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जंग का ऐसा असर, इस्लाम में तीसरी सबसे पवित्र जगह रमजान के जुमे पर भी पड़ी रही सूनी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

रमजान के पहले दो शुक्रवारों में इजरायल ने वेस्ट बैंक से आने वाले फिलिस्तीनियों को सीमित संख्या में (लगभग 10,000) अल-अक्सा में नमाज अदा करने की इजाजत दी थी, लेकिन अब ईरान युद्ध के कारण स्थिति बदल गई है।

इजरायल ने रमजान के शुक्रवार की नमाज के लिए अल-अक्सा मस्जिद पर मुसलमानों को एंट्री नहीं दी। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया। यरुसलम के पुराने शहर में स्थित यह स्थल यहूदियों के लिए सबसे पवित्र और मुसलमानों के लिए इस्लाम का तीसरा सबसे अहम धार्मिक स्थल है, जहां अल-अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक स्थित हैं। इजरायली अधिकारियों ने घोषणा की कि शुक्रवार को पुराने शहर के सभी पवित्र स्थलों (अल-अक्सा मस्जिद, वेस्टर्न वॉल और चर्च ऑफ द होली सेपल्कर को बंद रखा जाएगा। किसी भी धर्म के श्रद्धालु या आगंतुकों को प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला इजरायल के होम फ्रंट कमांड के निर्देशों के अनुसार लिया गया, ताकि जन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। रमजान के पहले दो शुक्रवारों में इजरायल ने वेस्ट बैंक से आने वाले फिलिस्तीनियों को सीमित संख्या में (लगभग 10,000) अल-अक्सा में नमाज अदा करने की इजाजत दी थी, लेकिन अब ईरान युद्ध के कारण स्थिति बदल गई है। युद्ध 1 मार्च से शुरू हुआ, जब ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।

बड़ी संख्या में आते थे मुसलमान

एक ईरानी वारहेड टेंपल माउंट से कुछ सौ मीटर दूर गिरा था, जिससे सुरक्षा खतरा बढ़ गया। इजरायली सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल हिशाम इब्राहिम ने कहा कि ईरान के नेतृत्व वाला ‘मौत का गठबंधन’ लगातार रॉकेट हमले कर रहा है, जो सभी की जान को खतरे में डाल रहा है। इसलिए सार्वजनिक सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। यह फैसला रमजान के दौरान अल-अक्सा में शुक्रवार की नमाज पर पहली बार रोक लगाने वाला है। पहले दो हफ्तों में बड़ी संख्या में मुसलमान वहां नमाज पढ़ने आते थे, लेकिन अब पुराने शहर में केवल निवासियों और दुकानदारों को ही प्रवेश मिल रहा है।

इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल

अल-अक्सा मस्जिद यरुशलम के पुराने शहर में स्थित इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है, जो मक्का और मदीना के बाद आता है। यह टेंपल माउंट (हरम अल-शरीफ) परिसर में दक्षिणी हिस्से में बनी मुख्य क़िबली मस्जिद है, जिसका परिसर लगभग 35 एकड़ में फैला है। इस्लामी परंपरा के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद साहब की इस्रा और मेराज की रात की यात्रा यहीं से हुई, जहां उन्होंने अन्य पैगंबरों के साथ नमाज अदा की और फिर स्वर्ग की सैर की। 7वीं शताब्दी में खलीफा उमर और बाद में उमयाद खलीफा अब्दुल मलिक के समय इसका निर्माण हुआ। यह मुसलमानों के लिए बेहद अहम है, वहीं यहूदी इसे प्राचीन मंदिर का स्थान मानते हैं और ईसाई भी इससे जुड़े हैं। आज यह इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN