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कर्ज के बोझ तले हांफ रहे US-चीन; एक पर 96 तो दूसरे पर GDP का 122% ऋण, ट्रंप का दांव भी बेअसर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अकेले वैश्विक सार्वजनिक ऋण (Global Public Debt) के एक-तिहाई से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार है। चीन इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसका सरकारी कर्ज लगभग 18.68 ट्रिलियन डॉलर है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। वॉशिंगटन स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान Institute of International Finance (IIF) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक दुनिया का कुल कर्ज बढ़कर रिकॉर्ड 348 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि कोविड-19 महामारी के बाद सबसे तेज मानी जा रही है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन का सबसे बड़ा योगदान रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और चीन के तेजी से कर्ज बढ़ाने से ग्लोबल कर्ज में सिर्फ एक साल में करीब 29 ट्रिलियन डॉलर का नया कर्ज जुड़ा है। इसमें 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक सरकारी उधारी रही। अमेरिका, चीन और यूरो जोन ने मिलकर कुल कर्ज वृद्धि में लगभग तीन-चौथाई हिस्सा जोड़ा है, जिससे वैश्विक वित्तीय संतुलन पर दबाव और बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के कारण कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। यह “कैपिटल एक्सपेंडिचर सुपर साइकिल” आने वाले वर्षों में भी कर्ज बढ़ाने वाला प्रमुख कारक बना रह सकता है। इस रिपोर्ट में चीन की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां सरकारी कर्ज GDP के 88.4% से बढ़कर 96.8% तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अकेले वैश्विक सार्वजनिक ऋण (Global Public Debt) के एक-तिहाई से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार है। चीन इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसका सरकारी कर्ज लगभग 18.68 ट्रिलियन डॉलर है।

2031 तक US का कर्ज GDP का 140% तक पहुंच सकता है

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में यह आंकड़ा और अधिक है, जो जीडीपी के 122% से भी ऊपर चला गया है। इसके अलावा International Monetary Fund (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिका का बढ़ता सार्वजनिक कर्ज वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है। IMF के अनुसार, यदि यही रुझान जारी रहा तो 2031 तक अमेरिका का कर्ज GDP के 140% तक पहुंच सकता है। संस्था ने अमेरिकी सरकार को तत्काल और ठोस वित्तीय सुधार (fiscal consolidation) लागू करने की सलाह दी है।

ट्रंप का टैरिफ दांव भी बेअसर

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन स्थित संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से कर्ज के बढ़ते ट्रेंड को पलटने के लिए कोई उल्लेखनीय आमदनी नहीं हो पायी है और इससे “अफ़ोर्डेबिलिटी की चिंताएँ बढ़ गई हैं। इसमें आगे कहा गया है कि 2036 तक जनता पर मौजूद US फ़ेडरल कर्ज में और 20 परसेंट पॉइंट की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जो GDP के 120 परसेंट से ज़्यादा हो जाएगा।

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड्स में भरोसा कायम

हालांकि, बढ़ते कर्ज के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी बाजार अब भी निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड्स में भरोसा कायम है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वैश्विक स्तर पर कर्ज-से-GDP अनुपात लगातार पांचवें साल घटकर 308% पर आ गया है, लेकिन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह अनुपात रिकॉर्ड 235% से अधिक पहुंच गया है, जो भविष्य में वित्तीय अस्थिरता का संकेत दे सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN