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कर्मचारियों की मिलीभगत या बड़ा सिंडिकेट? IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड की पूरी कहानी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

IDFC First Bank Fraud Story: IDFC फर्स्ट बैंक ने रविवार को अपने चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध धोखाधड़ी का खुलासा किया, जो हरियाणा सरकार से जुड़े खातों से संबंधित है। आइए जानें इस फ्रॉड के पीछे किसका हाथ हो सकता है।

IDFC फर्स्ट बैंक ने रविवार को अपने चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की संदिग्ध धोखाधड़ी का खुलासा किया, जो हरियाणा सरकार से जुड़े खातों से संबंधित है। बैंक के अनुसार, ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने “संभवतः बाहरी लोगों की मिलीभगत से” बैंक के बाहर खाता रखने वाले लाभार्थियों को धोखाधड़ी से पैसे ट्रांसफर किए। बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने इसे “स्पष्ट रूप से कर्मचारी धोखाधड़ी का मामला” बताया और कहा कि इसमें बाहरी लोगों के शामिल होने के भी सबूत हैं। यह राशि 490 करोड़ रुपये (रीकंसिलिएशन से पता चली) और अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये (बैंक के अनुमानित) को मिलाकर बनी है। बैंक यह जांच कर रहा है कि पैसे ट्रांसफर और निकासी के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेज (अधिकार पत्र और चेक) असली थे या जाली।

बैंक पर कितना होगा वित्तीय असर?

मिंट की खबर के मुताबिक बैंक ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि इसका असर संभाला जा सकता है। हरियाणा सरकार की जमा राशि बैंक की कुल जमा राशि का लगभग 0.5% है, जबकि राज्य और केंद्र सरकारों की मिलाकर कुल जमा राशि 8-10% है। दिसंबर के अंत तक बैंक के पास कुल 2.82 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि थी।

इस खुलासे और हरियाणा सरकार के नए जमा पर रोक लगाने के बाद करीब 200 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है। हालांकि यह धोखाधड़ी बैंक के दिसंबर तिमाही के मुनाफे (503 करोड़ रुपये) के करीब है, फिर भी बैंक प्रबंधन को उम्मीद है कि मार्च तिमाही में वह मुनाफे में ही रहेगा। बैंक ने जांच जारी रहने के दौरान ही हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को 583 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है।

क्या निजी बैंकों पर बढ़ेगी निगरानी?

विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद निजी क्षेत्र के बैंकों में सरकारी जमा राशि पर निगरानी और सख्त हो सकती है। कुछ जमा राशि मध्यम अवधि में सरकारी बैंकों में भी स्थानांतरित हो सकती है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और इसे कोई व्यवस्थागत समस्या नहीं बताया है।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, यह एक अलग-थलग मामला भर लगता है, लेकिन इससे बैंक से हरियाणा सरकार की करीब 1,450 करोड़ रुपये की और निकासी हो सकती है, जो उसकी कुल जमा राशि का 0.5% है। इससे बैंक के करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट डिपॉजिट पर असर पड़ सकता है।

बैंक और हरियाणा सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

बैंक ने फोरेंसिक ऑडिट के लिए केपीएमजी नाम की प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म को नियुक्त किया है, जिसमें चार से पांच सप्ताह लग सकते हैं। सभी संदिग्ध कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पूरे बैंकिंग सिस्टम में रिकवरी और लाइन मार्किंग की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रबंधन ने बताया कि पैसे कई दूसरे बैंकों में गए हैं और वे सब सहयोग कर रहे हैं। अगर कई पक्षों के शामिल होने का पता चलता है, तो बैंक कानूनी कार्रवाई करेगा और अगर कोई देनदारी बैंक की बनती है, तो वह उसे चुकाएगा।

वहीं, हरियाणा सरकार ने मंगलवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से फंड के अनधिकृत हस्तांतरण की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। साथ ही यह समिति राज्य की बैंकिंग नीति की समीक्षा भी करेगी। वहीं, इस बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को नई जमा राशि रखने के लिए डी-एम्पैनल कर दिया है और प्रभावित खातों से जुड़े लेनदेन की अपनी समीक्षा शुरू कर दी है।

पिछले बैंक धोखाधड़ी मामलों से क्या सबक?

हाल के मामले बताते हैं कि धोखाधड़ी से अक्सर जमाकर्ताओं का भरोसा डगमगाता है और पैसे की निकासी शुरू हो जाती है। एमकै के अनुसार, मार्च 2025 में इंडसइंड बैंक में आंतरिक लेखांकन बेमेल के कारण 1,960 करोड़ रुपये का अंतर आया था, जिससे मार्च तिमाही में खुदरा और छोटे बिजनेस की जमा राशि में 3,350 करोड़ रुपये की गिरावट आई थी। फरवरी 2025 में न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक में नकदी बेमेल के बाद आरबीआई ने निकासी पर रोक लगा दी थी। इसी तरह के कर्मचारियों से जुड़े फ्रॉड आईसीआईसीआई बैंक और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक में भी सामने आए थे, हालांकि छोटे पैमाने पर।

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