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होली पर गुजिया केवल परंपरा नहीं, आयुर्वेद से भी जुड़ा है कनेक्शन, जानें कैसे खाएं?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Ayurvedic Method to make gujiya for benefits: होली के त्योहार पर गुजिया बनाने की परंपरा यूं ही नही है, इसका आयुर्वेद और सेहत से भी कनेक्शन जुड़ा हुआ है। आयुर्वेदाचार्य ने बताया फायदे के लिए किन 3 चीजों को जरूर गुजिया में डालना चाहिए।

होली के त्योहार पर गुजिया बनाने की परंपरा काफी पुरानी है। उत्तर भारत के लगभग हर घर में होली मनाने के साथ आटे की पूरियों में मीठा भरकर गुजिया तैयार की जाती है। पुराने समय में इन पूरियों में गुड़ में ड्राई फ्रूट्स मिलाकर भरा जाता था। वहीं समय के साथ इसमे खोवा, चीनी और ड्राई फ्रूट्स के साथ और भी कई चीजों की स्टफिंग की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली के त्योहार में गुजिया खाना और बनाना केवल एक प्राचीन परंपरा नहीं है बल्कि इसका आयुर्वेद से भी कनेक्शन जुड़ा हुआ है। वीशुद्ध नाम के इंस्टाग्राम पेज पर आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर निशांत गुप्ता ने जिक्र किया है कि आयुर्वेद की पुस्तक भावप्रकाशविघंटु में गुजिया खाने के फायदे और सही चीजों को मिलाकर बनाने का तरीका बताया गया है। फाल्गुन के मौसम में गुजिया खाने के शरीर को भी फायदे मिलते हैं। तो चलिए जानें आखिर गुजिया में किन चीजों को मिलाकर खाया जाए तो ये फायदा करेगा।

आयुर्वेदाचार्य ने बताया बनाने का सही तरीका

आयुर्वेदाचार्य निशांत गुप्ता ने बताया कि आयुर्वेद की किताब में गुजिया को सम्पाव के नाम से बताया गया है। जिसे बनाते वक्त इसमे इलायची के दाने, काली मिर्च और एक चुटकी के बराबर भीमसेनी कपूर का इस्तेमाल किया जाए। जिससे ये सेहत को फायदा पहुंचाएं।

आखिर क्यों गुजिया को इस मौसम में खाने का जिक्र है आयुर्वेद में

  1. आयुर्वेद में बताया गया है कि सर्दियों के मौसम जाने और गर्मियों के मौसम आने के बीच के इस मौसम यानि ऋतु परिवर्तन में गुजिया बनाते वक्त जब इन तीन चीजों को डालकर बनाते और खाते हैं तो इससे सेहत को ये फायदे होते हैं।

2) इस मौसम में शरीर में संचित कफ पिघलने लगता है जिससे पेट में कई तरह के इंफेक्शन होने लगते हैं। इसलिए आयुर्वेद में गुजिया में भीमसेनी कपूर की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर बनाने और खाने से पेट की समस्याओं से राहत मिलती है।

3) वहीं, जब गुजिया को घी में बनाया जाता है तो आयुर्वेद के अनुसार ऋतु बदलने के समय शरीर की अग्नि को संतुलित करता है और वात को शांत करता है। साथ ही शरीर को स्निग्ध करता है।

4) गुजिया में मिला खोवा बल और ऊर्जा देता है और त्योहार के दौरान एक्टिव बनाता है।

5) सूखे मेवे, नारियल, काजू, बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स को गुजिया में डाला जाता है। ये मेवा शरीर के स्ट्रेंथ को बढ़ाते हैं, इम्यूनिटी को सपोर्ट करते हैं और मानसिक रूप से पीस देते हैं।

6) इलायची, काली मिर्च मिलाने से पाचन आसान होता है और बढ़ रही कफ को कंट्रोल करता है।

7) लेकिन किसी भी चीज को खाते वक्त संतुलन जरूरी है। जैसे गुजिया को भी बैलेंस करके खाना जरूरी है। जिससे कि ये शरीर में कफ और पाचन दोनों को बिगाड़ ना सके। ज्यादा मिठास और तलने की वजह से ये भारी हो जाती है और पचने में मुश्किल इसलिए त्योहार में सीमित मात्रा में ही गुजिया खाएं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN