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भारत के दुश्मनों का काल बनेगी ‘गोल्डन हेरोइजन’, इजरायल ने दिया ऑफर; ब्रह्मोस से भी तेज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा की चर्चा पूरे देश में है। इसी बीच खबरें आई हैं कि इजरायल ने भारत को अपनी सबसे तेज गोल्डन हेरोइजन बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम देने की पेशकश की है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

PM Modi visit to israel: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी इजरायल यात्रा लगातार दोनों देशों के बीच में चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले आठ सालों में पीएम की यह पहली इजरायल यात्रा होगी। इस यात्रा में रक्षा, एनर्जी और एआई के क्षेत्र में बड़े समझौते होने की संभावना है। इसी बीच ऐसी खबरें सामने आई हैं कि इजरायल ने भारत को अपनी सबसे तेज मिसाइस सिस्टम में से एक गोल्डन हेरोइजन देने की पेशकश की है। हालांकि, अभी तक इस पर इजरायल या भारत की तरफ से आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।

क्या है गोल्डन हेरोजाइन

लगातार हमास के साथ युद्ध में उलझे इजरायल ने अपने मिसाइल सिस्टम को पहले से भी काफी ज्यादा मजबूत किया है। इसी क्रम में उसने गोल्डन हेरोजाइन नामक एक एयर लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम पर भी काम शुरू किया था, हालांकि इस पर आधिकारिक जानकारी बहुत सीमित है।

अक्तूबर 2024 में इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने के ठीक पहले लीक हुए अमेरिकी दस्तावेजों के मुताबिक इजरायल दो प्रणालियों पर काम कर रहा था। इसमें गोल्डन हेरोजाइन और रॉक्स सामिल है। गोल्डन हेरोजाइन इजरायल की वायुसेना की ताकत को और भी ज्यादा बढ़ाती है।इसकी रेंज की बात की जाए तो इसकी अनुमानित मारक क्षमता ककरीब 1,500 से 2,000 किलोमीटर के बीच बताई जाती है।

फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक एक विशेषज्ञ ने बताया कि इस मिसाइल सिस्टम की रेंज इतनी है कि इजरायली विमान ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश किए बिना तेहरान को निशाना बना सकते हैं। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि लड़ाकू विमान से दागे जाने पर इसकी प्रभावी रेंज लगभग 800 किलोमीटर हो सकती है।

भारत को क्या फायदा?

पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने अपनी महत्वता को बड़ी ही अच्छी तरह से प्रदर्शित किया था। भारतीय मिसाइलों ने पाकिस्तान में घुसकर जमकर तबाही मचाई थी। हालांकि अब भारत इसे और भी ज्यादा मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गोल्डन हेरोजाइन भारतीय वायुसेना के सुखोई30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के साथ सही से लगाए जा सकते हैं, ऐसे में भारत अगर इनकी खरीद को मंजूरी देता है, तो यह वायुसेना की क्षमता को बढ़ाएगा।

क्यों खास है गोल्डन हेरोइजन

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक गोल्डन हेरोइजन गहरे भूमिगत और भारी सुरक्षा वाले ढ़ांचों को भी भेदने में सक्षम है। गाजा में हमास के जमीन के अंदर बने ठिकानों को तबाह करने के लिए बनाई गईं इन मिसाइलों ने इजरायल का बहुत साथ दिया है। यह मिसाइलें विमान से छोड़े जाने के बाद एक ऊंचाई पर बैलिस्टिक साइट का पालन करती है। इसके बाद यह सीधी लक्ष्य की ओर गिरती हैं। अंतिम चरण में इनकी गति करीब 5 मैक से अधिक हो जाती है। यानी यह मिसाइल एक हाइपर सोनिक बताई जाती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की गति मैक 2.8 है, जो कि ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN