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30 बमों से हमला, मिट्टी में मिल गया लीडरशिप हाउस; रूह कंपा देगी खामेनेई की मौत की कहानी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरानी कानून के मुताबिक ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ को जितनी जल्दी हो सके नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करना होगा। यह 88 सदस्यीय मौलवियों की एक संस्था है, जो ईरान के सबसे शक्तिशाली पद के लिए उम्मीदवार तय करती है।

Ali Khamenei Death News: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर चलाए गए ऑपरेशन को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एक सनसनीखेज रिपोर्ट में दावा किया है कि इजरायल और अमेरिका ने खामेनेई और उनके शीर्ष सलाहकारों को एक साथ निशाना बनाने के लिए एक दुर्लभ अवसर का इंतजार किया था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर ऐसे तीन संभावित मौकों की पहचान की गई थी, जिसके बाद शनिवार को दिनदहाड़े इस भीषण हवाई हमले को अंजाम दिया गया।

30 बमों का प्रहार, मलबे में तब्दील हुआ लीडरशिप हाउस

खुफिया अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि तेहरान स्थित खामेनेई के परिसर पर 30 उच्च क्षमता वाले बम गिराए गए। यह हमला इतना सटीक और विनाशकारी था कि इसने पूरे परिसर को खंडहर में बदल दिया। दिन के उजाले में किए गए इस हमले का उद्देश्य न केवल खामेनेई को खत्म करना था, बल्कि ईरान की शीर्ष सैन्य और राजनीतिक लीडरशिप को एक साथ नेस्तनाबूद करना था।

ईरान में अस्थायी शासन की शुरुआत

खामेनेई की मौत के साथ ही ईरान के संविधान के अनुसार देश के संचालन के लिए एक अस्थायी शासी परिषद का गठन कर दिया गया है। इस्लामिक गणराज्य के कानून के तहत, यह परिषद तब तक देश का कार्यभार संभालेगी जब तक कि नए सर्वोच्च नेता का चयन नहीं हो जाता। इस परिषद में ईरान के वर्तमान सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, ईरान के कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई के अलावा तीसरा सदस्य गार्जियन काउंसिल का एक सदस्य होगा, जिसे ‘एक्सपीडिएंसी काउंसिल’ द्वारा चुना जाएगा।

यह परिषद वर्तमान में देश की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी कर रही है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब ईरान के कई शहरों में तनाव व्याप्त है और सीमा पर युद्ध जैसे हालात हैं।

अगला सुप्रीम लीडर कौन?

ईरानी कानून के मुताबिक ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ को जितनी जल्दी हो सके नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करना होगा। यह 88 सदस्यीय मौलवियों की एक संस्था है, जो ईरान के सबसे शक्तिशाली पद के लिए उम्मीदवार तय करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संक्रमण काल में ईरान के भीतर सुधारवादियों और कट्टरपंथियों के बीच सत्ता संघर्ष तेज हो सकता है। जहां एजेई जैसे कट्टरपंथी नेता अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेंगे, वहीं राष्ट्रपति पेजेशकियन पर देश को स्थिरता देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN