Source :- LIVE HINDUSTAN
बता दें कि अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान के खिलाफ एक सैन्य अभियान शुरू किया। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें हाइफा को भी निशाना बनाया गया है। हाइफा, अडानी समूह का पोर्ट है।
ईरान की इजराइल और अमेरिका के साथ छिड़ी जंग का सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। तमाम एक्सपर्ट बता रहे हैं कि इस दौरान उन शेयरों में हलचल हो सकती है जिनका कनेक्शन ईरान या इजराइल से है। इनमें से एक शेयर गौतम अडानी समूह की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन (एपीएसईजेड) का भी हो सकता है। दरअसल, अडानी पोर्ट्स का बंदरगाह इजराइल में स्थित है। हालांकि, अडानी समूह ने रविवार को कहा कि इजराइल स्थित उसका ‘हाइफा बंदरगाह’ पूरी तरह सुरक्षित है और परिचालन की स्थिति में है।
क्या कहा अडानी पोर्ट्स ने?
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन (एपीएसईजेड) ने एक बयान में कहा कि उसके सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और बंदरगाह की सभी संपत्तियां तथा बुनियादी ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ईरान के किसी ड्रोन या मिसाइल ने बंदरगाह को नुकसान पहुंचाया है या नहीं। बंदरगाह प्राधिकरण लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और इजराइल के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा मंत्रालय के साथ निकट समन्वय बनाए हुए है। प्राधिकरण उनके निर्देशों के अनुसार ही काम कर रहा है। बयान में कहा गया कि हम अपने लोगों की सुरक्षा और परिचालन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि इजराइल की आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए स्थिरता बनी रहे।
बता दें कि अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान के खिलाफ एक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें हाइफा को भी निशाना बनाया गया है।
शेयर का परफॉर्मेंस
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन के शेयर की बात करें तो 1520.85 रुपये पर है। एक दिन पहले के मुकाबले शेयर शुक्रवार को 1.92% टूटकर बंद हुआ। फरवरी में ही शेयर 1,584 रुपये तक गया था। यह शेयर के 52 हफ्ते का हाई है। 52 हफ्ते के लो की बात करें तो 1,036.35 रुपये है।
शेयर बाजार में गिरावट का डर
एक्सपर्ट की मानें तो पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण सोमवार को शेयर बाजारों में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। हालांकि, बाजार में गिरावट इस बार पर निर्भर करेगी कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के रिसर्च हेड संतोष मीणा ने कहा- पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के बाद निवेशकों का उत्साह और भी कम हो गया है। मीणा ने कहा कि भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति, राजकोषीय संतुलन और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के लिए जोखिम पैदा करती हैं। यह बाहरी झटका बाजार के लिए एक तकनीकी रूप से कमजोर क्षण में आया है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा- बाजार बहुत नकारात्मक प्रतिक्रिया देगा। यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो हमारे व्यापार संतुलन और भुगतान संतुलन पर असर पड़ेगा, क्योंकि हम अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात से पूरा करते हैं। बता दें कि पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 1,527.52 अंक या 1.84 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी 392.6 अंक या 1.53 प्रतिशत टूट गया था।
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