भर थीं।

उन्होंने कहा, “रिलायंस जैसी भारतीय कंपनियां, खासकर जामनगर स्थित अपनी रिफाइनरियों के लिए, रोसनेफ्ट जैसी रूसी कंपनियों से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदती थीं। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उन्होंने यह खरीद रोक दी। हमें ठीक-ठीक पता नहीं है कि यह क्या है। इसका मतलब बस इतना हो सकता है कि भारत के पास कुछ रूसी तेल टैंकर मौजूद हैं और भारत को उन्हें लेने की अनुमति दे दी गई है।” हालांकि उनका कहना है कि रूसी तेल वास्तव में भारत आना बंद नहीं हुआ।

भारत ने बंद नहीं किया रूसी तेल खरीदना: डॉ. हज्जी

ऊर्जा क्षेत्र के जानकार डॉक्टर हज्जी ने बताया कि उन्होंने देखा है कि रूसी जहाज ओमान तक आते हैं और फिर एक-दो दिन में वापस रूस लौट जाते हैं, जबकि ओमान से भारतीय बंदरगाहों के बीच की दूरी बहुत कम है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनरियां अभी भी छूट वाले रूसी तेल को वैकल्पिक या डॉर्क मार्केट के माध्यम से खरीद रही हैं।

उन्होंने कहा, “सही बात तो यह है कि भारत ने कभी भी रूसी तेल को खरीदना बंद नहीं किया है। दुनिया भर की रिपोर्ट्स में हमें जो 1 और 1.1 मिलियन बैरल का डाटा दिखाई देता है, वह बस आधिकारिक डाटा है। हमें पता है कि भारतीय रिफाइनरियां वैसे भी काले बाजार से रूसी तेल खरीद रही हैं, वह भी रूस द्वारा दी गई छूट के भाव पर।”

गौरतलब है कि हॉर्मुज स्ट्रेट पर ईरान द्वारा अमेरिका और यूरोप के जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, बढ़ते युद्ध की वजह से सभी देशों के जहाजों के लिए स्थिति जटिल बनी हुई है। इसकी वजह से दुनिया भर की ऊर्जा जरूरतों पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि अभी नई दिल्ली के पास पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का भंडार है। इसके अलावा नई बाजारों से भी खरीद की बात की जा रही है। रूस की तरफ से भी यह साफ कर दिया गया है कि वह भारत को तेल देने के लिए तैयार है। हालांकि, इन सब बातों के बीच विपक्ष लगातार मोदी सरकार के ऊपर निशाना साध रहा है, उनका कहना है कि आखिर अमेरिका हमारे संप्रभु देश को अनुमति देने की बात कैसे कह सकता है और इस पर पीएम मोदी अभी तक चुप क्यों हैं?

SOURCE : LIVE HINDUSTAN