Source :- LIVE HINDUSTAN
क्या रोज 8 गिलास पानी पीना सच में जरूरी है? न्यूट्रिशनिस्ट निकिता बार्डिया बताती हैं कि बिना इलेक्ट्रोलाइट्स के ज्यादा पानी पीना थकान, सूजन और ब्रेन फॉग की वजह बन सकता है।
हम में से ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि अगर दिनभर में 8 गिलास पानी पी लिया, तो शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड रहेगा। प्यास ना भी लगे, तब भी हम पानी पीते हैं- कभी घड़ी देखकर, कभी ऐप की रिमाइंडर पर। लेकिन क्या यह तरीका सच में सेहतमंद है? न्यूट्रिशनिस्ट Nikita Bardia इस आम धारणा को चुनौती देती हैं। उनके अनुसार, सिर्फ सादा पानी पीना हमेशा हाइड्रेशन नहीं होता। जब पानी के साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स नहीं मिलते, तो शरीर उसे रोक नहीं पाता और थकान, ब्रेन फॉग, सूजन जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। यही वजह है कि सही हाइड्रेशन गिनती नहीं, बल्कि शरीर के संकेत समझने से आता है।
शरीर में असल में क्या होता है?
पानी सीधे कोशिकाओं में जाकर नहीं रुकता। यह शरीर में सोडियम बैलेंस के अनुसार अंदर-बाहर होता है। जब आप बहुत ज्यादा सादा पानी पीते हैं:
- खून में सोडियम डायल्यूट हो जाता है।
- शरीर इसे ठीक करने के लिए ज्यादा मिनरल्स बाहर निकाल देता है।
- पेशाब के जरिए इलेक्ट्रोलाइट्स लॉस होता है।
- कोशिकाएं पानी रोक नहीं पातीं।
- इस स्थिति को माइल्ड हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है, जो आजकल काफी आम है।
हल्के सोडियम असंतुलन के लक्षण
- पूरी नींद के बाद भी थकान: 7–8 घंटे की नींद लेने के बावजूद सुबह उठते ही शरीर भारी और सुस्त महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि कोशिकाओं तक सही मात्रा में पानी और मिनरल्स नहीं पहुंच पा रहे। सोडियम की कमी से सेल्स एनर्जी को ठीक से होल्ड नहीं कर पातीं, जिससे दिन की शुरुआत ही थकान के साथ होती है।
- दोपहर में अचानक एनर्जी क्रैश: दोपहर 2–4 बजे के बीच अचानक कमजोरी, आलस या नींद आना सिर्फ काम के दबाव की वजह नहीं होता। जब शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ता है, तो ब्लड प्रेशर और एनर्जी लेवल अचानक गिर सकता है, जिसे लोग आमतौर पर ‘पोस्ट-लंच स्लंप’ समझ लेते हैं।
- मांसपेशियों में ऐंठन, खासकर रात में: रात के समय पैरों या पिंडलियों में अचानक खिंचाव या ऐंठन सोडियम और पोटैशियम की कमी का आम लक्षण है। ये मिनरल्स मांसपेशियों के सही संकुचन और आराम के लिए जरूरी होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो मसल्स अचानक जकड़ जाती हैं।
- सिरदर्द जो दवा से भी ठीक ना हो: अगर बार-बार सिरदर्द होता है और पेनकिलर लेने के बाद भी राहत नहीं मिलती, तो यह डिहाइड्रेशन नहीं बल्कि ओवर-डायल्यूशन का संकेत हो सकता है। सोडियम कम होने पर दिमाग की कोशिकाएं सूजने लगती हैं, जिससे लगातार सिरदर्द बना रह सकता है।
- सुबह चेहरे या हाथों में सूजन: सुबह उठते ही आंखों के नीचे सूजन, उंगलियों में जकड़न या चेहरे पर पफीनेस दिखना इस बात का संकेत है कि शरीर पानी को सही तरह से मैनेज नहीं कर पा रहा। सोडियम असंतुलन की वजह से पानी कोशिकाओं के बाहर जमा हो जाता है, जिससे सूजन नजर आती है।
- ध्यान लगाने में दिक्कत (ब्रेन फॉग): फोकस ना कर पाना, बातों को भूल जाना या ‘धीमा दिमाग’ महसूस होना भी हल्के सोडियम असंतुलन से जुड़ा हो सकता है। दिमाग सही तरह से काम करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस पर निर्भर करता है। जब यह बिगड़ता है, तो सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
- मीठा या नमकीन खाने की तेज क्रेविंग: अचानक बहुत ज्यादा मीठा या नमकीन खाने का मन करना शरीर का संकेत होता है कि उसे मिनरल्स की जरूरत है। यह कोई ‘कमजोर इच्छाशक्ति’ नहीं, बल्कि शरीर का नेचुरल अलार्म सिस्टम है, जो बैलेंस ठीक करने की कोशिश करता है।
न्यूट्रिशनिस्ट ने क्या बदलाव किए?
निकिता बार्डिया बताती हैं कि उन्होंने कुछ छोटे लेकिन असरदार बदलाव किए:
- 8 गिलास का टारगेट छोड़ दिया और प्यास के हिसाब से पानी पीना शुरू किया।
- सुबह के पानी में थोड़ा सेंधा नमक और नींबू मिलाया।
- खाने से पोटैशियम पर फोकस किया (नारियल पानी, केला, दही)।
- शरीर के संकेतों को ट्रैक किया, ना कि सिर्फ पानी के गिलास गिने।
- सिर्फ 2 हफ्तों में एनर्जी बेहतर हुई, सूजन कम हुई और ब्रेन फॉग गायब हो गया।
सही हाइड्रेशन का मतलब क्या है?
सही हाइड्रेशन का मतलब है:
- पानी + इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन
- प्यास को समझना
- मौसम, एक्टिविटी और शरीर की जरूरत के अनुसार पानी पीना
हेल्थ नोट: हर किसी के लिए एक ही नियम काम नहीं करता। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए अन्य डॉक्टर से उचित सलाह ले सकते हैं।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN



