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कौन हैं हसन खुमैनी? उन पर क्यों टिकीं दुनिया भर की निगाहें, क्या दिवंगत खामेनेई की ले पाएंगे जगह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान में खामेनेई की मौत के बाद सुरक्षा संकट के साथ-साथ राजनैतिक संकट भी गहरा रहा है। सत्ता के केंद्र में अब नजर इस्लामिक गणराज्य की स्थापना करने वाले खुमैनी के पोते हसन खुमैनी पर है, जो कि इस्लामिक सत्ता के खिलाफ समय-समय पर अपनी आवाज उठाते रहे थे।

अमेरिका और इजरायल के हमलों में खामेनेई की हत्या के बाद ईरान में राजनैतिक रूप से भी संकट गहरा गया है। खामेनेई भले ही अपनी मृत्यु के बाद के संकटों को लेकर एक समिति का गठन करके गए हों, लेकिन अब उनकी गद्दी के लिए और ईरान पर प्रभाव बढ़ाने के लिए तमाम लोग सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं, इस्लामिक गणराज्य ईरान के संस्थापक दिवंगत अयातुल्ला खुमैनी के पोते हसन खुमैनी। ईरान के जानकारों का मानना है कि खामेनेई के जिंदा रहते भले ही हसन सार्वजनिक रूप से ज्यादा नजर नहीं आए हों, लेकिन अब वह नया सुप्रीम लीडर तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

दिवंगत अयातुल्ला खुमैनी के 15 पोते-पोतियों में से 53 वर्षीय हसन खुमैनी सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। ईरान की राजनैतिक गलियों में उन्हें एक सुधारवादी व्यक्तित्व के तौर पर देखा जाता है, जो कि पश्चिमी देशों के साथ बेहतर संबंध से लेकर सामान्य लोगों और महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाते रहे हैं। वह ईरान के पूर्व राष्ट्रपति हसन रुहानी के करीबी भी माने जाते रहे हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में पश्चिमी देशों के साथ संवाद की नीति अपनाई थी।

दादा के मकबरे की देखभाल करते हैं हसन

ईरान में इस्लामिक गणराज्य की स्थापना करने वाले खुमैनी का मकबरा दक्षिणी तेहरान में बना हुआ है। हसन वर्तमान में अपने दादा के मकबरे के संरक्षक के तौर पर काम कर रहे हैं, ईरान के शिया समुदाय में यह बहुत ही ज्यादा पवित्र और महत्वपूर्ण काम है, हालांकि सार्वजनिक रूप से दिखने वाले खुमैनी ने कभी भी सरकारी पद नहीं संभाला है।

खामेनेई के खिलाफ उठाते रहे आवाज

ईरान की राजनीतिक गलियों में खुमैनी को कट्टरपंथी नेताओं का विरोधी करार दिया जाता है। वह भी लगातार सत्ता के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने हमेशा से इस्लामिक गणराज्य के प्रति अपनी वफादारी की बात कही है, लेकिन साथ ही सुधारवादी कदमों का भी समर्थन किया है।

इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ उनके द्वारा उठाई गई आवाज में सबसे बड़ा मुद्दा उस समय खड़ा हुआ था, जब खामेनेई ने चुनाव में सुधारवादी नेताओं के मैदान में उतरने पर रोक लगा दी थी। इसका विरोध करते हुए उन्होंने कहा था, “आप मेरे लिए किसी को चुनकर मुझे वोट देने के लिए नहीं कह सकते!” इस चुनाव में खुमैनी के करीबी हसन रुहानी की जीत हुई थी, हालांकि बाद में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी।

महसा अमीनी की मौत पर मांगी जवाबदेही

2022 में ईरान में हिजाब को लेकर एक युवती ‘महसा अमीनी’ की मौत को लेकर भी खुमैनी सत्ता के खिलाफ खड़े हुए नजर आए थे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को “मार्गदर्शन और शिक्षा” के बहाने 22 वर्षीय लड़की के साथ क्या हुआ, इसका पारदर्शी और सटीक विवरण देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने खामेनेई के खिलाफ नारे लगाने वाले प्रदर्शनकारियों की भी आलोचना की। दिसंबर-जनवरी में फैली अशांति, जो 1979 की क्रांति के बाद सबसे घातक मानी गई के दौरान उन्होंने प्रतिष्ठान का समर्थन किया और कुछ हिंसा की तुलना इस्लामिक स्टेट से की।

गार्जियन काउंसिल ने किया अयोग्य घोषित

लगातार ईरान में सुधारवादी कदमों की वकालत करने वाले खुमैनी ने एक दशक पहले ईरान के एसेम्बली एक्सपर्ट का चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। यह वही संस्था है, जो कि ईरान के सर्वोच्च नेता का चयन करती है। उन्हें शुरुआत में खामेनेई से उम्मीदवारी की स्वीकृति मिली थी, लेकिन बाद में गार्जियन काउंसिल ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। आधिकारिक तौर पर उनके धार्मिक पद ‘होजतोलइस्लाम’ (अयातुल्ला से एक स्तर नीचे) को कारण बताया गया, लेकिन इसे सुधारवादी खेमे की संभावित चुनौती को रोकने के प्रयास के रूप में देखा गया।

खामेनेई की आईआरजीसी की थी आलोचना

खुमैनी को दबे तौर पर खामेनेई के आलोचक के तौर पर देखा जाता है। 2008 में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या आईआरजीसी का बनाया जाना सही है। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि जो लोग उनके दादा की विरासत के प्रति वफादारी का दावा करते हैं, उन्हें सेना को राजनीति से दूर रखने के आदेश का पालन करना चाहिए, जिसे ईरान के शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की आलोचना के रूप में देखा गया। फिर भी खुमैनी को इस सैन्य संगठन का करीबी माना जाता है।

तमाम राजनैतिक मतभेदों के बाद भी इजरायल को लेकर खोमेनी की राय खामेनेई से मिलती थी। पिछले वर्ष इजराइल और ईरान के बीच 12 दिन चले हवाई युद्ध के दौरान, खोमेनी ने खामेनेई को पत्र लिखकर उनके नेतृत्व की प्रशंसा की और कहा कि ईरानी मिसाइलें इजराइल के लिए “दुःस्वप्न” बन गई हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN