Home व्यापार समाचार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर, फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस पर लेटेस्ट रिपोर्ट

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर, फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस पर लेटेस्ट रिपोर्ट

6
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट भी बहस के केंद्र में हैं। 3.25 के फिटमेंट फैक्टर की मांग दोहराई गई है, वहीं सालाना बढ़ोतरी को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। कुछ संगठनों ने 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का सुझाव दिया है।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच हलचल तेज हो गई है। पिछले साल नवंबर में जब सरकार ने 8th पे कमीशन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए थे, तभी से कर्मचारी संगठनों ने यह कहना शुरू कर दिया था कि उनकी कई अहम मांगों को उसमें जगह नहीं दी गई। अब जब आयोग ने कामकाज की रफ्तार पकड़ ली है, तो उम्मीदें भी बढ़ रही हैं और दबाव की राजनीति भी।

क्या है अपडेट

हाल ही में आयोग को जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में दफ्तर आवंटित किया गया है। आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसे आयोग के ऑपरेशनल फेज में प्रवेश का संकेत माना जा रहा है। इसी बीच एनसी-जेसीएम (स्टाफ साइड) की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक 25 फरवरी से शुरू हुई, जिसमें करीब 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी मांगों को एक संयुक्त चार्टर के रूप में अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू की गई।

फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस पर चर्चा

सबसे ज्यादा चर्चा फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठनों ने मांग रखी है कि गैर-CGHS क्षेत्रों में रहने वाले कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए FMA को मौजूदा 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए। उनका तर्क है कि मेडिकल महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है और 1,000 रुपये में इलाज की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं, खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए।

ये भी हैं चर्चा में

फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट भी बहस के केंद्र में हैं। 3.25 के फिटमेंट फैक्टर की मांग दोहराई गई है, वहीं सालाना बढ़ोतरी को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। कुछ संगठनों ने 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का सुझाव दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी से वास्तविक आय में खास फर्क नहीं पड़ता। साथ ही परिवार इकाई की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग भी उठी है, ताकि आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जा सके।

इसके अलावा LTC को नकद देने, लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 से बढ़ाकर 400 दिन करने और रिटायरमेंट लाभों में सुधार की मांग भी शामिल है। पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नई पेंशन योजना (NPS) का मुद्दा भी फिर गरमा गया है। कर्मचारी संगठनों ने OPS को पूरी तरह बहाल करने की मांग दोहराई है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है और अंतिम सिफारिशों में कर्मचारियों को कितनी राहत मिलती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN